
जैसलमेर (Jaisalmer) रामदेवरा/फतेहगढ़: केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह के मंत्रालय के अधीन आने वाले सहकारिता ढांचे की इस महत्वपूर्ण बैंक में पिछले कई महीनों से भुगतान का संकट गहराया हुआ है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, बैंक की शाखाओं में नगदी उपलब्ध नहीं होने के कारण ग्राहक अपने ही खातों से पैसे नहीं निकाल पा रहे हैं।भुगतान की समस्या: जैसलमेर, रामदेवरा और फतेहगढ़ जैसी शाखाओं में नरेगा मजदूरी, पीएम आवास योजना की किश्तें और बुजुर्गों की पेंशन एवं एफडीआर का पैसा फंसा हुआ है।बुजुर्गों द्वारा जाने वाले चेक रिटर्न हो रहे है ग्रामीणों का आक्रोश: कई ग्रामीण अपनी जमा पूंजी निकालने के लिए 50 से 100 किलोमीटर दूर से बैंक पहुँचते हैं, लेकिन उन्हें “कैश नहीं है” या “सर्वर डाउन है” कहकर खाली हाथ लौटा दिया जाता है। इस बदहाली से परेशान ग्राहकों ने पूर्व में बैंक शाखाओं पर ताला जड़कर विरोध प्रदर्शन भी किया है।लिमिट पर पाबंदी: बैंक प्रबंधन द्वारा भुगतान की सीमा (लिमिट) तय कर दी गई है। कई शाखाओं में एक उपभोक्ता को ₹2000 से अधिक का भुगतान नहीं किया जा रहा है।जिला कलेक्टर प्रतापसिंह की अध्यक्षता वाली जैसलमेर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक में नगदी की उपलब्धता नही होना भारी परेशानी का कारण है अमित शाह का विज़न बनाम हकीकत: जहाँ केंद्रीय मंत्री अमित शाह ‘सहकार से समृद्धि’ और पैक्स के कंप्यूटरीकरण के जरिए सहकारी बैंकों को आधुनिक बनाने का दावा कर रहे हैं, वहीं जैसलमेर की जमीनी हकीकत इसके विपरीत है। सहकारिता मंत्रालय के बड़े लक्ष्यों के बीच जैसलमेर के किसान अपनी छोटी-छोटी जरूरतों के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। मांग: स्थानीय ग्रामीणों और किसानों ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि बैंक में पर्याप्त नकदी उपलब्ध कराई जाए और कथित अनियमितताओं की जांच की जाए। शाखा प्रबंधक भानुप्रतापसिँह ने बताया कि शाखा में हेड ऑफिस वाले नगदी नही भेज रहे उसी कारण ग्राहकों का भुगतान नही हो पा रहा है।
रिपोर्ट – कपिल डांगरा
