
Hyderabad: तेलंगाना में हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी (Hyderabad Central University) के पास 400 एकड़ ज़मीन की नीलामी को लेकर विवाद तेज़ हो गया है। राज्य सरकार इस भूमि पर आईटी पार्क बनाने की योजना बना रही है, लेकिन छात्र और पर्यावरण कार्यकर्ता इसका विरोध कर रहे हैं। यह मामला अब तेलंगाना हाईकोर्ट पहुंच चुका है, जहां बुधवार को सुनवाई होगी।
पुराना ज़मीन विवाद
यह विवाद दशकों पुराना है। हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दावा है कि 1975 में उसे 2,324 एकड़ ज़मीन आवंटित की गई थी, जिसमें ये 400 एकड़ भी शामिल हैं। हालांकि, 2022 में तेलंगाना हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि यूनिवर्सिटी के पास इस ज़मीन के हस्तांतरण का कोई आधिकारिक दस्तावेज़ नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस फैसले को बरकरार रखते हुए सरकार को इस भूमि का वैध मालिक माना।
हालांकि, पर्यावरणविदों का कहना है कि यह क्षेत्र जैव विविधता से भरपूर है और यहाँ 455 से अधिक प्रजातियों के वनस्पति और जीव मौजूद हैं, जिनमें मोर, भैंसों के तालाब और मशरूम रॉक्स शामिल हैं। वटा फाउंडेशन नामक एनजीओ ने मांग की है कि इस ज़मीन को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया जाए और इसे ‘डीम्ड फॉरेस्ट’ का दर्जा दिया जाए।
कानूनी लड़ाई और छात्रों का विरोध
मंगलवार को छात्रों ने सरकार द्वारा तेलंगाना इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन (TGIIC) को ज़मीन सौंपने के खिलाफ जनहित याचिका (PIL) दायर की। हाईकोर्ट अब इस याचिका और वटा फाउंडेशन द्वारा पहले दायर याचिका पर सुनवाई करेगा।
इस बीच, रिपोर्टों के अनुसार, सरकार ने ज़मीन को साफ़ करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वहाँ बुलडोज़र और अन्य भारी मशीनरी तैनात की गई हैं, पेड़ काटे जा रहे हैं और चट्टानों को हटाया जा रहा है। इसके विरोध में विश्वविद्यालय के छात्रों ने प्रदर्शन किया, जिसके दौरान पुलिस पर जबरन कार्रवाई करने के आरोप लगे हैं।
राजनीतिक विवाद भी गहराया
यह मामला अब राजनीतिक रूप ले चुका है। भारत राष्ट्र समिति (BRS) के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री के टी रामाराव ने कांग्रेस सरकार पर हैदराबाद के आखिरी हरे-भरे क्षेत्रों को नष्ट करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “HCU और इसके आसपास के क्षेत्र इस हिस्से के अंतिम ‘ग्रीन लंग्स’ में से हैं। बिना पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) के इसे नष्ट करना हैदराबाद के भविष्य के खिलाफ अपराध है।” उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधते हुए कहा, “यह 400 एकड़ की हरी-भरी ज़मीन को नष्ट करके पर्यावरण की हत्या करने जैसा है। यदि आप अभी नहीं बोले, तो यह आपकी ज़िम्मेदारी होगी, राहुल गांधी।” वहीं, कांग्रेस सरकार ने इस फैसले का बचाव किया और कहा कि 2004 में यह ज़मीन एक निजी कंपनी को आवंटित की गई थी, जब राज्य में चंद्रबाबू नायडू की सरकार थी। कानूनी लड़ाई के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया। सरकार का कहना है कि सर्वेक्षण में यह स्पष्ट हुआ है कि इस भूमि का कोई भी हिस्सा यूनिवर्सिटी का नहीं है।
हालांकि, हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी ने इस दावे को खारिज किया है। विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार देवेश निगम ने कहा, “हम लंबे समय से राज्य सरकार से इस भूमि के हस्तांतरण की मांग कर रहे हैं। हम सभी हितधारकों की आपत्तियों को सरकार तक पहुंचाएँगे और पर्यावरण संरक्षण की अपील करेंगे।”
गिरफ्तारियों पर विवाद
इस विवाद के बीच पुलिस और छात्रों के बीच झड़पें भी हुई हैं। पुलिस ने दो छात्रों सहित कुल 53 लोगों को हिरासत में लिया। BRS ने पुलिस पर बल प्रयोग करने और छात्रों के साथ दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया, जबकि पुलिस ने लाठीचार्ज से इनकार किया और कहा कि गिरफ्तार किए गए लोग विश्वविद्यालय के मौजूदा छात्र नहीं हैं। अब यह मामला कानूनी और राजनीतिक मोर्चे पर जारी है। आने वाले दिनों में हाईकोर्ट का फैसला और सरकार की आगे की रणनीति इस विवाद का रुख तय करेगी।