Jaipur: स्वामी श्रद्धानंद का 100 वा बलिदान दिवस का कार्यक्रम 23 दिसंबर को जयपुर में

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जयपुर (Jaipur) आर्य समाज के 150 वे वर्ष एवंअमर हुतात्मा, शुद्धि आन्दोलन के प्रणेता तथा पुनरोद्धारक, ऋषि दयानंद जी महाराज के परम शिष्य, महान राष्ट्रभक्त, दलितों के उद्धारक, गुरूकुल शिक्षा पद्धति के जनक, स्वामी श्रद्धानंद जी महाराज के 100 वे बलिदान दिवस का कार्यक्रम मंगलवार, 23 दिसम्बर 2025 सायं 3 बजे से 6 बजे तक जानकी मैरिज गार्डन गांधी पथ, वैशाली नगर, जयपुर में मनाया जा रहा है।आर्य प्रतिनिधि सभा राजस्थान के देवेंद्र शास्त्री ने बताया कि यह कार्यक्रम आर्य प्रतिनिधि सभा राजस्थान, आर्य वीर दल जयपुर, आर्य समाज जयपुर एवं पतंजलि योग समिति, जयपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हो रहा है। इसमे आर्य जगत के विख्यात संन्यासी तथा पूर्व सांसद स्वामी सुमेधानंद सरस्वती जी महाराज का सनिध्य आयोजित होगा, सनातन धर्म रक्षक क्रान्तिकारी युवा यूथ ट्यूबलर गौतर खट्टर मुख्य वक्ता होगें।आर्य प्रतिनिधि सभा राजस्थान ने समस्त आर्य समाजों से अपील की है की इस समारोह में दिव्य आत्मा को अपनी विनम्र श्रद्धांजलि प्रकट करने, त्यागमूर्ति के जीवन से प्रेरणा लेने, क्रांतिकारी उद्बोधन एवं राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत विचार सुनने के लि अवश्य पधारे। कार्यक्रम को लेकर दीपक शास्त्री , सुभाष आर्य, हनुमान शर्मा, बजरंग सिंह शेखावत, बंशीधर आर्य, प्रमोद आर्य सहित कई जने तैयारियों में जुटे हैं। *कौन है ? स्वामी श्रद्धानंद-* अमर हुतात्मा, शुद्धि आंदोलन के प्रणेता , स्वयं के जीवन काल में दो लाख से अधिक मजहबी संप्रदाय के भंवर में फंसे अपने ही भाइयों की सनातनी परंपरा में वापसी करवाने वाले अप्रतिम योद्धा। जलियांवाला बाग नरसंहार के पश्चात् जनता में व्याप्त भय एवं निराशा के वातावरण में 1919 में अमृतसर पंजाब में आयोजित कांग्रेस के अधिवेशन में स्वागत अध्यक्ष का पद ग्रहण कर जनता में साहस पैदा करने की हिम्मत करने वाले निर्भीक निडर सन्यासी। गुरुकुल परंपरा, आर्ष परंपरा के पुन उद्धारक, गुरूकुल कांगड़ी सहित सैकड़ो गुरुकुलों के संस्थापक, गुरुकुल परंपरा के उद्धार के लिए अपनी स्वयं की जालंधर स्थित कोठी में स्थापित प्रेस दान करने वाले भामाशाह। राष्ट्र हित में सर्वात्मना समर्पित सन्यासी। जिन्होंने रोलौट एक्ट के विरोध में भारतीय जनता का नेतृत्व कर विरोध प्रदर्शन में दिल्ली के चांदनी चौक में अंग्रेजों की दनदनाती बंदूको के सामने अकेले आगे आकर- ” *सन्यासी का सीना खुला है हिम्मत है तो चलाओ गोली* ” की उद्घोषणा कर अंग्रेजों की संगीनों को झुकाने वाले। महान और साहसी संन्यासी, महाराणा प्रताप एवं छत्रपति शिवाजी की परंपरा को अक्षुण्ण रखने वाले। दिल्ली की जामा मस्जिद के मिंबर से वेद मंत्रों का उच्चारण करके राष्ट्रीय एकता एवं शांति का संदेश देकर जनता को स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़ने का आह्वान करने वाले। एक मात्र सनातन परंपरा के सन्यासी, महामना मदन मोहन मालवीय जी के साथ मिलकर 1923 में भारतीय हिंदू शुद्धि सभा का गठन करने वाले दूरद्रष्टा मनीषी, दलितों के उद्धारक छुआछूत उच्च नीच, जातिवाद के भेदभाव को मिटाकर गरीबों के लिए शिक्षा एवं संस्कारों के लिए कार्य करने वाले। जिनको बाबा साहब भीमराव अंबेडकर ने दलितों का सबसे बड़ा हितैषी बताया था और उन्होंने दलितोद्धार सभा का गठन किया था। वे थे महर्षि दयानंद सरस्वती के अनन्य शिष्य स्वामी श्रद्धानंद जिनका 23 दिसंबर 1926 को सनातन संस्कृति एवं राष्ट्र रक्षा के लिए बलिदान हुआ।

रिपोर्ट- घेवरचन्द आर्य

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