श्रेणी: वॉर / एक्शन / ड्रामा
डायरेक्टर: अनुराग सिंह
अवधि: 3 घंटे 5 मिनट
रेटिंग: ⭐⭐⭐⭐✩ (4.5/5)
Border 2 Review: 1971 के ऐतिहासिक बासंतर युद्ध की पृष्ठभूमि पर बनी Border 2 भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना के संयुक्त साहस की कहानी कहती है। सीमित संसाधनों के बावजूद दुश्मन को पीछे धकेलने, देश की रणनीतिक सीमाओं की रक्षा करने और सैनिकों के अदम्य जज़्बे को फिल्म बेहद प्रभावशाली तरीके से पेश करती है। यह कहानी सिर्फ़ जंग की नहीं, बल्कि बलिदान, भाईचारे और देशभक्ति की है, जो दर्शक को शुरुआत से अंत तक बांधे रखती है।
डायरेक्शन
अनुराग सिंह ने Border जैसी भावनात्मक विरासत को संभालते हुए उसके साथ पूरा न्याय किया है। नॉस्टेल्जिया और नएपन के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं था, लेकिन निर्देशक इस परीक्षा में खरे उतरते हैं। भव्य वॉर सीक्वेंस, मजबूत इमोशनल मोमेंट्स और टाइट नैरेशन फिल्म को कहीं भी भटकने नहीं देते।
परफॉर्मेंस
Border 2 की सबसे बड़ी ताकत इसकी दमदार परफॉर्मेंस हैं, और इस जंग की कमान पूरी तरह Sunny Deol के हाथ में है। सनी देओल इस फिल्म की जान हैं—सचमुच। उनके डायलॉग्स थिएटर में बैठे दर्शकों के भीतर जोश भर देते हैं। हर एंट्री, हर संवाद और हर इमोशनल सीन में वह यह एहसास दिलाते हैं कि Border फ्रेंचाइज़ उनके बिना अधूरी है। 69 की उम्र में भी उनका गुस्सा, उनकी आवाज़ और उनका स्क्रीन प्रेज़ेंस उतना ही खतरनाक और प्रभावशाली है। सनी देओल सिर्फ़ किरदार नहीं निभाते, वह उसे जीते हैं—और यही बात उन्हें बाकी सबसे अलग बनाती है।
Varun Dhawan इस फिल्म के सबसे बड़े सरप्राइज़ पैकेज हैं। जिन लोगों ने उन्हें ट्रोल किया था, Border 2 उनके लिए करारा जवाब है। यह वरुण धवन का अब तक का सबसे सशक्त, परिपक्व और असरदार प्रदर्शन है। उनकी बॉडी लैंग्वेज, देसी टोन और इमोशनल सीन्स पूरी तरह विश्वसनीय लगते हैं। एक सैनिक की मजबूती, संवेदनशीलता और डर—तीनों भावनाओं को वरुण ने बेहद संतुलित तरीके से पर्दे पर उतारा है। यह कहना गलत नहीं होगा कि Border 2 वरुण के करियर में एक टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है।
Diljit Dosanjh अपने किरदार में शालीनता, गरिमा और दिल जीत लेने वाला चार्म लेकर आते हैं। वह जहां देश के लिए जान देने वाले जांबाज़ पायलट के रूप में प्रभावित करते हैं, वहीं हल्के-फुल्के पलों में अपनी मौजूदगी से मुस्कान भी ले आते हैं। दिलजीत का परफॉर्मेंस इमोशन और एंटरटेनमेंट के बीच एक परफेक्ट बैलेंस बनाता है।
Ahan Shetty सीमित स्क्रीन टाइम के बावजूद अपनी छाप छोड़ने में कामयाब रहते हैं। पिता सुनील शेट्टी की Border वाली विरासत की झलक उनके किरदार में महसूस होती है, लेकिन अहान उसे अपने अंदाज़ में पेश करते हैं। खासकर निर्णायक दृश्यों में उनका संयमित और फोकस्ड अभिनय सराहनीय है।
महिला कलाकारों की बात करें तो Mona Singh भावनात्मक स्तर पर फिल्म को मजबूत आधार देती हैं। सनी देओल के साथ उनकी केमिस्ट्री स्वाभाविक और असरदार लगती है। Sonam Bajwa सीमित स्क्रीन स्पेस में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराती हैं, वहीं Medha Rana एक सुखद सरप्राइज़ साबित होती हैं—उनकी सादगी और ईमानदारी किरदार को खास बना देती है।
कुल मिलाकर, Border 2 की परफॉर्मेंस ही फिल्म को ऊंचाई तक ले जाती हैं। हर कलाकार अपने किरदार के साथ न्याय करता है और फिल्म को सिर्फ़ एक वॉर ड्रामा नहीं, बल्कि एक भावनात्मक अनुभव बना देता है।
म्यूज़िक
Border 2 का संगीत फिल्म की भावनाओं को गहराई देता है और कहानी के साथ पूरी तरह बहता है। पुराने गानों के रीक्रिएशन ज़बरदस्ती नहीं लगते, बल्कि सीन की गंभीरता और असर को बढ़ाते हैं। Sonu Nigam और Roop Kumar Rathod की भावुक गायकी रोंगटे खड़े कर देती है, जबकि Arijit Singh हर इमोशनल पल में दर्द और गर्व घोलते हैं। Shreya Ghoshal अपनी मधुर आवाज़ से संवेदनशील दृश्यों को खूबसूरती देती हैं, वहीं Vishal Mishra और Diljit Dosanjh के गाने फिल्म में ऊर्जा और देशभक्ति का जोश भर देते हैं। बैकग्राउंड स्कोर युद्ध के दृश्यों को और ज़्यादा प्रभावशाली बनाता है।
वर्डिक्ट
Border 2 को देखने की वजह किसी रील ट्रेंड या “अहान शेट्टी कमेंट करेगा तब देखेंगे” वाली सोच नहीं होनी चाहिए। यह फिल्म हमारे उन सैनिकों के नाम है, जिन्होंने देश के लिए अपना आज और अपना कल कुर्बान किया। हर भारतीय को यह फिल्म ज़रूर देखनी चाहिए, ताकि हमें समझ आए कि असली देशभक्ति क्या होती है और हमारी मातृभूमि की रक्षा के लिए जवान और उनके परिवार कितना बड़ा बलिदान देते हैं।
