खेती की गाड़ी, बनवा रही मकान ढो रही हे सवारी

   Posted Date : 12/6/2017 7:42:10 PM

दांतराई : कृषि क्षेत्र में उपयोग में आने वाले ट्रैक्टरों का व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है। दरअसल,कृषि कार्यो के लिए पंजीकृत ट्रैक्टरों का व्यावसायिक उपयोग नहीं होना चाहिए। लेकिन परिवहन व पुलिस विभाग की अनदेखी से ट्रैक्टर संचालकों की ओर से कृषि उपयोग के ट्रैक्टरों का व्यावसायिक उपयोग करने के साथ यातायात नियमों की भी जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही है। क्षेत्र में मकान निर्माण कार्यो के तहत ईट, बजरी, पत्थर, रफ, पानी के टेंकर, कंकरीट, मिट्टी, पाइप, आदि सामान लाने-ले जाने में कृषि क्षेत्र के ट्रैक्टरों का व्यावसायिक उपयोग धड़ल्ले से हो रहा है। ऎसे में यातायात नियमों का भी खुले आम मखौल उड़ाया जा रहा है। सड़कों पर सरपट दौड़ने वाले कई ट्रैक्टर रात्रि के समय एक लाइट के सहारे से चलते हैं। वहीं कई ट्रैक्टरों पर दो की बजाय तीन लाइटें जलती नजर आती है। इसके अलावा कई ट्रैक्टरों के पीछे बंधी टॉलियों पर रिफ्लेक्टर का अभाव है। जिसके चलते सड़क दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता है। ऎसे में सड़कों पर आए दिन हादसे घटित होते रहते हैं। तेज गति व सड़कों की स्थिति सही नहीं होने के कारण ट्रैक्टर-ट्रॉली के पलटने की संभावना अधिक रहती है। क्षेत्र में पूर्व में इस प्रकार के सड़क हादसों में कई जिन्दगियां लील गई है। इसके बावजूद परिवहन विभाग एवं पुलिस की ओर से इसे गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।

पंजीयन कृषि कार्य का उपयोग निजी व्यवसाय
क्षेत्र में कई ऐसे ट्रैक्टर-ट्रालियां है, जिनका प्रयोग कृषि कार्य के लिए न होकर निजी व्यवसाय के लिए हो रहा है। सरकार को इन वाहनों की ओर से रोड टैक्स न भरकर लाखों रुपये का चूना लगाया जा रहा है। जबकि संबंधित विभाग कारवाई करने की बजाय हाथ पर हाथ धरकर बैठा है। पहले तो यह काम केवल शहरों में था, परंतु संबंधित विभागीय अधिकारियों के सादे रूख के कारण अब यह व्यवसाय ग्रामीण क्षेत्रों में खूब फल-फूल रहा है। दूसरी बात इन वाहनों पर क्षमता से अधिक सामान लोड किया जा रहा है, जिससे हादसे होने का डर बना रहता है। इन वाहन चालकों के खिलाफ न तो परिवहन विभाग की ओर से कोई कारवाई की जाती है और न ही  कर्मियों की ओर से। कई बार तो पुलिस सड़कों पर लगाए नाकों पर खड़ी रहती हैं और ऐसे वाहन चालक पुलिस कर्मियों के पास से ट्रैफिक आसानी से गुजर जाते हैं। इससे जाहिर है कि पुलिस कर्मियों को या तो ऐसे वाहनों संबंधी नियमों से अवगत नही हैं या फिर ऐसे वाहनों को गंभीरता से नही लेते।

नहीं की जाती कार्रवाई
गाँवो व शहरो में ज्यादातर अवैध परिवहन में कुछ राजनीतिक दल के लोग बड़ी-बड़ी कंस्ट्रक्शन कम्पनियों के मालिक, रसूखदार लोगों की संलिप्तता होती है जिसमें किसान बनकर ट्रैक्टर का पंजीकरण कराने में वाहन मालिक बड़ा खेल करते चले आ रहे हैं। ट्रैक्टर खरीदते समय उसका कृषि कार्य में रजिस्ट्रेशन कराकर टैक्स, फिटनेस, परमिट  बचाकर विभाग के राजस्व को चूना लगा रहे ट्रैक्टर मालिकों के खेल को विभाग  गंभीरता से नही ले रहा है। कृषि कार्य के ट्रैक्टर से व्यवसाय करने वाले जमकर मुनाफा कमा रहे हैं, परन्तु जिम्मेदार परिवहन विभाग आंख पर पट्टी बांधे बैठा है। इनकी नजर कभी इन व्यवसाय करने वाली ट्रैक्टर ट्रालियों पर नहीं पड़ती। इनकी अनदेखी के चलते शहर से लेकर गांव की गलियों में धड़ल्ले से ट्रैक्टर रेत, मिटटी, ईंट, गिटटी भर कर दौड रहे हैं।

अनाड़ी चला रहे ट्रैक्टर ट्राली
अधिकांश ट्रैक्टर ट्रालियां नौसीखिये चला रहे हैं। इनके पास लाइसेंस तक नहीं होता है। जिसके चलते हमेशा ट्रालियों से एक्सीडेंट की खबरें आती रहती है। फिर भी इनके ड्राइवर और लाइसेंस की जांच नहीं की जाती है। इस कारण ट्रैक्टर ट्रालियों से ढुलाई का चलन बढ़ता जा रहा है। अगर समय रहते जिम्मेदार विभाग ने इस पर लगाम नहीं लगाया तो दुर्घटनाएं बढ़ेगी और राजस्व का भी नुकसान होगा वही ट्रैक्टर ट्रालियों का अन्य वाहनों की तरह फिटनेश जांच भी नहीं होता है। बिना फिटनेश के ट्रालियां धड़ल्ले से शहर की सड़कों और गलियों में दौड़ती रहती है।

इनका कहना
अगर बीना व्यवसायिक पंजीकृत के टेक्ट्ररो से घरेलू कार्य किया जा रहा हे तो उनके खिलाफ नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी अजीत सिंह राजपुरोहित  इंस्पेक्टर आरटीओ अधिकारी सिरोही

टेक्ट्रर  व्यवसायिक पंजीकृत हो या न हो ट्रेक्टर का उपयोग सामान लाने ले जाने के लिए ही होता हे दिलीप सिंह खदावद पुलिस थानाधिकारी रेवदर

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