जैसलमेर में 80 करोड का प्रोजेक्ट हो गया फ्लाॅप

जागरूक टाइम्स 269 Oct 17, 2020

जैसलमेर, जिला मुख्यालय पर स्थित सार्वजनिक निर्माण विभाग के डाक बंगलों को पीपीपी मोड पर देने की सरकार की मंषा सिरे नहीं चढ पाई है। सरकार की तैयार की गई योजना फ्लाॅप हो गई। उसके बाद सरकार ने अब नई योजना बनाई है। इससे पर्यटन नगरी की अहम लोकेषन पर आया डाक बंगलों की जमीन का अधिकतम इस्तेमाल संभव हो सके। सरकार ने इस बार निजी फर्मो से आवेदन आमंत्रित किए है, जिसके अंतर्गत विस्तृत परियोजना रिपोर्ट भी उन्हें ही बनानी होगी। सरकार आने वाले सभी आवेदनों पर विचार कर अग्रिम कार्रवाई करेगी। वर्तमान में यह योजना राजधानी स्तर पर तैयार होने की जानकारी मिली है।

जानकारी के अनुसार जैसलमेर सहित अन्य शहरों में भी पीपीपी मोड के तहत बनाई गई योजना सिरे नहीं चढ पाई। उससे सबक लेते हुए अब सरकार ने डाक बंगलों की जमीन का बेहतरीन उपयोग के लिए नए सिरे से आवेदन मांगे है। जिसके अंतर्गत निवेषको से ही डीपीआर तैयार करने को कहा गया है। यानी वे ही यह तय करें कि उन्हें किस तरह का निर्माण वहां करवाना है तथा कितनी राषि का निवेष करने को वे इच्छुक है। बताया जाता है कि जैसलमेर डाक बंगलों में होटल निर्माण करने के लिए जयपुर की एक फर्म ने दिलचस्पी दिखाई है। कुछ समूह मिलकर भी यह काम हाथ में ले सकते है। अभी तक विभाग के अधिकारियों को डीपीआर के बारे में जानकारी नहीं है। वर्तमान डाक बंगलों में कुल 14 कमरे है। जिनमें लगभग सभी में कुलर लगे हुए है वहीं दो में एयरकंडीषनर की सुविधा है। कलेक्टेªट के एकदम पास स्थित इस डाक बंगलों में वर्ष पर्यन्त मेहमान ठहरते है।
जानकारी के अनुसर जैसलमेर सहित अजमेर, अलवर, माउंट आबू आदि के डाक बंगलों को पीपीपी मोड पर होटल के तौर पर तैयार करवाने की योजना बनाई गई थी। जिसमें अन्य जगहों के साथ जैसलमेर के सार्वजनिक निर्माण विभाग के डाक बंगलो की डीपीआर तैयार कर वाई गई। इसके अनुसार 300 गुणा 300 वर्गफीट के क्षेत्रफल वाले डाक बंगलों में भूमिगत पार्किंग सहित 6 मंजिलों में निर्माण और 163 कमरे बनवाए जाने थे। जिसमें एक पार्क बनाया जाना था, जहां फाउंटेन तथा बच्चों के मनोरंजन के साधन जुटाए जाते। जानकारी के अनुसार डीपीआर के अनुसार यहां निर्माण कार्य पर 80 करोड रूपए खर्च किए जाते। विभाग ने कार्रवाई करते हुए जैसलमेर तथा कुछ बाहरी होटल संचालकों से सम्पर्क किया। कुछ लोग विभागीय अधिकारियों से मिले भी, लेकिन 80 करोड रूपए की भारी-भरकम राषि का निवेष करने की हिम्मत कोई नहीं जुटा पाया। इस तरह से यह योजना खटाई में पड गई।


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