Barmer : अरावली संरक्षण पर ग्रीनमैन नरपतसिंह की आपत्ति, राष्ट्रपति को रक्त से लिखा ज्ञापन सौंपा

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बाड़मेर (Barmer) अरावली पर्वतमाला को केवल 100 मीटर ऊँचाई के मानदंड तक सीमित करने के प्रस्ताव को लेकर पर्यावरणविद् एवं गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर ग्रीनमैन नरपतसिंह ने गहरी आपत्ति जताई है। उन्होंने इस संबंध में माननीय राष्ट्रपति महोदया के नाम प्रतीकात्मक रूप से अपने रक्त से लिखा हुआ ज्ञापन जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट बाड़मेर के माध्यम से प्रस्तुत किया।ग्रीनमैन नरपतसिंह ने कहा कि अरावली पर्वतमाला केवल ऊँचाई का विषय नहीं, बल्कि एक सतत, जीवंत और अविभाज्य पारिस्थितिक प्रणाली है। इसमें वन क्षेत्र, जलागम क्षेत्र, नदियों के उद्गम स्थल, भू-जल पुनर्भरण क्षेत्र, वन्यजीव गलियारे और करोड़ों लोगों की आजीविका प्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हुई है। केवल ऊँचाई के आधार पर अरावली की परिभाषा तय करना इसके अस्तित्व और राजस्थान के पर्यावरणीय भविष्य के लिए घातक सिद्ध हो सकता है।उन्होंने चेताया कि यदि 100 मीटर से कम ऊँचाई वाले क्षेत्रों को अरावली की परिभाषा से बाहर किया गया, तो इसका सबसे गंभीर प्रभाव राजस्थान पर पड़ेगा। इससे मरुस्थलीकरण की गति तेज होगी, भू-जल स्तर गिरेगा, कुएँ-बावड़ियाँ व नदियाँ सूखेंगी, हीट वेव की तीव्रता बढ़ेगी और वन्यजीवों का आवास नष्ट होकर मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ेगा।ग्रीनमैन नरपतसिंह के अनुसार, इसका सीधा असर किसानों, पशुपालकों, ग्रामीण व आदिवासी समुदायों और आने वाली पीढ़ियों पर पड़ेगा। खेती, पशुपालन और पेयजल पर निर्भर लाखों परिवारों की आजीविका संकट में आ जाएगी।उन्होंने यह भी स्मरण कराया कि वर्ष 2002 में सर्वोच्च न्यायालय ने अरावली की रक्षा के लिए खनन पर प्रतिबंध लगाया था। ऊँचाई आधारित सीमांकन उस न्यायिक भावना के भी विपरीत है।पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दर्शाते हुए ग्रीनमैन नरपतसिंह ने बताया कि वे अपने निजी संसाधनों से “अरावली बचाओ” जन-जागरूकता अभियान के तहत 20 दिवसीय बाइक यात्रा कर रहे हैं। इस यात्रा के माध्यम से वे अरावली क्षेत्र के जिलों में आमजन, युवाओं और प्रशासन को जागरूक कर रहे हैं कि अरावली का कटना केवल पहाड़ों का नहीं, बल्कि राजस्थान के जीवन-तंत्र का कटना है।ज्ञापन में उन्होंने प्रमुख रूप से मांग की है कि• अरावली को 100 मीटर ऊँचाई तक सीमित करने के प्रस्ताव पर पुनर्विचार किया जाए।• अरावली को एक सतत एवं अविभाज्य पारिस्थितिक प्रणाली के रूप में कानूनी मान्यता दी जाए।• अरावली क्षेत्र में खनन व भूमि परिवर्तन पर कठोर नियंत्रण लागू किया जाए।• केंद्र व राज्य सरकारें संरक्षण-प्रधान स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करें।ग्रीनमैन नरपतसिंह ने विश्वास व्यक्त किया कि माननीय राष्ट्रपति महोदया के मार्गदर्शन में देश की इस प्राचीन और अमूल्य प्राकृतिक धरोहर को बचाने हेतु समय रहते प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।

रिपोर्ट – ठाकराराम मेघवाल

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