जेएलएफ में Barmer के लोक कलाकारों का जलवा, भुट्टे खान की गायकी पर झूमे श्रोता

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Barmer

बाड़मेर (Barmer) जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2026 में बाड़मेर के लोक कलाकार भुट्टे खान और उनकी टीम ने अपनी मंत्रमुग्ध करने वाली प्रस्तुति से समा बांध दिया। थार के रेगिस्तान की सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत करते हुए उन्होंने राजस्थानी लोक संगीत और सूफियाना रंगों से साहित्य प्रेमियों का दिल जीत लिया। देश-विदेश से आए श्रोता स्वर लहरियों पर झूम उठे और मंच के सामने थिरकते नजर आए।*जेएलएफ में राजस्थानी संस्कृति की महक*वेदांता द्वारा प्रस्तुत जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (15 से 19 जनवरी 2026) का यह 19वां संस्करण होटल क्लार्क्स आमेर में आयोजित हुआ, जहां साहित्यिक विमर्श के साथ-साथ लोक कला, संगीत और परंपरागत प्रस्तुतियां भी खास आकर्षण बनी रहीं। फेस्टिवल के दौरान बाड़मेर के मांगणियार समुदाय के प्रसिद्ध लोक गायक भुट्टे खान और उनकी टीम ने फ्रंट लॉन सहित विभिन्न मंचों पर अपनी सजीव प्रस्तुतियों से माहौल को संगीतमय कर दिया।भुट्टे खान, जो बाड़मेर की पारंपरिक मांगणियार संगीत परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं, ने हारमोनियम, मोरचंग, खरताल और अन्य लोक वाद्यों के साथ सूफी और लोक गीतों की ऐसी प्रभावशाली प्रस्तुति दी कि श्रोता खुद को थार की रेत में महसूस करने लगे। उनके गीतों में प्रेम, विरह, लोक आस्था और आध्यात्मिकता की गहरी झलक साफ नजर आई।*श्रोताओं पर जादू सा असर*देशी-विदेशी साहित्य प्रेमी, लेखक, पर्यटक और जयपुरवासी—सभी भुट्टे खान की टीम की प्रस्तुति में खो गए। बाड़मेर के कलाकारों की जीवंत गायकी और ताल ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।जहां एक ओर फेस्टिवल में अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार विजेता लेखकों और विचारकों के संवाद चल रहे थे, वहीं दूसरी ओर भुट्टे खान और उनकी टीम ने यह साबित कर दिया कि साहित्य केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं, बल्कि लोक संगीत और कला के माध्यम से भी समाज की आत्मा को अभिव्यक्त करता है। कई श्रोताओं ने कहा कि राजस्थानी लोक संगीत की यह प्रस्तुति साहित्यिक चर्चाओं के बीच एक सुकून भरी सांस्कृतिक यात्रा जैसी लगी।*बाड़मेर की लोक कला को मिल रहा नया मंच*लोक गायक भुट्टे खान ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल जैसे मंच लोक कलाओं को जीवंत बनाए रखने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बाड़मेर के मांगणियार और लांगा समुदाय की सदियों पुरानी यह संगीत परंपरा आज वैश्विक पहचान बना रही है।उन्होंने बाड़मेर क्षेत्र में लोक कलाकारों को मिल रहे प्रोत्साहन का जिक्र करते हुए कहा कि केयर्न वेदांता जैसी संस्थाओं द्वारा स्थानीय संस्कृति, कलाकारों और पारंपरिक कलाओं को सहयोग मिलना लोक विरासत के संरक्षण में अहम भूमिका निभा रहा है, जिससे कलाकारों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचने का अवसर मिल रहा है।*फेस्टिवल में राजस्थानी तड़का*इस साल जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में राजस्थानी संस्कृति का खासा बोलबाला देखने को मिला। विशाल कठपुतलियां, ऊंटों की सजीव प्रस्तुतियां, लोक वाद्य यंत्रों की गूंज और ब्लॉक प्रिंटिंग से सजी प्रदर्शनियों ने पूरे परिसर को थार की सौंधी माटी से महका दिया। भुट्टे खान एंड टीम की प्रस्तुति इसी सांस्कृतिक श्रृंखला का एक चमकता सितारा साबित हुई, जिसने साहित्य और संगीत के संगम को और यादगार बना दिया।कलाकारों का कहना है कि यह प्रस्तुति न केवल बाड़मेर की सांस्कृतिक धरोहर का उत्सव थी, बल्कि राजस्थान की लोक कलाओं को वैश्विक मंच पर स्थापित करने की दिशा में एक मजबूत कदम भी साबित हुई।

रिपोर्ट – ठाकराराम मेघवाल

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