रेवदर (Revder) पंचायत समिति रेवदर की ग्राम पंचायत रायपुर में पिछले पाँच वर्षों के दौरान भारी गबन, भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का मामला सामने आया है। ग्रामीणों की शिकायत के बाद प्रशासन द्वारा गठित जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सीईओ जिला परिषद को भेज दी है, जिसमें तत्कालीन वीडीओ, सरपंच और तकनीकी अधिकारियों की मिलीभगत से बड़े स्तर पर नियम विरुद्ध कार्य किए जाने की पुष्टि हुई है। जिसमें तीन सदस्यीय कमेटी की रिपोर्ट में लगभग 21 लाख रुपये की अनियमितता पाई गई है। जिसमें तत्कालीन सरपंच एवं वर्तमान प्रशासक छगनलाल कोली और तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी को दोषी ठहराया गया है। जिला परिषद में वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ी जांच रिपोर्ट 19 सितंबर 2025 को सीईओ कार्यालय सिरोही पहुंचने के बावजूद भी कोई नहीं हुई।निर्माण कार्य हुए नहीं, भुगतान हो गया पंचायत समिति के अधिकारीयों पर भी गिर सकती जांच की आंचरायपुर ग्राम पंचायत में उजागर हुए भ्रष्टाचार मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। पंचायत में कथित रूप से बिना कार्य किए भुगतान उठाने, फर्जी पट्टे जारी करने और अनियमितताओं के बाद अब पंचायत समिति स्तर के अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों के अनुसार ग्राम पंचायत में होने वाले किसी भी निर्माण कार्य में ग्राम पंचायत से लेकर पंचायत समिति तक कई चरणों में अनुमोदन, निरीक्षण और एमबी (मेजरमेंट बुक) भरने की प्रक्रिया शामिल होती है। आमतौर पर निर्माण कार्य पूरा होने के बाद पंचायत समिति के तकनीकी अधिकारियों द्वारा मौके पर जांच कर एमबी तैयार की जाती है, जिसके आधार पर आगे भुगतान की प्रक्रिया शुरू होती है। लेकिन रायपुर ग्राम पंचायत में जिन कार्यों को लेकर भुगतान किया गया, वे कार्य मौके पर हुए ही नहीं, ऐसे में यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि जब काम हुआ ही नहीं, तो पंचायत समिति के अधिकारियों ने एमबी कैसे भर दी होगी। क्या जांच किए बिना ही भुगतान स्वीकृत कर दिया गया।। मामला अब तूल पकड़ने लगा है और ग्रामीणों ने इसकी शिकायत उच्चाधिकारियों तक पहुंचाने की तैयारी शुरू कर दी है।गैर मुमकिन रास्तों व ओरण भूमि पर भी जारी कर दिए पट्टे, बन गया कॉम्प्लेक्सकमेटी के अनुसार रायपुर पंचायत ने पट्टा बुक संख्या 47 में पट्टा संख्या 33, 34, 39, 40, 63 व 64 को पुश्तैनी पट्टे के रूप में जारी किया, जबकि संबंधित व्यक्तियों का उस भूमि पर कोई पुश्तैनी कब्जा नहीं था। इन जमीनों पर अब वर्तमान में चार से पाँच दुकानें बनाकर व्यावसायिक गतिविधियाँ चलाई जा रही हैं। साथ ही ओरण भूमि एवं गैर मुमकिन रास्तों पर भी नियमों के विपरीत पट्टे जारी किए गए।सफाई, लाइट व फर्नीचर के नाम पर 25 लाख रुपए का दुरुपयोगजांच में पाया गया कि दिसंबर 2022 से अगस्त 2025 तक पंचायत द्वारा सफाई व्यवस्था पर 10.30 लाख, लाइट रखरखाव पर 5.17 लाख, विविध व्यय पर 7.60 लाख, फर्नीचर पर लाखों रुपए बिना सक्षम स्वीकृति के खर्च दिखाए गए। कई वाउचर प्रस्तुत नहीं किए गए और स्टॉक में कोई प्रविष्टि भी नहीं मिली।निजी हित के लिए भी ग्राम पंचायत ने करवाए निर्माणजांच रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि पंचायत निधि से कई निर्माण कार्य व्यक्तिगत लाभ के लिए कराए गए जिसमें जुजार सिंह की दुकान के आगे ब्लॉक कार्य 2,07,760, हकसिंह की दुकान के आगे ब्लॉक कार्य 1,96,069, पंखुदेवी कोली के नाम पर बनाई रपट 4,97,468 जो मौके पर रपट मिली ही नहीं, नारायणलाल लुहार की खातेदारी भूमि पर रपट निर्माण 4,99,000इन कार्यों का कोई व्यावहारिक औचित्य नहीं पाया गया।गारंटी पीरियड में टूट गई सड़क, फिर भी लौटा दी एसडी राशिरायपुर पीथापुरा मार्ग पर प्रतापराम कोली के कुएं के पास बनी सीसी सड़क गारंटी अवधि में ही टूट गई, लेकिन पंचायत ने समय से पहले ही सुरक्षा जमा राशि एसडी ठेकेदार को लौटा दी। इस कार्य पर 19,29,568 खर्च हुए।जांच समिति की सिफारिशेंकमेटी ने इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता मानते हुए तत्कालीन वीडीओ फाउलाल सुथार, संबंधित तकनीकी अधिकारियों पर सीसीए नियमों के तहत कार्रवाई, तथा तत्कालीन सरपंच प्रशासक छगनलाल कोली पर पंचायती राज अधिनियम के तहत कार्रवाई की अनुशंसा की है। वैसे तो जांच में लाखों रुपये की वित्तीय अनियमितता उजागर हुई थी. ऐसे में स्वाभाविक तौर पर ज़िला परिषद स्तर पर तत्काल कार्रवाई, शक्तियों का निलंबन और रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजे जाने की प्रक्रिया होनी चाहिए थी।
रिपोर्ट – रमेश माली
