RI micro-planning हेतु नव नियुक्त मेडिकल ऑफिसर्स एवं ANMs के लिए Barmer में कार्यशाला आयोजित

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Barmer

जिले में नियमित टीकाकरण को सुदृढ़ बनाने, उच्च जोखिम क्षेत्रों हाई रिस्क में शत प्रतिशत कवरेज सुनिश्चित करने तथा ‘जीरो डोज़’ बच्चों की पहचान को प्राथमिकता देने हेतु WHO एवं चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, बाड़मेर के संयुक्त तत्वावधान में जिला स्तरीय आमुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में नव नियुक्त मेडिकल ऑफिसर्स एवं एएनएम्स ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति

इस कार्यशाला में जिले के प्रमुख अधिकारियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विष्णुराम विश्नोई, उप मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. महिपाल सिंह सोढ़ा, जिला आरसीएचओ डॉ. बांकाराम, डब्ल्यूएचओ के एसएमओ– डॉ. पंकज सुथार, डीपीएम सचिन भार्गव, जिला कार्यक्रम समन्वयक राकेश भाटी इन सभी अधिकारियों ने प्रतिभागियों को नियमित टीकाकरण की गुणवत्ता सुधार, माइक्रोप्लानिंग की वैज्ञानिक प्रक्रिया तथा U-WIN प्लेटफॉर्म के प्रभावी उपयोग पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया।

उच्च जोखिम क्षेत्रों और जीरो डोज़ बच्चों पर विशेष फोकस

कार्यशाला में बताया गया कि जिले के अनेक दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों में अभी भी टीकाकरण कवरेज में कमी है। अधिकारियों ने यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि प्रत्येक हाई-रिस्क क्षेत्र का सही आंकलन किया जाए, जीरो डोज़ बच्चों की घर-घर खोज कर तत्काल टीकाकरण से जोड़ा जाए, प्रवासी परिवारों और खानाबदोश जनसंख्या तक नियमित रूप से सेवाएँ पहुँचाई जाएँ। WHO टीम ने वास्तविक उदाहरणों के साथ बताया कि माइक्रोप्लानिंग मजबूत होने से टीकाकरण सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता दोनों में सुधार होता है।

एमआर प्रथम और एमआर द्वितीय टीकाकरण कवरेज सुधार पर जोर

मीजल्स-रूबेला (MR) टीकाकरण की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए अधिकारियों ने कहा कि एमआर प्रथम टीका 9–12 माह की आयु में, एमआर द्वितीय टीका 16–24 माह की आयु में दिलाना अनिवार्य है। कम कवरेज वाले क्षेत्रों में विशेष आरआई सत्र, सामुदायिक काउंसलिंग और परिवारों के साथ नियमित संवाद पर जोर दिया गया।

U-WIN प्लेटफॉर्म का प्रभावी उपयोग

कार्यशाला में Hands-on प्रशिक्षण दिया गया जिसमें प्रतिभागियों को सत्र पंजीकरण लाभार्थियों की वास्तविक समय एंट्री, छूटे/आंशिक टीकाकरण वाले बच्चों की पहचान, सत्र समापन रिपोर्टिंग, डेटा की शुद्धता और ट्रैकिंग मॉडल आदि सिखाया गया।WHO टीम ने स्पष्ट किया कि U-WIN के माध्यम से डेटा-आधारित निर्णय लिए जा सकते हैं, जिससे माइक्रोप्लान को और अधिक सटीक बनाया जा सकता है।

कार्यशाला का उद्देश्य – हर बच्चे तक टीका

अधिकारियों ने कहा कि जिले के किसी भी गाँव, किसी भी बस्ती का कोई भी बच्चा टीके से वंचित न रहे। प्रतिभागियों ने भी अपने-अपने कार्यक्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण टीकाकरण सेवाएँ सुनिश्चित करने का संकल्प व्यक्त किया।

रिपोर्ट- ठाकराराम मेघवाल

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