राजसमन्द (Rajsamand) कृषि कार्यो में अपने नवाचारों से देशभर में खास पहचान बनाने वाले समीपवर्ती भगवान्दा कला गांव के नवोन्मेषी किसान इनोवेटिव फार्मर भंवर लाल कुमावत ने भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली की ओर स राजधानी में राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित नवोन्मेषी किसान कॉनक्लेव-2025 में भागीदारी कर अपनी नवोन्मेषी कृषि पद्धति, स्वदेशी तकनीक एवं सफल कृषि कार्य से जुड़े अपने अनुभव साझा किए वहीं सफलता के गुर बताए तथा देशभर से आए कृषक-वैज्ञानिकों से खेती मेंनवाचारों का आदान-प्रदान किया।किसान दिवस के उपलक्ष्य में हुए दो दिवसीय सम्मेलन में देश के 25 राज्यों के 252 नवोन्मेषी किसानों के साथ कृषि वैज्ञानिकों ने भागीदारी की। किसान-वैज्ञानिक सहभागिता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से हुए कॉनक्लेव में आए किसानों ने अपनी नवोन्मेषी कृषि पद्धतियों, स्वदेशी तकनीक एवं सफल कृषि कार्यो पर आधारित मॉडल भी प्रदर्शित किए। इस दौरान मुख्य रूप से जलवायु परिवर्तन, मौसम की अनिश्चितता व बाजार से जुड़ी चुनौतियों पर नवोन्मेषी किसानों व वैज्ञानिकों ने विचार-मंथन किया। कार्यक्रम में राजसमन्द जिला मुख्यालय के समीपवर्ती भगवान्दा कला गांव निवासी नवोन्मेषी किसान भंवर लाल कुमावत ने अपनी ओर से सब्जी, फल एवं अन्य फसल उत्पादन में किए गए विभिन्न नवाचारों की जानकारी दी वहीं वर्ष 2015 में कृषि कार्यो में शुरू की गई अपनी नवाचार यात्रा से अवगत कराया। उन्होंने अपने यहां स्वयं की अपनाई गई नई कृषि पद्धति व तकनीक पर चर्चा करते हुए अनुभव व ज्ञान साझा किया एवं उपस्थित काश्तकारों को सफलता के गुर समझाए। उन्होंने अपने नवाचारों पर आधारित मॉडल भी प्रदर्शित किया।इस अवसर पर आइसीएआर के निदेशक डॉ. सी.एच. श्रीनिवाास राव, संयुक्त निदेशक प्रसार डॉ. रविन्द्र नाथ पंडारिया, केटेट प्रभारी अनिल कुमार सिंह आदि ने कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए भंवर लाल को शिल्ड व प्रमाण पत्र भेंट कर सम्मानित किया। कृषक भंवर लाल ने बताया कि सम्मेलन में किसानों, वैज्ञानिकों एवं इससे जुड़े शासकीय संस्थानों के सामूहिक प्रयासों से विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने के सन्दर्भ में प्रमुखता से विचार कर रूपरेखा तैयार करने का निर्णय किया गया तथा कहा गया कि यह विकसित भारत की दिशा में बेहद कारगर सिद्ध होगा। सम्मेलन में उक्त नवोन्मेषी किसानों की रचनात्मकता, जिजीविषा एवं व्यावहारिक ज्ञान की सराहना की गई। उल्लेखनीय है कि कृषक भंवर लाल कुमावत ने वर्ष 2015 में अपने यहां कृषि कार्यो में नवाचार अपनाते हुए पहली बार स्वयं की तैयार पद्धति व तकनीक का प्रयोग किया था जो सफल रहा तथा इसके लिए वर्ष 2016 में उन्हें नई दिल्ली में इनोवेटिव फार्मर अवार्ड से सम्मानित किया गया था। इसी क्रम में नवोन्मेषी कृषि प्रौद्योगिकी अपनाने एवं अपने आसपास काश्तकारों में इसके प्रचार-प्रसार में उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए वर्ष 2021 में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान की ओर से अध्येता पुरस्कार से नवाजा गया। बता दें कि राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से कृषि महाविद्यालयों से विद्यार्थी नवाचारों कर अपनाई जा रही नवीन कृषि पद्धति, प्रौद्योगिकी व स्वदेशी तकनीक के प्रायोगिक अध्ययन के लिए कृषक भंवर लाल के खेत पर आते है तथा यह क्रम अक्सर चलता रहता है।
रिपोर्ट – नरेंद्र सिंह खंगारोत
