
रानीवाड़ा (Raniwada) के मोखातरा गांव में स्थित प्राचीन दुधेश्वर महादेव मंदिर के परम श्रद्धेय संत कस्तूरदास महाराज के देवलोकगमन पर पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। संत कस्तूरदास महाराज के निधन के वाद उनकी बैकुंठी यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े। गांव के हर गली-मोहल्ले से होकर निकली बैकुंठी के दौरान लोगों ने नम आंखों से संत के अंतिम दर्शन किए और श्रद्धासुमन अर्पित किए। बैकुंठी यात्रा दुधेश्वर महादेव मंदिर परिसर से विधिवत वैदिक मंत्रोच्चार एवं धार्मिक परंपराओं के साथ प्रारंभ हुई। यात्रा के दौरान “राम नाम सत्य है” और “संत कस्तूरदास महाराज अमर रहें” जैसे जयघोष गूंजते रहे। श्रद्धालु हाथों में पुष्प लिए बैकुंठी के आगे-आगे चलते नजर आए। महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं सहित बच्चों ने भी संत के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। संत कस्तूरदास महाराज का जीवन सादगी, तप, त्याग और भक्ति का प्रतीक रहा। उन्होंने अपने जीवनकाल में समाज को सदाचार, सेवा और ईश्वर भक्ति का मार्ग दिखाया। दुधेश्वर महादेव मंदिर को धार्मिक चेतना का केंद्र बनाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। संत के सान्निध्य में अनेक धार्मिक अनुष्ठान, सत्संग और सेवा कार्य संपन्न होते रहे, जिससे गांव सहित आसपास के क्षेत्रों में आध्यात्मिक वातावरण बना रहा। बैकुंठी यात्रा जिन गली-मोहल्लों से होकर गुजरी, वहां ग्रामीणों ने पुष्प वर्षा कर संत को अंतिम विदाई दी। कई स्थानों पर श्रद्धालुओं द्वारा दीप प्रज्वलन कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। ग्रामीणों का कहना था कि संत कस्तूरदास महाराज केवल एक संत ही नहीं, बल्कि पूरे गांव के मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत थे। इस अवसर पर विभिन्न सामाजिक, धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि, संत-महात्मा एवं क्षेत्र के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने संत के देवलोकगमन को अपूरणीय क्षति बताते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। बैकुंठी यात्रा के समापन के बाद धार्मिक विधियों के अनुसार अंतिम संस्कार की प्रक्रिया संपन्न की गई। संत कस्तूरदास महाराज का देवलोकगमन मौखातरा गांव के लिए एक युग के अंत जैसा है, लेकिन उनके उपदेश और सेवा कार्य सदैव श्रद्धालुओं के हृदय में जीवित रहेंगे।
रिपोर्ट – मुकेश लाखारा
