मेडिकल साइंस ने जन्म से पहले ही हटाया कैंसर का जीन

जागरूक टाइम्स 108 Jul 29, 2018

जुड़वा जन्मे बच्चों में नहीं पाया गया बदला हुआ जीन

मुंबई : बेंगलुरु की स्वयंप्रभा को आठ साल पहले पता चला कि उनके शरीर में ऐसा जीन है जिसके कारण कैंसर हो सकता है। उसके बाद से उनकी चिंता यह रही कि कहीं यह जीन उनके जरिये उनके बच्चों में न पहुंच जाए। उनकी यह चिंता 20 जुलाई को खत्म हुई जब मुंबई के अस्पताल में उन्होंने जुड़वां बच्चों को जन्म दिया और उनमें यह बदला हुआ जीन नहीं पाया गया। दरअसल जीन संरचना में मामूली बदलाव (म्यूटेशन) के कारण ब्रेस्ट या ओवेरियन कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ सकता है। प्रभा के शरीर में ऐसा ही जीन था जिसके कारण ब्रेस्ट कैंसर हो सकता है। प्रभा बताती हैं कि उनकी मां को भी कैंसर था और उनकी दो मौसियों की मौत इसी कारण हो गई थी। प्रभा को कैंसर तो नहीं हुआ लेकिन अब उनके साथ ही उनके परिवार में मौजूद यह म्यूटेशन खत्म हो जाएगा।
प्रभा के लिए उम्मीद की किरण बनकर आईं आईवीएफ (इन वीट्रो फर्टिलाइजेशन) स्पेशलिस्ट फिरूजा पारिख। 

पेड्डर रोड स्थित जसलोक अस्पताल में फर्टिलट्री- जसलोक इंटरनैशनल फर्टिलिटी सेंटर में उन्होंने अपनी जेनेटिसिस्ट्स की टीम के साथ मिलकर प्रभा के लिए ऐसे भ्रूण तैयार किए, जिनमें यह म्यूटेशन नहीं था। उन्होंने आईवीएफ तकनीक से प्रभा के लिए छह भ्रूण तैयार किए। प्री-इंप्लान्टेशन जेनेटिक टेस्टिंग में पाया गया कि इनमें से दो सही नहीं थे, दो में म्यूटेशन वाला जीन मौजूद था, जबकि दो इसके बिना हासिल कर लिए गए। इन दोनों को प्रभा के शरीर में ट्रांसफर कर दिया गया। भारत में यह पहला ऐसा मामला था जहां कैंसर के जीन को बाहर किया जा सका। पारिख ने बताया कि दुनियाभर में ऐसे लगभग 150 मामले होते हैं। जहां बीआरसीए-1 और 2 को बाहर करने के लिए यह तकनीक अपनाई गई।

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