Odisha: वैदिक विद्वान् डॉ.शिव शंकर शास्त्री का रेल दुर्घटना में असामयिक निधन आर्य जगत की अपूर्णीय क्षति

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बरगढ (Bargadh) वैदिक विद्वान डॉ शिव शंकर शास्त्री का रेल दुर्घटना से असामायिक निधन हो गया है। सोमवार 1 दिसंबर को उनके पैतृक गांव सारंगपुर बरगढ ओडिशा में गुरूकुल नवप्रभात आश्रम के आचार्यों और ब्रह्मचारीयों द्वारा गमगीन महोल मे वैदिक परंपरानुसार अनुसार आपका अन्तिम संस्कार संपन्न किया गया।गुरूकुल नवप्रभात आश्रम के न्यासी दयानन्द शर्मा ने बताया की वे 30 नवंबर को संबलपुर के पास एक वैवाहिक कार्यक्रम में गए थे। वहा से ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस से झारसुगुड़ा ओडिशा से रायपुर के लिए रवाना होना था। लेकिन रेल में चढ़ते समय पांव फिसल जाने के कारण ट्रेन की चपेट में आ गए और बहुत अधिक रक्त बह जाने के कारण उनका निधन हो गया। वे अपने पीछे पत्नी एक पुत्री और एक पुत्र को छोड़कर गए है ।बरगड़ जिले के पद्मपुर विकासखंड के सारंगपुर गांव के एक मध्यवर्गीय परिवार में जन्मे आचार्य जी ने आर्य समाज की प्रेरणा से गुरुकुल प्रभात आश्रम ,भोला-झाल मेरठ उत्तर प्रदेश के ब्रह्मनिष्ठ आचार्य स्वामी विवेकानंद सरस्वती महाराज की छत्रछाया में वेद वेदांग आदि शास्त्रों का गहन अध्ययन किया। पश्चात आप केंद्रीय विद्यालयों में संस्कृत के अध्यापक बने। सेवानिवृत्ति के पश्चात् आप आर्य समाज , गुरुकुल नवप्रभात वैदिक विद्यापीठ , गुरुकुल प्रभात आश्रम मेरठ आदि संस्थाओं में जाकर अध्यापन, प्रवचन वेद पाठ आदि के प्रशिक्षण में संलग्न थे । आचार्य श्री को यजुर्वेद तथा गीता आदि अनेक शास्त्र कण्ठस्थ थे। बाल्यकाल से ही परमात्मा ने आपको गायन , वादन कवित्व आदि कलाओं की अप्रतिम प्रतिभा प्रदान की थी । आप संस्कृत के अनेक श्रेष्ठ गीतों के रचयिता अनेक वैदिक लेखों तथा काव्य के प्रणेता थे। आर्य समाज दिल्ली छत्तीसगढ़ , ओड़िशा आदि प्रान्तों में आप वैदिक संस्कारों तथा वैदिक संस्कृति सभ्यता के प्रचार प्रसार में संलग्न रहे। डॉ शिव शंकर शास्त्री वैदिक एवं संस्कृत वांग्मय के प्रकांड विद्वान् महर्षि दयानंद सरस्वती के सिद्धांतों के प्रचारक, गुरुकुलों के संरक्षक , संवर्धक तथा वैदिक संस्कृति ,सभ्यता के प्रचार-प्रसार के लिए अहर्निश समर्पित, संस्कृत के श्रेष्ठ कवि एवं एक आदर्श व्यक्ति थे। गायन वादन एवं विविध कलाओं के धनी सरल तथा सहज व्यक्तित्व थे।ओडिशा के प्रतिष्ठित वैदिक विद्वान् के असामयिक निधन पर गुरुकुल प्रभात आश्रम मेरठ , नव प्रभात वैदिक विद्यापीठ बरगल ओडिशा एवं स्वामी ऋतमानन्द गुरूकुल विज्ञान आश्रम न्यास पाली के आचार्य और कुलाधिपति स्वामी विवेकानंद सरस्वती महाराज ने गुरुकुल परिवार एवं एवं संपूर्ण आर्य जगत् के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया।

रिपोर्ट – घेवरचन्द आर्य

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