
बाड़मेर (Barmer) सनातन संस्कृति अनंत है इसका कोई छोर नही है,इसका प्रमाण आपके सामने है कि सैकड़ो वर्षो के बाद कई युद्धों को झेल चुका सोमनाथ नीले आसमान के नीचें अक्षुण खड़ा है। ये दिव्य ज्योतिलिंग जो 1000 वर्ष बाद अपने मूल स्थान पर विराजमान होगा । ये बात स्वामी परमानन्द महाराज ने कही। उन्होंने बताया कि जो विज्ञान अब अपनी बाते प्रमाणिक कर रहा है उसे हमारे पूर्वजों ने पहले ही ग्रंथों के माध्यम से कह दी थी। राजस्थान में पूजा-अर्चना यात्रा के दौरान बुधवार को यात्रा बाड़मेर पहुंची। फोर्ट बाड़मेर में रावत त्रिभुवनसिंह परिवार कि ओर से पूर्जा-अर्चना के बाद शोभायात्रा के रूप में फोर्ट बाड़मेर से रवाना होकर चारभुजा मन्दिर पहुंची। मन्दिर प्रागण में स्वामीजी द्वारा महत्वपूर्ण पूजा के बाद दिव्य ज्योतिलिंग को स्थापित किया गया और उसके बाद भक्तों के दर्शन का सिलसिला प्रारम्भ हुआ। आजाद युवा ग्रुप के सरंक्षक रावत त्रिभुवनसिंह ने कहा कि बाड़मेर के लिए सौभाग्य की बात है कि बाड़मेर में इसे भक्तों के दर्शनों के लिए रखा गया। दिव्य ज्योतिलिंग का अपना इतिहास भी अनुठा है। 1000 वर्षों तक अग्निहोत्री परिवार की ओर से गुप्त रूप से पूजा करने के बाद अब ये पूनः अपने मूल स्थान पर विराजमान होंगे। उन्होंने कहा कि विज्ञान भी इन अंशो का परिक्षण करने के बाद हैरान है कि इतना गुरुत्वाकर्षण इसमें कैसे है। उन्होंने कहा कि युवाओं को हमारें धर्म और संस्कारों को रोजाना कम से कम दस मिनट तक पढना चाहिए। ये 10 मिनट आपकों कभी पथ से भटकने नही देंगे ये हमारे धर्म की शक्ति है। आजाद युवा ग्रुप एवं आर्ट ऑफ लिंविग के सहयोग से आयोजित इस आयोजन में सैकड़ो भक्तों ने दर्शन किए। आर्ट ऑफ लिविंग के प्रशिक्षक तरूण रामावत ने बताया कि पूर्व 1025 ईस्वी में मौहम्मद गजनवी के द्वारा सोमनाथ ज्योतिर्लिंग पर आक्रमण कर उसे तोड़ दिया गया था। खंडित ज्योतिर्लिंग को बचाते हुए अग्निहोत्री परिवार के पुजारी इसे दक्षिण भारत ले गए । फिर उन्होंने उसको पुनः जोड़कर शिवलिंग का स्वरूप दिया और गुप्त रूप से करीब एक हजार वर्ष तक इसकी पूजा अर्चना की जाती रही है। दक्षिण भारत के शंकराचार्य के मार्गदर्शन से पंडित सीतारमन शास्त्री ने इसे आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री रविशंकर महाराज को इन अंशों को सौप दिया। अब ये शिवलिंग भारत भ्रमण के बाद पूनः सोमनाथ में स्थापित किया जाएगा। ग्रुप के प्रवीण बोथरा ने बताया कि मान्यता के अनुसार 12 ज्योतिर्लिंगों में यह प्रथम ज्योतिलिंग हैं। यह ज्योतिर्लिंग 2 से 3 फीट ऊपर हवा में रहता था। भू स्पर्श नहीं करता था। जब वैज्ञानिकों के द्वारा इन दिव्य अंशों की जांच की गई तब वैज्ञानिकों ने बताया कि इसके केंद्र में मजबूत चुंबकीय क्षेत्र हैं। ऐसा दुर्लभ पत्थर पूरी पृथ्वी पर नहीं हैं। सैकड़ो भक्तों ने किए दर्शन- आजाद युवा ग्रुप के सन्दीप रामावत ने बताया कि चारभुजा मन्दिर में 12.15 बजे दर्शन का सिलसिला प्रारम्भ हुआ। शिव भक्तों ने कतारबन्द होकर दिव्य ज्योतिलिंग के दर्शन किए। उन्होंने बताया कि एक घन्टे के अल्प समय में भी करीब 1500 से अधिक भक्तांं ने दर्शनों का लाभ लिया। ग्रुप के प्रवीण बोथरा ने बताया कि किन्नर समुदाय की सोनिया दीदी एवं उनकी टीम भी दर्शन करने पहुंची। वहां उन्होंने भजन के माध्यम से भोलेनाथ श्रद्धा सुमन अर्पित किए। उन्होंने स्वामी परमानन्द महाराज से आर्शीवाद लिया एवं सहयोग की भावना जताई। एक घन्टे के समय के दौरान आजाद चौक का माहौल पूरा शिवमय हो गया।
रिपोर्ट – ठाकराराम मेघवाल
