
बाड़मेर (Barmer) राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संचार को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से आज जिले में मोबाइल एकेडमी एवं किलकारी कार्यक्रम पर जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ विष्णुराम विश्नोई की अध्यक्षता में किया गया। गर्भवती व प्रसूता महिलाओं को गर्भकाल के दौरान व बाद में सावधानी एवं अन्य जानकारियों से अपडेट होने के लिए किसी किताब या इंटरनेट का सहारा नहीं लेना पड़ रहा है, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग गर्भवती महिलाओं व नवजात शिशुओं के लिए मोबाइल सेवा ‘किलकारी’ के जरिए वॉयस मैसेज भेज रहा है। मोबाइल सेवा ‘किलकारी एवं मोबाइल एकेडमी की जागरूकता हेतु बुधवार को जिला स्तर पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस दौरान जिला स्तर से सीएमएचओ डॉ विष्णुराम विश्नोई, आरसीएचओ डॉ बांकाराम, डीपीएम सचिन भार्गव, डीपीसी राकेश भाटी, यूपीएम मूलशंकर दवे, तथा अरमान संस्था से कार्यक्रम अधिकारी अंशुल शर्मा उपस्थित रहकर आवश्यक जानकारी दी । कार्यशाला में खंड स्तर से सभी बीसीएमओ, बीपीएम, बीएचएस, सेक्टर हेल्थ सुपरवाईजर, तथा डेटा एंट्री ऑपरेटर द्वारा भाग लिया गया ! सीएमएचओ डॉ. विष्णुराम विश्नोई ने बताया कि पीसीटीएस में पंजीकृत जिले की महिलाओं को ये वॉयस मैसेज प्राप्त भी हो रहे हैं। इसके साथ ही मोबाइल एकेडमी के जरिए आशा सहयोगिनियों को कोर्स करवाया जा रहा है, कोर्स पूर्ण करने पर विभाग ने इन्हें सर्टिफिकेट भी दिया है।आरसीएचओ डॉ बांकाराम ने बताया कि विभाग की ओर से गर्भवती व प्रसूता महिला को नियमित स्वास्थ्य संदेश देने के लिए किलकारी सेवा प्रारंभ की गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से शुरु की गई इस किलकारी सेवा से महिलाएं लाभान्वित हो रही हैं।अंशुल शर्मा कार्यक्रम अधिकारी ने प्रशिक्षण के दौरान बताया कि वॉयस मैसेज सेवा के जरिए जिले की गर्भवती व नवजात शिशुओं की स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित वॉयस मैसेज भेजे जा रहे हैं। किलकारी वॉयस मैसेज पीसीटीएस सॉफ्टवेयर पर दर्ज लाभार्थी महिला के मोबाइल नंबर पर गर्भकाल के चौथे माह से प्रत्येक सप्ताह एक वॉयस मैसेज प्राप्त हो रहा है। इसी तरह शिशु की आयु एक वर्ष होने तक यानी गर्भकाल के बाद से लाभार्थी को 72 मैसेज भेजे जा रहे हैं। ये मैसेज प्रसव काल, एएनसी, एचबीएनसी, परिवार कल्याण एवं शिशु के पूर्ण टीकाकरण किए जाने के संबंध में होते हैं। इसी तरह मोबाइल एकेडमी कोर्स के जरिए आशाओं को लाभान्वित किया जा रहा है। आशा प्रभारी राकेश भाटी ने बताया कि जिले की अनेक आशा सहयोगिनियों ने यह कोर्स किया है, जिस पर करीब 1000 आशा सहयोगिनियों को सर्टिफिकेट दिया जा चुका है। वंचित आशाओं के लिए जल्द ही राज्यस्तर से सर्टिफिकेट प्राप्त होंगे।जिला कार्यक्रम समन्वयक राकेश भाटी ने बताया कि कार्यशाला में आशा कार्यक्रम, एनसीडी (गैर-संचारी रोग), आभा आईडी, वीएचएसएनसी (ग्रामीण स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण समिति) तथा परिवार कल्याण कार्यक्रम के क्रियान्वयन एवं प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई।कार्यशाला में आशाओं के भुगतान, पोर्टल अपडेट, मोबिलाइज़ेशन कार्य, स्वास्थ्य अभियानों में सहभागिता तथा उच्च जोखिम गर्भावस्था की समयबद्ध रेफरल प्रणाली पर विश्लेषण किया गया। अधिकारियों ने आशा कार्यकर्ताओं को क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण व समयबद्ध सेवाएँ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जिले में हाइपरटेंशन, मधुमेह, स्तन कैंसर, सर्वाइकल कैंसर एवं ओरल कैंसर की स्क्रीनिंग की स्थिति पर विस्तृत चर्चा की गई । एचडब्ल्यूसी (हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर) स्तर पर डाटा एंट्री, पोर्टल अपडेट, कमियों एवं उपलब्धियों की समीक्षा की गई।गांव स्तर पर जागरूकता गतिविधियों, जोखिम कारकों की पहचान और रेफरल अनुपात बढ़ाने हेतु रणनीतियाँ साझा की गईं। स्क्रीनिंग में तेजी लाने, फॉलोअप को मजबूत करने एवं दवा उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।अधिकारियों ने सभी कार्यक्रमों के कार्यान्वयन में पारदर्शिता, पोर्टल अपडेट की समयबद्धता, लाभार्थियों तक सेवाओं की सहज उपलब्धता तथा फील्ड में समन्वय मजबूत करने के निर्देश दिए।साथ ही, ब्लॉक टीमों को नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित कर प्रगति रिपोर्ट जिला स्तर पर प्रस्तुत करने को कहा गया।
रिपोर्ट – ठाकराराम मेघवाल
