
राजसमंद (Rajsamand) जिले केदिवेर जन्मभूमि में जैन संत मुनि संजय कुमार जी की दीक्षा के 60 वर्ष पूर्ण होने के पावन अवसर पर तेरापंथ सभा भवन में षष्ठी पूर्ति अमृत महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में साधु-संतों, श्रावक-श्राविकाओं एवं समाजजनों की गरिमामयी उपस्थिति रही।महोत्सव को संबोधित करते हुए मुनि संजय कुमार जी ने कहा कि “मैं स्वयं को अत्यंत सौभाग्यशाली मानता हूँ कि संयम एवं दीक्षा के पथ पर चलकर जीवन को सार्थक बना सका। संसार के कोलाहल से दूर रहकर आत्मरमण, जिनवाणी और साधना के माध्यम से परम शांति की अनुभूति होती है। यह अवसर पूर्व जन्मों की तपस्या का ही फल है।”उन्होंने कहा कि संत जीवन की आधारशिला माता द्वारा दिए गए संस्कार होते हैं, जो संतान को महापुरुष बनने की प्रेरणा देते हैं।इस अवसर पर मुनि प्रसन्न कुमार जी ने कहा कि “अनुशासन ही जीवन है। माता अपने विश्वास और संस्कारों से संतान को मोती की तरह गढ़ती है। साधना, त्याग और चारित्र की त्रिवेणी से ही सिद्धता का मार्ग प्रशस्त होता है।”मुनि प्रकाश कुमार जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि मुनि संजय कुमार जी ने दीक्षा के साथ-साथ जीवनभर साधना और संयम को अपनाया तथा गुरु परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आचार्य तुलसी जी के योगदान को स्मरण किया।कार्यक्रम में मातृ-वंदना का आयोजन किया गया, जिसमें मातृशक्ति के महत्व और संस्कारों की भूमिका पर प्रकाश डाला गया। साथ ही जीवन के लक्ष्य को साध्य बनाकर आत्मकल्याण की दिशा में निरंतर आगे बढ़ने का संदेश दिया गया।महोत्सव में मुनि विनय, मुनि प्रीत सहित अन्य संतों ने भी अपने विचार व्यक्त किए। अध्यक्ष सुरेशजी श्रीश्रीमाल, बाबूलाल लोढा, नरेंद्र श्रीश्रीमाल, डाल चंद सोलंकी, मधुदेवी सहित विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने सहभागिता निभाई। कार्यक्रम में देश के अनेक क्षेत्रों सैकड़ो न्याति संबंधी जो बैंगलोर, मद्रास, सूरत, नेपानगर, मुंबई, मारवाड़ एवम मेवाड़ सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे।कार्यक्रम का समापन आध्यात्मिक वातावरण एवं मंगल भावना के साथ हुआ।
रिपोर्ट – नरेंद्र सिंह खंगारोत
