
जैसलमेर (Jaisalmer) स्वर्ण नगरी के हृदय स्थल हनुमान सर्किल पर स्थित ऐतिहासिक ‘बादल विलास’ अब विज्ञापनों की भेंट चढ़ गया है। शहर की एक निजी विज्ञापन कंपनी द्वारा महल के ठीक सामने विशालकाय होर्डिंग लगा देने से सदियों पुरानी इस ऐतिहासिक विरासत का दीदार अब मुश्किल हो गया है। प्रशासन की नाक के नीचे हुए इस अतिक्रमण नुमा विज्ञापन से देशी-विदेशी सैलानियों के साथ-साथ स्थानीय गाइडों और निवासियों में भी गहरा आक्रोश है।खूबसूरती पर लगा ‘ग्रहण’:सोनार दुर्ग के बाद बादल विलास जैसलमेर की सबसे ऊंची और दर्शनीय इमारतों में से एक है। हनुमान सर्किल के पास स्थित होने के कारण यहाँ से हर साल लाखों पर्यटक इस भव्य महल को अपने कैमरों में कैद करते थे। लेकिन अब होर्डिंग के कारण फोटो लेना तो दूर, महल का मुख्य भाग भी नजर नहीं आ रहा है। पर्यटकों का कहना है कि वे दूर-दूर से पत्थर पर तराशी गई जैसलमेर की इस नक्काशी को देखने आते हैं, लेकिन प्रशासन की लापरवाही के कारण अब उन्हें केवल लोहे के विज्ञापन बोर्ड ही दिखाई दे रहे हैं।कुंभकर्णी नींद में प्रशासन:हैरानी की बात यह है कि शहर के सबसे व्यस्त चौराहे पर ऐतिहासिक दृश्य को बाधित करने वाला यह होर्डिंग रातों-रात खड़ा हो गया, लेकिन जिला प्रशासन और नगर परिषद ने इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन कुंभकर्णी नींद सो रहा है और चंद रुपयों के राजस्व के चक्कर में शहर की ऐतिहासिक पहचान को धूमिल होने दिया जा रहा है।पर्यटन व्यवसाय पर असर:गाइडों का कहना है कि यह स्थान ‘फोटो पॉइंट’ के रूप में मशहूर था। सैलानी यहाँ रुककर बादल विलास के साथ अपनी यादें संजोते थे। विज्ञापन बोर्ड लग जाने से अब पर्यटकों ने यहाँ रुकना कम कर दिया है, जिससे आसपास के छोटे व्यापारियों पर भी असर पड़ रहा है।अब देखना यह है कि क्या प्रशासन इस पर संज्ञान लेकर होर्डिंग को हटवाता है या जैसलमेर की ऐतिहासिक विरासत इसी तरह विज्ञापनों के पीछे दफन होती रहेगी।
रिपोर्ट – कपिल डांगरा
