
राजसमंद (Rajsamand) फियावड़ी में श्रीमद् भागवत कथा का पांचवां दिनराजसमंद. श्रीधाम वृंदावन के भागवत प्रवक्ता देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि भगवान पृथ्वी पर माखन खाने या बंसी बजाने नहीं आए थे, बल्कि धर्म की रक्षा के लिए और मानवों को धर्म के रास्ते पर चलाने के लिए आए थे। वे फियावड़ी में मंगरी श्याम भैरवनाथ प्रतिष्ठा महोत्सव के तहत आयोजित भागवत कथा महोत्सव के पांचवें दिन श्रद्धालुओं को उद्बोधन दे रहे थे।ज्ञउन्होंने कहा कि नेता को धार्मिक होना चाहिए और संसद में काम से कम 50-60 धर्माचार्य होने चाहिए, जो धर्म अधर्म और हित-अनहित की विवेचना कर सके।उन्होंने कहा कि रामायण को जानने वाले नेता अगर मंत्री बनेंगे प्रधानमंत्री बनेंगे और राष्ट्रपति बनेंगे तो बताइए घोटाले होंगे झूठे वादे होंगे। ऐसा होने पर देश में कभी गलत कानून बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि हमारे घरों को बर्बाद करने के लिए और भारत के नौजवानों को चरित्रहीन बनाने के लिए खराब करने के लिए लीव इन जैसा कानून लाया जाता है, लेकिन अगर संसद में धर्माचार्य बैठे हो तो ऐसे कानून नहीं लाए जा सकते। उन्होंने कहा कि हमें वही प्रयास करना चाहिए जिससे हमारे देश का युवा सही रास्ते पर जाए। उन्होंने कहा कि देश को बचाने और सही दिशा में ले जाने के लिए सबको संगठित होकर आगे आना होगा और सही दिशा धर्म के बिना हो ही नहीं सकती। उन्होंने कहा कि एपस्टिन फाइल में भी अंग्रेजी जानने वालों के ही नाम आए हैं किसी संस्कारी व्यक्ति का नाम नहीं आया। उन्होंने कहा कि आज सिर्फ अंग्रेजी जानने वाले को ही पढ़ा लिखा समझते हैं, लेकिन एक संस्कारी व्यक्ति भी पढ़ा लिखा हो सकता है। उन्होंने कहा कि आपके घर में अगर कोई उत्सव आए तो पहला निमंत्रण उसे देना, जो दुख के समय में तुम्हारे यहां बिना बुलाए गया हो। तुम्हारी खुशी में शामिल होने का अधिकार उसी को है जो तुम्हारे दुख में आकर तुम्हारे साथ खड़ा हो गया। उन्होंने कहा कि दुख में बिना बुलाए आ जाने वाला ही सच्चा मित्र है। उन्होंने शास्त्रों पर चर्चा करते हुए कहा कि शास्त्रों के अनुसार सुबह उठते ही स्नान करना चाहिए उसके बाद भजन करना चाहिए इसके बाद ही भोजन करना चाहिए। भोजन करने के बाद कभी भी स्नान नहीं करना चाहिए वहीं रात्रि के समय भी जब तक विशेष परिस्थिति ना हो स्नान नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा धर्म हमारे शरीर की सुरक्षा है क्योंकि अगर शरीर ही नहीं रहा तो फिर कुछ भी नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि जिसे आप चाहते हैं कि जीवन भर प्रेम का संबंध बना रहे उनसे पैसे का लेन-देन कभी नहीं करना चाहिए। लेकिन, अगर आप समर्थ्यवान हो तो उसकी ऐसी मदद कर दो कि वह कभी जीवन में वापस भी ना दे तो कोई फर्क ना पड़े। कथा के दौरान संत ने प्रसंग के अनुसार सुखी बसे संसार सब दुखिया कोई ना होए, हमने बज के ग्वाले से अपना दिल लगाया है, ईश्वर अंश जीव अविनाशी, अगर ब्रज की रज में ही यह मेरा तन विलीन हो जाए, कान्हा आया रे आया ब्रज में बाजे आज बधाई, आदि भजन पेश कर श्रद्धालुओं को भक्ति में भाव-विभोर कर दिया।
रिपोर्ट – नरेंद्र सिंह खंगारोत
