राजसमन्द (Rajsamand) गौरक्षक गौशाला संस्थान की ओर से जिला मुख्यालय पर गुड़ा-सनवाड़ स्थित गौशाला में चल रही नानीबाई रो मायरो कथा के तीसरे दिन मंगलवार को अनन्य प्रभु भक्त नरसी मेहता की दीन-हीन दशा से जुड़े मार्मिक प्रसंगों पर उपस्थित श्रद्धालु भाव-विह्ल हो गए वहीं सच्चे भक्त के प्रति भगवान की करूणा का बखान सुनकर भक्ति भाव से सराबोर हो गए। हरिनाम सेवा ट्रस्ट भीलवाड़ा से आए भगवती कृष्ण महाराज ने राधा स्तुति एवं गोविंदा गोविंदा वैंकटरमण तिरुमल वासी गोविंदा…संकीर्तन के साथ कथा शुरू की। उन्होंने नानीबाई के यहां से विवाह की पत्रिका आने के बाद सगा रो कागद आया रे… स्वर के साथ नरसी भगत के भाव का वर्णन करते हुए कहा कि मायरा भरने के बारे में विचार कर नरसी गहरी चिंता में डूब गए। विचार आने लगे कि मायरा कैसे होगा, कैसे सब इंतजाम होगा। तभी नरसी ने अपने आराध्य का सुमिरण किया और नरसी की करुण पुकार सुनी तो स्वयं भगवान द्रवित हो गए। प्रभु ने देखा कि उनका भक्त कितना दुखी है लेकिन कहने लगे कि नरसी तू क्यों चिंता करता है। इसी क्रम में महाराज ने मायरे के लिए नरसी के अपने कुटुम्ब व बंधु-बांधवों से सहायता मांगने के लिए जाने एवं नरसी की कमजोर हालत देख कहीं से भी मदद नहीं मिलने के प्रसंग का भी सजीव चित्रण किया एवं अंत में नरसी द्वारा प्रभु को पुकारने के प्रसंग पर एक आस तुम्हारी है विश्वास तुम्हारा है… भजन प्रस्तुत किया। उक्त मार्मिक प्रसंगों पर उपस्थित श्रऋालु भाव-विह्ल हो गए तथा भावुक हुए कई लोगों के नेत्र छलक आए। उन्होंने कहा कि सच्चा प्रेम एवं निश्छल भक्ति हो तो भगवान भक्त के अधीन हो जाते है। कथा प्रवाह में अन्य प्रसंग भी सुनाए। साथ ही गौसेवा को बेहद पुण्यदायी एवं हरिसेवा बताते हुए उन्होंने कहा कि हमें ह्दय में गौसेवा का भाव जगाना होगा। गाय सिर्फ प्राणी नहीं बल्कि हमारा प्राण है। साक्षात देव स्वरूपा है। गौमाता की सेवा करने के लिए स्वयं श्रीहरि कृष्ण रूप में पृथ्वी पर आए।इधर, कथा के दौरान गौसेवार्थ तुलादान का क्रम लगातार जारी रहा जहां धर्मप्रेमियों ने गौमाताओं के लिए गुड़, दलिया, तेल, घी आदि सामग्री भेंट कर धर्मलाभ लिया वहीं श्रद्धालुओं में अर्थ सहयोग को लेकर भी उत्साह रहा। गौसेवार्थ सहयोग देने वाले लोगों का महाराज के सान्निध्य में सम्मान भी किया गया। यहां आए धर्मप्रेमियों ने कथा पाण्डाल के द्वार पर गौमाता की प्रदक्षिणा भी की। कार्यक्रम के प्रारम्भ में गौशाला संस्थान सदस्यों ने व्यासपीठ पूजन कर आरती की वहीं महाराज का स्वागत किया। गौरक्षक गौशाला संस्थान अध्यक्ष शम्भूलाल कुमावत ने बताया कि चार दिवसीय महोत्सव के अंतिम दिन बुधवार को सर्वत्र कल्याण की कामना को लेकर सुरभि महायज्ञ होगा जो सुबह नौ बजे शुरू होकर दोपहर 12 बजे तक चलेगा। दोपहर एक बजे से कथा होगी तथाा इस दौरान नवनिर्मित परिसर का लोकार्पण भी होगा। शाम को महाप्रसादी होगी। उन्होंने बताया कि गौसेवा, धर्म व संस्कृति के प्रति जन जागरण के उददेश्य से यह जायोजन किया गया है।
रिपोर्ट – नरेंद्र सिंह खंगारोत
