
ASSI एक गंभीर और संवेदनशील विषय को केंद्र में रखकर बनाई गई फिल्म है, जो रेप जैसे जघन्य अपराध के बाद एक सर्वाइवर और उसके परिवार की ज़िंदगी में आने वाले भूचाल को बेहद रियलिस्टिक तरीके से सामने लाती है। फिल्म का नाम ‘ASSI’ भी एक कड़वी सच्चाई की ओर इशारा करता है — हमारे देश में हर महीने लगभग 80 रेप के मामले दर्ज होते हैं और हर 20 मिनट में एक रेप की घटना घटती है। यह फिल्म सिर्फ घटना नहीं, बल्कि उसके बाद शुरू होने वाली उस लंबी, थका देने वाली प्रक्रिया को दिखाती है, जिससे हर सर्वाइवर को गुजरना पड़ता है। साथ ही यह इस बात की भी याद दिलाती है कि कैसे हमारे देश में रेप जैसे जघन्य अपराधों को सिर्फ आंकड़ों (data) तक सीमित कर दिया गया है और उसकी असल गंभीरता को भुला दिया गया है। 20 फरवरी को रिलीज़ हो रही यह फिल्म एक ज़रूरी और must-watch सिनेमाई अनुभव है।
कहानी
फिल्म की कहानी एक मिडिल क्लास परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है और अपने टाइटल ‘ASSI’ के जरिए देश में बढ़ते यौन अपराधों की भयावह वास्तविकता को रेखांकित करती है। परिमा एक स्कूल टीचर है और उनके पति विनय एक सुपरमार्केट स्टोर में काम करते हैं। उनकी सामान्य सी ज़िंदगी एक मनहूस रात के बाद पूरी तरह बदल जाती है, जब घर लौटते समय परिमा पांच युवकों द्वारा रेप का शिकार बन जाती है। इसके बाद शुरू होती है उस मानसिक, सामाजिक और कानूनी संघर्ष की कहानी, जो सिर्फ परिमा ही नहीं बल्कि उनके पूरे परिवार को भीतर तक तोड़ देता है। यह कहानी इस बात का भी एहसास कराती है कि कैसे ऐसी घटनाएं केवल एक केस फाइल या आंकड़ा बनकर रह जाती हैं, जबकि असल में यह एक अमानवीय (inhumanising) त्रासदी होती है जो किसी इंसान की पूरी पहचान और अस्तित्व को झकझोर देती है।
अभिनय
Kani Kusruti ने परिमा के किरदार में बेहद नैचुरल और रॉ परफॉर्मेंस दी है। उनके चेहरे के भाव, खामोशी और टूटन दर्शकों को भीतर तक झकझोर देती है।वहीं Mohd. Zeeshan Ayyub एक सेंसिटिव और सपोर्टिव पति के रूप में प्रभावशाली लगे हैं। उनका संयमित अभिनय कहानी को भावनात्मक मजबूती देता है।परिमा और विनय के बेटे की भूमिका निभा रहे Advik Jaiswal की मासूमियत दिल को छू जाती है। उनकी आंखों में दिखने वाला डर और कन्फ्यूजन फिल्म के इमोशनल इम्पैक्ट को और गहरा बनाता है।Kumud Mishra ने अपने किरदार में जो गुस्सा और लाचारी दिखाई है, उससे दर्शक आसानी से जुड़ पाते हैं।वहीं Taapsee Pannu एक वकील के रूप में सामने आती हैं, जो परिमा के केस को अंत तक लड़ती हैं और स्क्रीन पर एक मजबूत उपस्थिति दर्ज कराती हैं।फिल्म में Manoj Pahwa और Naseeruddin Shah का स्पेशल अपीयरेंस भी है, जो अपने सीमित स्क्रीन टाइम में कहानी को और प्रभावशाली बनाते हैं।
निर्देशन और तकनीकी पक्ष
फिल्म का स्क्रीनप्ले कसा हुआ है और सिनेमैटोग्राफी कहानी के माहौल को बेहद वास्तविक बनाती है। निर्देशन इस संवेदनशील विषय को बिना किसी अतिनाटकीयता के ईमानदारी से पेश करता है, जिससे फिल्म का इम्पैक्ट और गहरा हो जाता है।
फिल्म की कमजोर कड़ियां
फिल्म का पहला हाफ भावनात्मक रूप से बेहद मजबूत है और दर्शकों के दिल तक अपनी बात पहुंचाने में सफल रहता है, लेकिन दूसरा हाफ अपेक्षाकृत थोड़ा कमजोर महसूस होता है। सेकेंड हाफ में एक रेप सर्वाइवर की मानसिक स्थिति और भावनात्मक संघर्ष की गहराई को और विस्तार से दिखाया जा सकता था, जिससे कहानी का इमोशनल इम्पैक्ट और भी ज्यादा प्रभावशाली बनता।
वर्डिक्ट
ASSI एक जरूरी फिल्म है, जो एक जघन्य अपराध के बाद शुरू होने वाली मानसिक और सामाजिक लड़ाई को सच्चाई के साथ सामने लाती है। 20 फरवरी को रिलीज़ हो रही यह फिल्म बड़े पर्दे पर देखे जाने लायक एक must-watch है — जो यह याद दिलाती है कि रेप केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि एक अमानवीय त्रासदी है।
Rating: ★★★★☆
