बाड़मेर (Barmer) स्थानीय एम.बी.सी. राजकीय कन्या महाविद्यालय, बाड़मेर में राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के तत्वावधान में तृतीय एक दिवसीय शिविर आयोजित किया, जिसमे बौद्धिक सत्र में मुख्य अतिथि एवं महाविद्यालय विकास समिति के सदस्य समाजसेवी श्री गंगाविशन अग्रवाल ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि एनएसएस केवल एक गतिविधि नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक विचारधारा है। उन्होंने कहा कि “युवा शक्ति यदि सकारात्मक दिशा में आगे बढ़े तो समाज की हर बुराई का अंत संभव है। सेवा, संवेदना और संस्कार ही राष्ट्र निर्माण की सच्ची नींव हैं।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य डॉ. मुकेश पचौरी ने कहा कि महाविद्यालय केवल शैक्षणिक ज्ञान का केंद्र नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण की प्रयोगशाला है। उन्होंने कहा कि एनएसएस के माध्यम से छात्राएं नेतृत्व, अनुशासन, टीमवर्क और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे गुणों को आत्मसात करती हैं। उन्होंने नशा मुक्ति अभियान को समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि शिक्षित युवा ही समाज को सही दिशा दे सकते हैं।विशिष्ट अतिथि समाजसेवी एडवोकेट राहुल शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि कानून व्यवस्था के दृष्टिकोण से नशा एक गंभीर अपराध और सामाजिक समस्या है। उन्होंने युवाओं को कानून की जानकारी रखने तथा गलत संगति से दूर रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि “एक जागरूक नागरिक ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण करता है। शिक्षाविद अरुण सांचिहर ने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य चरित्र निर्माण है। उन्होंने छात्राओं से जीवन में लक्ष्य निर्धारित कर सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने छात्राओं से समाज के कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशील रहने और सामाजिक अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। इस अवसर पर सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय योगदान के लिए एडवोकेट राहुल शर्मा एवं अरुण सांचिहार का सम्मान किया गया। नशा मुक्ति और मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष जागरूकता सत्र – शिविर के अंतर्गत राष्ट्रीय सेवा योजना और नई किरण नशा मुक्ति केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में नशा मुक्ति पर जागरूकता सत्र का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता डॉ. ओ.पी. डूडी ने कहा कि वर्तमान समय में नशे की प्रवृत्ति समाज के लिए चुनौती बनती जा रही है और युवा वर्ग विशेष रूप से इसकी चपेट में आ रहा है। उन्होंने बताया कि पारंपरिक नशों की अपेक्षा अब अधिक घातक और रासायनिक नशे जैसे स्मैक, हेरोइन एवं एमडी का प्रचलन बढ़ा है, जो शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डालते हैं। उन्होंने नशे के प्रमुख कारणों में साथियों का दबाव, पारिवारिक अस्थिरता, मानसिक तनाव, भ्रामक प्रचार तथा आसान उपलब्धता को जिम्मेदार बताया। उन्होंने कहा कि नशा पीड़ितों को समाज से बहिष्कार नहीं, बल्कि सहानुभूति, उचित चिकित्सा और काउंसलिंग की आवश्यकता है। समय रहते उपचार एवं सकारात्मक सहयोग से व्यक्ति इस समस्या से बाहर निकल सकता है।मनोचिकित्सक डॉ. जैनब जुबेर पानवाला ने मानसिक स्वास्थ्य और नशा मुक्ति के वैज्ञानिक पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि नशा अक्सर अवसाद, चिंता और भावनात्मक असंतुलन से जुड़ा होता है। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने, संवाद बढ़ाने तथा पेशेवर परामर्श लेने की आवश्यकता पर बल दिया।महाविद्यालय के “नई किरण नशा मुक्ति केंद्र” के तत्वावधान में प्रशिक्षित सखियों के दल (ललिता सोनी, गरिमा अवस्थी, ज्योति जांगिड, जिया, रंजना, भूमिका जडेजा, रुचिका खत्री, सिमरन, जया सौलंकी) द्वारा नशा मुक्ति पर एक प्रभावशाली नाट्य प्रस्तुति दी गई, जिसने उपस्थित छात्राओं को भावनात्मक रूप से प्रभावित किया और समाज में सकारात्मक संदेश दिया। सहायक आचार्य डॉ. विमला ने सभी स्वयंसेविकाओं को नशा मुक्ति की शपथ दिलाई और नशामुक्त समाज के निर्माण का संकल्प करवाया। श्रमदान एवं अन्य गतिविधियाँ- राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी जितेंद्र कुमार बोहरा ने बताया कि शिविर का शुभारंभ श्रमदान से किया गया। एनएसएस की स्वयंसेविकाओं ने महाविद्यालय परिसर में सिंगल यूज प्लास्टिक का संग्रह कर स्वच्छता का संदेश दिया तथा कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया।जिला समन्वयक डायालाल सांखला ने प्राइम इंटर्नशिप कार्यक्रम, माय भारत पोर्टल एवं भारत सरकार द्वारा आयोजित माय भारत क्वेस्ट की जानकारी देते हुए छात्राओं को इन योजनाओं से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। शिविर के अंतर्गत आयोजित निबंध प्रतियोगिता में प्रथम स्थान भूमि, द्वितीय कोमल शर्मा एवं तृतीय हीना गोयल रहीं। वहीं पोस्टर प्रतियोगिता में प्रथम जया, द्वितीय मुस्कान एवं तृतीय प्रियंका को पुरस्कृत किया गया।
रिपोर्ट – ठाकराराम मेघवाल
