
भीलवाड़ा (Bhilwara) संत निरंकारी मंडल भीलवाड़ा द्वारा मानव कल्याण यात्रा के तहत मंडपिया में विशाल संत समागम को दिल्ली से पधारे ब्रह्म ज्ञानी संत दलबीर सिंह ने सैकड़ो श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि आत्मा व्यक्तिगत चेतना और परमात्मा परम चेतना ईश्वर दर्शन की एक सत्ता के दो पहलू है आत्मा परमात्मा का अंश है जो शरीर धारण करती है और जन्म मृत्यु के चक्र में बनती है जबकि परमात्मा सर्वव्यापी है अविनाशी और सभी जीवो की मूल चेतना है। जिसका लक्ष्य आत्मा का अज्ञानता के अवतरण से मुक्त होकर अपने वास्तविक स्वरूप परमात्मा में विलीन होना है। संत ने कहा कि परमात्मा को पाने के लिए फूल के मसलने में देरी हो सकती है परंतु परमात्मा को पानें में नहीं परमात्मा हर समय अंग-संग रहता है यह कभी अजन्मा नहीं है। जो सद्गुरु की शरण में आ जाता है उसका लोक-सुखी और परलोक सुहेला हो जाता है। राम-राम रटने से राम नहीं मिल सकता उसके लिए सद्गुरु की सद्गुरु में जाना पड़ेगा। मीरा ने भी सद्गुरु की शरण में आकर परमात्मा को पाया है। मानव जीवन में आने पर परम सत्य की जानकारी आवश्यक है चौरासी लाख योनियों से छुटकारा पाना ही मानव का परम लक्ष्य होना चाहिए। राम का नाम लेने से पहले इस रमे राम को पहचान आवश्यक है आज समय के सद्गुरु माता सुदीक्षा महाराज इस परमपिता परमात्मा का दीदार करके लोक सुखी परलोक सुहेला कर रहे हैं। मीडिया प्रभारी लादूलाल ने बताया कि संत समागम में भीलवाड़ा सहित चित्तौड़गढ़, मांडलगढ़, शाहपुरा, आसींद, रायला, गंगापुर आदि क्षेत्रों के भक्तों ने गीत विचार एवं कवि रूप में अपने विचार रखें। समागम के मध्य मंडपिया के जमनालाल, सुखदेव एवं परिवार जनों ने दिल्ली से पधारे संत का दुपट्टा पहनाकर स्वागत एवं अभिनंदन किया।
रिपोर्ट – पंकज पोरवाल
