Bhilwara: एक व्यक्ति यदि कोई कार्य पूरे मन से करने की ठान लेता है तो परिवर्तन अवश्य लाता है: तिलोक चंद छाबड़ा

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भीलवाड़ा (Bhilwara) विवेकानंद केंद्र द्वारा कुमुद विहार प्रथम स्थित वैदिक गार्डन में सेवा कार्यों में लगे उद्योगपति, चिकित्सक, प्रोफेशनल व्यक्तियों के लिए, शिक्षा क्षेत्र में कार्य कर रहे व्यक्तियों के लिए व योग क्षेत्र में कार्य कर रहे व्यक्तियों के लिए तीन श्रेणियों हेतु विमर्श के कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। सेवा क्षेत्र के विमर्श में मुख्य वक्ता के रूप में पद्मश्री निवेदिता रघुनाथ भिड़े ने मार्गदर्शन प्रदान किया। भिड़े ने कहा की सेवा चार प्रकार की होती है एवं उन्हें दो वर्गों मूर्त सेवा एवं अमूर्त सेवा मंु रखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि मूर्त सेवा भौतिक रूप से दिखाई देती है और अमूर्त सेवा दिखाई नहीं देती है परंतु अमूर्त सेवा अधिक श्रेष्ठ है क्योंकि यह भाव प्रधान होती है। अमूर्त सेवा के द्वारा ऐसा समाज बनाया जा सकता है जिसमें मूर्त सेवा या भौतिक सेवा की आवश्यकता ही ना पड़े। इसलिए हम सभी को अमूर्त सेवा हेतु प्रयास करना चाहिए। सेवा विमर्श में विशिष्ट अतिथि के रूप में तिलोक चंद छाबड़ा एवं दिनेश नौलखा सम्मिलित हुए। तिलोक चंद छाबड़ा ने बताया कि एक व्यक्ति यदि कोई कार्य पूरे मन से करने की ठान लेता है तो परिवर्तन अवश्य लाता है, फिर हम सब मिलकर बहुत बड़ा व सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं। केंद्र परिचय डॉ. जी.वी. दिवाकर ने प्रस्तुत किया व बलराज आचार्य ने आभार व्यक्त किया। संचालन सत्यम शर्मा ने किया। शिक्षाविदों के साथ विमर्श कार्यक्रम में वक्ता माननीय भानुदास धाक्रस, जनजातीय प्रकल्प में कार्य कर रहे जगदीश जोशी, पूर्वांचल क्षेत्र में शिक्षा का कार्य करने वाले मीरा दीदी एवं सुजाता दीदी रहे। वक्ताओं ने वर्तमान परिपेक्ष्य में युवा पीढ़ी एवं विद्यार्थियों को मूल्य परक शिक्षा देने के साथ- साथ, माता-पिता एवं परिवार के साथ विद्यार्थियों जुड़ाव, गुरुशिष्य के संबंधों की पवित्रता, असम के चाय बागान वाले क्षेत्रों में उपेक्षित जनजातीय क्षेत्रों में आनंदालय प्रकल्प की सफलता आदि विषयों पर स्थानीय भीलवाड़ा के शिक्षाविदों को जानकारी प्रदान की। शिक्षाविदों के विमर्श कार्यक्रम में भीलवाड़ा के वरिष्ठ प्रधानाचार्य एवं शिक्षा अधिकारी विजयपाल वर्मा, नरेंद्र सिंह राठौड़, विवेक सक्सेना, सुंदर सिंह चुंडावत एवं देवीलाल प्रजापत आदि उपस्थित थे। योग शिक्षकों के विमर्श कार्यक्रम में मुख्य वक्ता माननीय एम हनुमंत राव ने योग के नियमित अभ्यास द्वारा मन को निर्मल करते हुए मन के मल(वृत्ति) को शांत करने की प्रक्रिया बताई। नींद भी एक वृत्ति है ऐसा समझाया साथ ही बताया कि तनाव ही सभी व्याधियों की जड़ है। इस विषय पर उन्होंने कई व्यावहारिक उदाहरण देते हुए उपस्थित योग शिक्षकों का मार्गदर्शन किया। कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारी राज योग संस्थान से ललिता बहिन, अनिता बहिन, विशाखा बहिन, गायत्री शक्तिपीठ से श्रंग सुखवाल, बिहार योग विद्यालय से उमाशंकर, हार्टफुलनेस से अभिषेक नाराणीवाल आदि उपस्थित थे। मंच संचालन शिवनारायण जांगिड़ ने किया। गीत पूजा बैरवा ने, विवेक वाणी धीरज शर्मा ने व केंद्र परिचय रवि भाम्बी ने लिया। कार्यक्रम में विवेकानंद केंद्र के अखिल भारतीय कोषाध्यक्ष प्रवीण दाभोलकर, अखिल भारतीय संयुक्त सचिव रेखा दवे, किशोर टोकेकर, प्रांत संचालक शकुंतला डाड, प्रांत प्रमुख भगवान सिंह चौहान, प्रांत संगठक शीतल जोशी, पूर्व सांसद सुभाष बहेड़िया, वरिष्ठ उद्योगपति शांतिलाल पानगड़िया, रवि जाजू सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

रिपोर्ट – पंकज पोरवाल

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