सूखा निकल रहा सावन, नहीं हो रही बारिश

जागरूक टाइम्स 671 Aug 6, 2018

जोधपुर जागरूक टाइम्स
मारवाड़ में बारिश नहीं होने से आमजन परेशान हो गया है। सावन सूखा बीता जा रहा है, लेकिन यहां बारिश नहीं हो रही है। सोमवार को भी इंद्रदेव ने जिले को बरसात के लिए तरसाए रखा। सुबह से धूप-छांव का दौर चला। मौसम में हल्की गर्माहट भी रही। सवेरे बादल इतने घने थे कि लगा कि बारिश होकर रहेगी, लेकिन हवा के कारण बादलों का जोर नहीं चला। सुबह आसमान पर काले बादल छाए रहे, लेकिन बादलों के छितराने पर धूप निकली। सावन में बरसात के कहीं आसार नजर नहीं आ रहे हैं। 




महानगर में बादलों और सूरज के बीच आंख मिचौली का खेल कई दिनों से चल रहा है। दोपहर में तेज धूप से सड़कें फिर से सुलगने लगी है। हालांकि सुबह साढ़े आठ बजे के आसपास घनघोर बादलों से हल्की फुहारें जरूर गिरी, लेकिन चंद सैकंड के बाद वे भी नहीं दिखी। हवाओं ने बादलों का खेल बिगाड़ दिया है।
शहर सहित संभाग के अधिकांश हिस्सों में लगातार बादलों की आवाजाही के बाद भी बारिश नहीं हो पा रही है। सावन में बारिश की काफी उम्मीद रहती है।

अभी तक सावन में एक बार भी बारिश नहीं हुई है। इस बार मौसम विभाग की संभावनाओं को देखते हुए लग रहा है कि अगले कुछ दिन और बारिश की उम्मीद नहीं है। सावन आधा बीतने के बाद यानि अमावस्या के आस पास बारिश आने की संभावनाएं दिखाई दे रही हैं। जुलाई के आखिरी दिनों में ऊपरी हवाओं के चक्रवात बने, लेकिन शहर की तरफ नहीं आ पाए। जोधपुर में बादल होने के बावजूद नमी नहीं मिली और बारिश नहीं हो पाई। बादलों के उतार चढ़ाव के बीच आज जोधपुर में आज न्यनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। 

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किसानों की चिंता बढ़ी
हवाओं ने किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। पूर्व में हुई बारिश के दौरान लोगों ने खेतों में बुवाई कर दी थी। कई स्थानों पर जब फसलें खड़ी होने की स्थिति में आई तो मानसून का रुख बदल गया। तेज हवा चलने से खड़ी फसलों को नुकसान की आशंका बढ़ गई है। किसान बरसात को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है अब जल्द ही बरसात नहीं हुई तो हवा से फसल की उम्मीद खत्म हो जाएगी।

बारिश के बाद जमीन में नमी के चलते हुई बुवाई से बाजरी व मूंग-मोठ की फसलें खड़ी होने लगी हैं। किसानों ने खेतों में सूड़ करना प्रारम्भ कर दिया लेकिन पिछले दिनों से सतह से चली हवा से जमीन की नमी समाप्त हो रही है। सतह की हवा ने कई स्थानों पर फसलों को नुकसान पहुंचाया है। वहीं नमी सोखने के कारण फसलों को पानी की जरूरत बढ़ गई है।

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