
राजसमंद (Rajsamand) केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत शनिवार को कुंभलगढ़ पहुंचे। यहां उन्होंने कुंभलगढ़ दुर्ग तथा चित्तौड़गढ़ दुर्ग के संरक्षण, संवर्धन और आवश्यक विकास कार्यों को लेकर केन्द्रीय पर्यटन मंत्रालय, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण एएसआई)पर्यटन विभाग तथा जिला प्रशासन राजसमंद एवं चित्तौड़गढ़ सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक ली।बैठक में कुंभलगढ़ विधायक सुरेन्द्र सिंह राठौड़, पर्यटन विभाग आयुक्त आईएएस रुक्मणी रियार, राजसमंद कलक्टर आईएएस अरुण कुमार हसीजा, चित्तौड़गढ़ कलक्टर आईएएस आलोक रंजन, प्रो. आलोक त्रिपाठी अपर महानिदेशक, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, टी. श्री लक्ष्मी क्षेत्रीय निदेशक, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, पश्चिमी क्षेत्र, मुंबई राजेश्वरी निदेशक, वैज्ञानिक परिरक्षण, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, नई दिल्ली, अरविंद कुमार संयुक्त सचिव, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार, इज़हार आलम हाशमी अधीक्षण पुरातत्वविद, जोधपुर मंडल दिनेश चंद शर्मा उप अधीक्षण पुरातात्विक अभियंता सिद्धार्थ वर्मा सहायक अधीक्षण पुरातात्विक अभियंता तथा दीपक कुमार मीना संरक्षण सहायक, उदयपुर सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।एएसआई ने दोनों दुर्गों पर गत वर्षों में किए गए महत्वपूर्ण संरक्षण एवं विकास कार्यों तथा वर्तमान चुनौतियों से मंत्री शेखावत को प्रेजेंटेशन के माध्यम से अवगत कराया।केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री शेखावत ने कुंभलगढ़ दुर्ग पर पर्यटकों के लिए आधारभूत सुविधाओं को सुदृढ़ करने पर विशेष बल दिया। विशेष रूप से उनका जोर इस बात पर रहा कि अगर दुर्ग पर पार्किंग से लेकर शिकार तक पर्यटकों की पहुँच आसान नहीं होगी तो फूटफ़ॉल नहीं बढ़ सकेगा।उन्होंने दुर्ग परिसर में ऊपर तक समुचित पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने, पार्किंग स्थल से दुर्ग के ऊपरी भाग तक पर्यटकों की सुविधा हेतु इलेक्ट्रिक कार्ट संचालित करने तथा महाराणा प्रताप की जन्मस्थली पर आवश्यक एवं स्पष्ट साइनेज, तस्वीरें लगाने के निर्देश दिए। साथ ही प्रत्येक स्मारक से संबंधित ऐतिहासिक एवं तथ्यात्मक जानकारी को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराकर क्यूआर कोड के माध्यम से प्रदर्शित करने को कहा, ताकि पर्यटक डिजिटल माध्यम से प्रामाणिक जानकारी प्राप्त कर सकें।जिला कलक्टर अरुण कुमार हसीजा को पार्किंग संबंधी समस्या का स्थायी समाधान निकालने के निर्देश देते हुए मंत्री ने कहा कि पर्यटक सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। दुर्ग क्षेत्र में अतिक्रमण और अवैध निर्माण को लेकर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मंत्री ने पर्यटन संयुक्त निदेशक सुमिता सरोच से होटल एवं रिसॉर्ट्स तथा दुर्ग के वर्तमान फुटफॉल के संबंध में विस्तृत जानकारी ली। दुर्ग पर पर्यटकों की अपेक्षाकृत कम संख्या पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि जब तक ईज ऑफ ट्रैवल सुनिश्चित नहीं होगा, तब तक पर्यटक दुर्ग तक नहीं पहुंचेंगे।उन्होंने स्पष्ट किया कि कुंभलगढ़ आने वाला प्रत्येक पर्यटक दुर्ग अवश्य पहुंचे, यह प्रशासन और पर्यटन विभाग की सामूहिक जिम्मेदारी है। होटल एवं रिसॉर्ट्स से पर्यटकों का डेटा संकलित कर विश्लेषण करने के निर्देश भी दिए गए, ताकि पर्यटन रणनीति को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।दुर्ग पर पर्यटन गतिविधियों को जीवंत बनाने के उद्देश्य से पपेट शो, फोक म्यूजिक कार्यक्रम एवं हेरिटेज वॉक प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए। साथ ही सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स का विशेष टूर आयोजित करने तथा फोटोग्राफी प्रतियोगिता कराने को कहा गया, जिससे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दुर्ग की दृश्यता बढ़ाई जा सके। मंत्री ने दुर्ग परिसर में इमर्सिव जोन विकसित करने के भी निर्देश दिए, जिससे पर्यटकों को ऐतिहासिक अनुभव आधुनिक तकनीक के माध्यम से आकर्षक रूप में मिल सके।चित्तौड़गढ़ दुर्ग को लेकर भी शेखावत ने व्यापक समीक्षा की। उन्होंने कहा कि यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दुर्ग है और यहां आने वाले पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिलना चाहिए। दुर्ग पर ट्रैफिक जाम की समस्या का शीघ्र निराकरण करने तथा एएसआई को लंबित सभी विकास कार्यों को प्राथमिकता से पूर्ण करने के निर्देश दिए। सूरजपोल के पाथ-वे का कार्य इसी वर्ष हर हाल में पूर्ण करने, मृगवन की क्षतिग्रस्त दीवार की मरम्मत कराने तथा पद्मिनी पैलेस में इंटरप्रिटेशन सेंटर के कार्य को गति देने पर भी विस्तृत चर्चा की गई।मंत्री ने कहा कि ये धरोहरें हमारी अस्मिता, गौरव और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक हैं। इनका संरक्षण सर्वोपरि है और विकास कार्यों में गुणवत्ता, समयबद्धता तथा पर्यटक सुविधा का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।
रिपोर्ट – नरेंद्र सिंह खंगारोत
