राजसमन्द (Rajsamand) अखिल भारतीय नववर्ष समारोह समिति व आलोक संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में संस्कार ध्यान सभा मे प्राणायाम उत्सव हुआ । आलोक स्कूल के महाराणा प्रताप सभागार में संस्कार ध्यान सभा सेमिनार के तहत मुख्य वक्ता व निदेशक डॉ प्रदीप कुमावत ने आलोक स्कूल हिरणमगरी सभागार से सभी शाखाओ के विद्यार्थियों को लाइव फ्लेटफॉर्म पर सीधे प्रसारण से शीतकारी प्राणायाम, नाड़ी शोधन प्राणायाम, मूलबन्ध, उड्डियान बंध व जालन्धर बंध प्राणायम,भ्रामरी प्राणायाम सहित अन्य विभिन्न आसनों का अभ्यास कराते हुए उसकी महत्ता बताई । अभ्यास सत्र में प्रशासक मनोज कुमावत प्राचार्य ललित गोस्वामी, सहायक प्रशासक ध्रुव कुमावत, सभी शिक्षक व विद्यार्थी उपस्थित रहे । मुख्य वक्ता डॉ प्रदीप कुमावत ने प्रार्थना सभा मे सभी विद्यार्थियों व शिक्षकों को प्राणायाम का अभ्यास कराते हुए कहा कि इनके प्रभाव से शरीर की कई प्रकार की बीमारियों से निजात मिल जाती है । प्राणायाम के माध्यम से शरीर के मेरुदंड, श्वास- प्रश्वास, पांच वायु के संतुलन से साधना करके शरीर मे नवीन ऊर्जा को रूपांतरित किया जा सकता है । प्राणयाम अभ्यास सत्र में सर्वप्रथम शीतकारी प्राणायाम का अभ्यास कराते हुए कहा कि यह प्राणायाम एक प्रकार की श्वास तकनीक है जिसमें दांतों से ‘सी-सी’ की ध्वनि निकालते हुए सांस अंदर ली जाती है और फिर नाक से छोड़ी जाती है। यह शरीर को ठंडक प्रदान करता है, मन को शांत करता है और पित्त तथा उच्च रक्तचाप जैसी समस्याओं में फायदेमंद होता है। नाड़ी शोधन प्राणायाम, जिसे अनुलोम विलोम प्राणायाम भी कहते हैं, का भी अभ्यास कराया। इस प्राणयाम का उद्देश्य शरीर में सूक्ष्म ऊर्जा व नाड़ियों को शुद्ध करना और मन को शांत करना है। यह तनाव को कम करने, पाचन में सुधार करने और समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में मदद करता है। गले व ठोढ़ी के मध्य रोल मय नेपकिन रखकर मूलबन्ध, उड्डियान बंध व जालन्धर बंध प्राणायाम का अभ्यास कराते हुए कहा कि इसके प्रभाव से हमारे शरीर मे ऑक्सीजन स्तर बढ़ता है व श्वांस संबंधित समस्या दूर हो जाती है । इनके साथ भ्रामरी प्राणायाम व ओमकार मंत्र का भी अभ्यास कराया गया ।
रिपोर्ट – नरेंद्र सिंह खंगारोत
