जैसलमेर (Jaisalmer) राजस्थान के रेतीले धोरों और आसमान में वायुसेना के अब तक के सबसे बड़े युद्धाभ्यास में से एक वायुशक्ति-2026 शक्ति-2026 का आयोजन फरवरी में होने जा रहा है। इस मेगा ड्रिल में 125 से ज्यादा फाइटर एक साथ दुश्मन के ठिकानों को नेस्तनाबूद करने का अभ्यास करेंगे।वायुसेना के इस शक्ति प्रदर्शन का आगाज 12 फरवरी से होगा। अभ्यास का मुख्य और अंतिम चरण 26 फरवरी को पोकरण फायरिंग रेंज में आयोजित किया जाएगा।इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथसिंह के आने की भी संभावना है। कार्यक्रम की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 24 फरवरी को इसकी फुल ड्रेस रिहर्सल की जाएगी, जिसमें वास्तविक युद्ध जैसे हालात पैदा कर वायुसेना की मारक क्षमता को परखा जाएगा।इस युद्धाभ्यास का मुख्य आकर्षण वायुसेना के फ्रंटलाइन फाइटर जेट राफेल और सुखोई-30 एमकेआई होंगे। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जिस तरह राफेल की स्कैल्प मिसाइलों ने दुश्मन के रडार को छकाते हुए उनके डिपो और ठिकानों को तबाह किया था, उसी रणनीति का अभ्यास यहां फिर से दोहराया जाएगा। दुनिया की सबसे घातक हवा से हवा में मार करने वाली ‘मिटिओर’ मिसाइल की क्षमताओं का भी प्रदर्शन किया जाएगा। इस अभ्यास का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भारतीय वायुसेना दो मोर्चो पर एक साथ युद्ध लड़ने के लिए पूरी तरह सक्षम है। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण यह अभ्यास केवल एक स्थान तक सीमित नहीं रहेगा। राजस्थान के 8 प्रमुख एयरबेस जोधपुर, फलोदी, जैसलमेर, उत्तरलाई, नाल, सूरतगढ़, बाड़मेर समेत आगरा, हिंडन और अंबाला से भी विमान उड़ान भरेंगे। राफेल, सुखोई-30 एमकेआई, मिराज 2000, जगुआर, मिग-29 के साथ ही हेलीकॉप्टर में अपाचे व चिनूक भी अपना प्रदर्शन करेंगे।जैसलमेर की पोकरण फायरिंग रेंज एक बार फिर भारत की सैन्य शक्ति की गवाह बनेगी। वायुसेना के अधिकारी इस अभ्यास को इंटीग्रेटेड एयर ऑपरेशन के रूप में देख रहे हैं। जहां फाइटर जेट्स को आर्मी और अन्य सहयोगी विंग्स के साथ तालमेल बिठाकर मिशन को अंजाम देना होगा। जब रेगिस्तान के आसमान में एक साथ दर्जनों सुपरसोनिक विमान अपनी गर्जना करेंगे, तो यह न केवल दुश्मन के लिए चेतावनी होगी, बल्कि भारत की ग्लोबल एयर पावर की बढ़ती साख का प्रतीक भी होगा।
रिपोर्ट – कपिल डांगरा
