हत्या के मामले में दो को फांसी, तीन आरोपियों को सात वर्ष जेल

जागरूक टाइम्स 1117 Aug 7, 2018

बाड़मेर। जिले के रड़वा में बालिका को अपहरण कर दुष्कर्म करने और हत्या करने के मामले में न्यायालय ने दो आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई है। वहीं अन्य तीन आरोपियों को 7-7 साल के कठोर दंड से दंडित किया है। दरअसल, जिले के रड़वा क्षेत्र में अपने घर में मां और भाई के पास सो रही नाबालिग बालिका का आरोपी घेवरसिंह व श्रवणसिंह ने अपहरण कर सूनसान जगह ले गए। जहां उसके साथ बलात्कार किया और नाबालिग को पहाड़ी से गिराकर उसकी हत्या कर दी।

वहीं अन्य तीन आरोपियों प्रहलादसिंह, नारसींगसिंह व शंकरसिंह ने आरोपी का अपराध छिपाने व और पीडि़त पक्ष पर दवाब बनाने साथ ही आरोपी घेवरसिंह व श्रवणसिंह का सहयोग किया। मामले को लेकर मृतका के पिता पर दबाव बनाकर उससे लिखवाकर लिया गया कि उसकी बेटी का मानसिक संतुलन ठीक नहीं था। वहीं पहाड़ी से गिरने से उसकी मौत हो गई। लेकिन मृतका की मां ने अपनी बेटी को अपहरण कर दुष्कर्म करने और फिर हत्या करने का मामला महिला थाने में दर्ज करवाया था।

महिला थाने में प्रकरण संख्या 32/2013 में दर्ज हुआ। आरोपियों पर धारा 363, 366-क, 376 ए, 376डी, 458, 450, 302, 120 बी, 347, 201 भारतीय दंड संहिता एवं 5(त्र)/6, 19(1)/21 लैंगिक अपराधों से बालकों के संरक्षण अधिनियम 2012 के अंतर्गत मामला दर्ज हुआ। इस प्रकरण की जांच तत्कालीन बाड़मेर पुलिस उपाधीक्षक नाजिम अली खान ने की और एक-एक पहलु को केस से जोड़कर मामले का खुलासा किया।

न्यायालय ने आरोपी घेवरसिंह व श्रवणसिंह को अपराध अंतर्गत धारा 363, 366-क, 376 ए, 376 डी, 458, 450, 302, 120 बी भारतीय दंड संहिता एवं 5(त्र)/6 लैंगिक अपराधों से बालकों के संरक्षण अधिनियम 2012 एवं सहयोगी आरोपी प्रहलादसिंह, नरसींगसिंह व शंकरसिंह को धारा 347, 201 भारतीय दंड संहिता एवं 19(1)/21 लैंगिक अपराधों से बालको का संरक्षण अधिनियम 2012 के तहत दोषी घोषित किया। न्यायालय ने दुष्कर्म व हत्या के आरोपी घेवरसिंह को धारा 363 भारतीय दंड संहिता में दोषी मानते हुए 7 वर्ष का कठोर कारावास एवं 25 हजार रुपए आर्थिक दंड से दंडित किया वहीं आर्थिक दंड अदा ना करने पर 6 माह का अतिरिक्त कारावास, धारा 366-क में 10 वर्ष का कठोर कारावास व 25 हज़ार रुपये आर्थिक दंड व आर्थिक दंड अदा ना करने पर 6 महीने का अतिरिक्त कारावास, धारा 376ए, 302, भारतीय दंड संहिता में दोषी मानते हुए मृत्युदंड से दंडित किया और आदेशित किया कि आरोपी को फांसी लगाकर तब तक लटकाया जाए, जब तक उसकी मृत्यु ना हो जाये।

वहीं आरोपी घेवरसिंह को अपराध के लिए 50 हजार रुपए के आर्थिक दंड से दंडित किया गया। धारा 120बी भारतीय दंड संहिता में मृत्युदंड व 25 हजार रुपए आर्थिक दंड, धारा 5(त्र)/6 लैंगिग अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 में 10 वर्ष का कठोर कारावास व 25 हजार रुपए आर्थिक दंड से दंडित किया गया। आरोपी श्रवणसिंह को धारा 363 में दोषी मानते हुए 7 वर्ष का कठोर कारावास व 25 हजार का आर्थिक दंड, धारा 366-क में 10 वर्ष का कठोर कारावास व 25 हजार का आर्थिक दंड, धारा 376ए भारतीय दंड संहिता में दोषी मानते हुए मृत्युदंड से दंडित किया गया और आदेशित किया गया कि अभियुक्त को फांसी लगाकर तब तक लटकाया जाए, जब तक उसकी मृत्यु ना हो जाये।

वही अभियुक्त को धारा 376डी भारतीय दंड संहिता में आजीवन कारावास व 50 हजार का आर्थिक दंड, धारा 458 में 10 वर्ष का कठोर कारावास व 25 हजार का आर्थिक दंड, धारा 450 में 10 वर्ष का कारावास, धारा 302 में मृत्युदंड व 50 हजार रुपए आर्थिक दंड, धारा 120 में मृत्युदंड व 25 हजार आर्थिक दंड, धारा 5(जी) में 10 वर्ष का कठोर कारावास व 25 हजार आर्थिक दंड की सजा सुनाई गई। अन्य तीन आरोपियों प्रहलादसिंह, नारसींगसिंह व शंकरसिंह को धारा 347 भारतीय दंड संहिता में दोषी मानते हुए 3-3 वर्ष का कठोर कारावास व प्रत्येक को 5-5 हजार रुपए का आर्थिक दंड, धारा 201 में 7-7 वर्ष का कारावास व 10-10 हजार का आर्थिक दंड, धारा 19(1)/21 लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 में 6-6 माह का कारावास व 2-2 हजार का आर्थिक दंड से दंडित किया गया।

104 पन्नों में फैसला
विशिष्ट न्यायाधीश, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण प्रकरण) एवं पोक्सो मामलात में न्यायाधीश वमिता सिंह ने इस प्रकरण को रेयरेस्ट केस मानते हुए इसे मानवीयता को शर्मसार करने वाली घटना बताया है। जिसमे उन्होंने बाड़मेर पुलिस की जांच को पुख्ता मानते हुए पीडिता के पक्ष में फैसला देते हुए आरोपियों को मृत्युदंड दिया हैं।

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