हाड़ी रानी की अमर कहानी- मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सिर काटकर भिजवा था मैदान में

जागरूक टाइम्स 153 Feb 15, 2021

उदयपुर. 14 फरवरी यानि वेलेंटाइन डे. प्यार के इजहार का दिन. हर जमाने में प्रेम की इस खास दिन के प्रति युवा पीढ़ी में क्रेज रहा है. यूं कहें कि इस खास दिन को मनाने के तरीके युवा पीढ़ी अपने हिसाब से बदलती रही है. लेकिन इधर के सालों में वेलेंटाइन डे पर प्यार के नाम पर फूहड़ता भी बढ़ने लगी और प्रेम का वास्तविक स्वरूप गौण होता गया.

लेकिन न्यूज 18 आपको एक ऐसी रानी के बारे में बता रहा है, जो न केवल प्रेम की प्रतिमूर्ति थीं, बल्कि प्रेम में बलिदान देने की एक अद्भूत मिसाल भी पेश करती हैं। हम बात कर रहे हैं सलुंबर की हाडी रानी की, जिन्होंने अपने पति को फर्ज याद दिलाने के लिए अपना बलिदान दे दिया. ये बलिदान ना सिर्फ प्रेम की निशानी है, बल्कि इतिहास का सबसे बड़ा बलिदान भी माना जाता है.

बूंदी के हाड़ा राजा की बेटी हाड़ी रानी ने मातृभूमि के लिए अपना सिर काटकर युद्ध के मैदान में भिजवा दिया था. सिर काटने और युद्ध के मैदान के पीछे इस कहानी में एक अमर प्रेम कथा छिपी है. सलूंबर की रानी हाड़ी रानी की यह कहानी 16वीं शताब्दी की है. तब किशनगढ़ के राजा मान सिंह थे और तब औरंगजेब ने किशनगढ़ पर आक्रमण करने के लिए कूच किया था. मेवाड़ के राजा राजसिंह ने औरंगजेब को किशनगढ़ से पहले रोकने की जिम्मेदारी सलूंबर के राव रतन सिंह को सौंपी थी.

राव रतन सिंह की शादी इससके एक दिन पहले ही हाड़ी रानी के साथ हुई थी. रानी के हाथों की मेहंदी भी नहीं सूखी थी कि राव रतन सिंह को युद्ध के मैदान में जाना था. राव हाड़ी रानी से इतना प्रेम करते थे की एक पल भी दूर रहना गंवारा नहीं था. सलूंबर महल के चौक में खड़े होकर वे अपनी सेना को युद्ध के लिए तैयार कर रहे थे. लेकिन मन रानी को लेकर उदास था और तभी एक सैनिक से उन्होंने रानी की निशानी लाने को कहा. जब सैनिक रानी के पास निशानी लेने पहुंचा तो रानी को लगा कि राव रतन सिंह उनके प्रेम मोह से छूट नहीं पा रहे.

हालांकि दोनों में प्रेम इतना अटूट हो चुका था कि वे एक-दूसरे से अलग नहीं हो पा रहे थे और शायद उन्हें यह आभास भी था कि वह फिर कभी नहीं मिल पाएंगे. इसके बाद भी हाड़ी रानी ने अपने हाथ से ही अपना शीश काट सैनिक से साथ भिजवा दिया. अपने प्यार में खोए पति को उसका कर्तव्य याद दिलाने उसमें युद्ध के प्रति जोश भरने के लिए हाड़ी रानी का यह बलिदान हमेशा के लिए अमर हो गया और अमर हो गई हाड़ी रानी की प्रेम कहानी.


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