महावीर को ब्लड चढ़ाना था, स्टाफ ने पास के बेड पर लेटे दूसरे महावीर को चढ़ा दिया

जागरूक टाइम्स 666 May 27, 2019

सीकर (ईएमएस)। एसके हॉस्पिटल में नर्सिंग स्टाफ की लापरवाही से मरीज की जान पर संकट आ गया है। स्टाफ ने एक जैसे नामों की गफलत में दूसरे मरीज को ब्लड चढ़ा दिया, जिसे जरूरत ही नहीं थी। स्टाफ ने 4 घंटे मामले को दबाए रखा। युवक की हालत बिगड़ी तो जयपुर रैफर किया। ब्राह्मणवास (खंडेला) का महावीरप्रसाद पुत्र फूलचंद मीना शनिवार दोपहर सीने में दर्द की शिकायत लेकर हॉस्पिटल पहुंचा। मेल मेडिकल वार्ड में बेड न मिलने के कारण बर्न यूनिट में एक नंबर बेड पर भर्ती किया। 2 नंबर बेड पर नवलगढ़ का महावीर भर्ती था।

खून की कमी के कारण उसे एबी पॉजिटिव ग्रुप का ब्लड लगाया जा रहा था। रविवार दोपहर नवलगढ़ के महावीर के परिजनों ने स्टाफ को ब्लड का बैग लाकर दिया। नर्सिंग स्टाफ ने उसे खाना खाने के बाद ब्लड चढ़ाने का हवाला दिया। महावीर और उनके परिजन भोजन करने चले गए। पीछे से लापरवाह नर्सिंग स्टाफ ने सुबह करीब 12 बजे बेड नं. 1 पर भर्ती महावीरप्रसाद के ब्लड चढ़ा दिया। जबकि डॉक्टरों ने ब्लड चढ़ाना लिखा ही नहीं था। इससे महावीरप्रसाद की तबीयत बिगड़ गई। वह तड़पने लगा। बेड नंबर 2 पर भर्ती नवलगढ़ के महावीर के परिजनों ने दोबारा स्टाफ के पास पहुंच ब्लड चढ़ाने को कहा तो स्टाफ को लापरवाही का अहसास हुआ।

इसके बाद भी मरीज को संभालने के बजाय स्टाफ ने उसकी पत्नी को धमकाकर चुप करा दिया। 4 घंटे मामले को दबाए रखा। ड्यूटी चेंज हुई तो साथी स्टाफ को भी अवगत नहीं कराया। बाद में मामला हाथ से निकलते देखा तो ड्यूटी डॉक्टर डॉ. सुखचैन को अवगत कराया। ड्यूटी डॉक्टर वार्ड में पहुंचा तो मरीज की हालत गंभीर हो चुकी थी। शाम 4 बजे महावीरप्रसाद को गंभीर हालत में जयपुर रैफर कर दिया। देर शाम तक पीएमओ से लेकर वार्ड इंचार्ज तक लापरवाह स्टाफ पर जिम्मेदारी तय करने से बचते रहे। पीएमओ डॉ. अशोक चौधरी का कहना है कि ड्यूटी डॉक्टर सुखचैन ने मामले की जानकारी दी। मरीज के इलाज में स्टाफ की लापरवाही सामने आई है। मरीज को जयपुर रैफर किया है। सोमवार को ड्यूटी चार्ट देखकर पता लगा जाएगा कि किसने मरीज को ब्लड चढ़ाया। दोषी के खिलाफ कार्रवाई होगी।

ड्यूटी डॉक्टर सुखचैन का कहना है कि नर्सिंग स्टाफ ने बिना सीआर नंबर मिलान किए पड़ोसी मरीज को ब्लड चढ़ा दिया। इससे उसकी तबीयत बिगड़ गई। लापरवाही के बावजूद 2 घंटे बाद मुझे कॉल किया। जब मैं पहुंचा तो मरीज की स्थिति गंभीर थी। दो फीमेल स्टाफ ड्यूटी पर थी। मरीज को जयपुर रेफर कर दिया। वार्ड इंचार्ज मोहम्मद हुसैन ने बताया कि नर्सिंग स्टाफ में दो जने ईएनटी वार्ड में थे। दो की बर्न वार्ड में ड्यूटी थी। लापरवाही किसने बरती, इसकी जानकारी नहीं मिली। गलत ब्लड ग्रुप चढ़ाने से मरीज की सांसों की गति दोगुनी हो जाती है।

किडनी फेल का खतरा बढ़ जाता है। शरीर पर फफोले आ जाते हैं। ब्लड ग्रुप क्रॉस मैचिंग के जरिए मरीज की स्थिति को कंट्रोल किया जा सकता है। समय पर और सही इलाज न मिलने की दशा में जान भी जा सकती है। एसके हॉस्पिट में 3 साल में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के खिलाफ 43 शिकायतें मिली। प्रबंधन की जांच में हर बार डॉक्टरों-स्टाफ को निर्दोष होने का सर्टिफिकेट मिला। चार शिकायतों की जांच प्रशासनिक अफसर और पुलिस से कराई। चारों में डॉक्टर और स्टाफ दोषी मिले।


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