
बाड़मेर (Barmer) मध्यप्रदेश कांग्रेस प्रभारी एवं बायतु विधायक हरीश चौधरी ने रविवार को बाड़मेर जिला मुख्यालय पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए भारतीय जनता पार्टी पर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कमजोर करने के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक भारतीय नागरिक को संविधान प्रदत्त मताधिकार प्राप्त है और इसे किसी भी सूरत में छीना नहीं जा सकता।चौधरी ने पुख्ता तथ्यों का हवाला देते हुए बताया कि भाजपा के बीएलए-2 से संबंधित कई फॉर्म संदिग्ध पाए गए हैं। स्वयं बीएलए-2 द्वारा यह कहा जा रहा है कि उनके नाम से प्रस्तुत किए गए फॉर्म फर्जी हैं तथा उन पर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियमों के अनुसार एक बीएलए-2 एक दिन में अधिकतम 10 नामों के लिए ही फॉर्म-7 प्रस्तुत कर सकता है, जबकि यहां सैकड़ों की संख्या में फॉर्म दिए गए हैं, जो स्पष्ट रूप से अवैधानिक है। ऐसे मामलों में प्रशासन को स्वतः संज्ञान लेकर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।उन्होंने आरोप लगाया कि जिले भर में इस प्रकार से बल्क वोट हटाने की कोशिश की जा रही है। उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि बिशाला गांव में जैन समाज के 89 मतदाताओं के नाम हटाने की सूची दी गई है, वहीं जानपालिया गांव में 292 तथा हरपालिया गांव में 504 मतदाताओं के नाम काटने व इसी तरह अरटी 190, जलीला 264, बिसासर 580, झडपा 160 व भंवार 116 मतदाताओं के नाम हटाने का भी प्रयास किया जा रहा है। चौधरी ने यह भी कहा कि अल्पसंख्यक, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के मतदाताओं को विशेष रूप से निशाना बनाया जा रहा है।विधायक हरीश चौधरी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी देश के हर नागरिक के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और इस मुद्दे पर सभी स्तरों पर संघर्ष करेगी। जिला प्रशासन के समक्ष सभी तथ्यों को प्रस्तुत कर न्यायसंगत कार्रवाई की मांग की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन राजनीतिक दबाव में कार्य करता है तो उसकी निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े होंगे। आखिर में में उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी सड़क से लेकर सदन तक लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करेगी और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग करेगी।मतदाता सूची में अनियमितताओं के गंभीर मामले उजागरहरीश चौधरी ने बताया कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में कई गंभीर और आपत्तिजनक मामले सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त कर्मचारियों के मताधिकार को भी हटाने की कोशिश की गई है, जो पूरी तरह अनुचित और असंवैधानिक है। इसके अलावा, निरक्षर महिलाओं के कथित तौर पर झूठे हस्ताक्षर कर उनके नाम मतदाता सूची से काटे जाने के मामले भी प्रकाश में आए हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर पत्नी के नाम से भरे गए फॉर्म के आधार पर पति का नाम मतदाता सूची से हटाने का प्रयास किया गया, जो न केवल नियमों का उल्लंघन है बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के साथ सीधा खिलवाड़ भी है। चौधरी ने कहा कि इस तरह की घटनाएं मतदाता सूची की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई आवश्यक है।
रिपोर्ट – ठाकराराम मेघवाल
