सोजत (Sojat) पूरणेश्वर धाम पर गोविन्द गिरी जी ने कहा कि वेदों में भगवान के बारे में वर्णन किया गया है। संत ने भगवान की परिभाषा को विस्तार से समझाया। उन्होंने भगवान के छः लक्षण बताते हुए कहा कि हम जो बोलते हैं वो बहुत सोच समझकर बोलना चाहिए । मनुष्य कौन हैं इसके भी विशिष्ठ लक्षण होते हैं। संत ने कहा प्रभु की बंशी की आवाज सुनकर गोपीया सभी कार्य छोड़कर बांसुरी की धुन पर दौड़ उठी। प्रभु ने गोपियों को महाभागी कहा । संतो के अनुसार भाग्यशाली वट व्यक्ति है जो गंगा स्नान करते हैं प्रभु के नाम की माला फेरते हैं सत्संग करते हैं भगवान की पूजा करते है तुलसी कहते है संत समागम एवं भगवत कथा दुर्लभ है। हर वक्त भौतिकता की चकाचौंध में दौड़ रहा है। यह हाय-हाय मिट जाए चित्त शांत व प्रसन्न हो जाए वो कृष्ण की ओर दौड़ है।राधाकृष्ण महाराज ने मोहन आओ तो सरी श्री कृष्ण का भजन सुनाया। वचनाराम राठौड़ एवं उनके पुत्र महेन्द्र राठौड़ ने आगन्तुकों का स्वागत किया।भगवान गीता में अर्जुन से कहते हैं एक मष मकरंद भगवान के चरणाबिन्द है उन्होंने संत तुकाराम का हवाला दिया।महर्षि रमण सदैव भ्रमण करते रहे। चैतन्य महाप्रभु मीरा की भक्ति अलग थी हमारी भक्ति अलग है जो प्रभु से कुछ मोगती है उन्होने पढ़रपुर एवं विठ्ठलनाथ की यात्रा के वारकरी के दृष्टान्त सुनाएं।शुद्ध भक्ति देखनी हो तो पंढरपुर जाकर देखनी चाहिए जो सखाओं की भक्ति हैं। लघुरास और महारास में रमी गोपियों भगवान के साथ दिव्य भक्ति आरंभ कर देती हैं गोपियों के मन में अहम आते ही भगवान अन्त्तध्यान हो गए रास समाधि का विज्ञान है। महाराज करते है कि भगवान की शरण में आने पर पापी, काली क्रोधी सब तर जाते है लेकिन अहंकारी नहीं’ तरते हैं। महाराष्ट्र के सेतों ने विरहणियां लिखी उहोने कबीर का उद्धरण दिया । चैतन्य महाप्रभु की भक्ति निराली थी। इस मौके कथा स्थल पर कथा में भाजण प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़, पूर्वकाबिना मंत्री लक्ष्मी नारायण दवें, सोजत विधायक शोभा चौहान भाजपा जिला अध्यक्ष सुनीलभण्डारी चेयरमैन मंजू जुगल किशोर निकुम, प्रफुल्ल ओझा, मदन पंवार, कन्हैया लालओझा, सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थितथे।
रिपोर्ट – बाबूलाल पंवार
