
राजसमंद (Rajsamand) कुंवारिया के गांव फियावड़ी में चल रहे 10 दिवसीय प्रतिष्ठा महोत्सव के तहत मंगरी पर स्थित श्री भैरवनाथ मंदिर में शुक्रवार को शुभ मुहूर्त में श्री भैरवनाथ, भगवान श्रीदेवनारायण शाहिद सभी मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा के दौरान पूरा वातावरण आध्यात्मिक हो गया। मुख्य यजमान कान्हा राजगुरु ने बताया कि महोत्सव के तहत आज सुबह प्रतिष्ठा से पूर्व हवन में आहुतियां लगाई गई तथा विभिन्न अनुष्ठान पूर्ण किए गए। इसके बाद शुभ मुहूर्त में दोपहर 12: 06 वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूर्ण श्रद्धा और धूमधाम के साथ मूर्तियों की प्रतिष्ठा की गई। इस दौरान जोरदार आतिशबाजी की गई तथा मंदिर और श्रद्धालुओं पर ड्रोन से पुष्प वर्षा की गई। वहीं, स्थापना के दौरान भेरुनाथ को बंदूकन से सलामी दी गई। इस दौरान कई भक्तों के शरीर में भैरुजी के पधारने से वातावरण एकदम से आध्यात्मिक हो गया। यज्ञ आचार्य राहुल महाराज सहित पंडितों के सानिध्य में राजगुरु परिवार के सदस्यों के साथ ही गांव के श्रद्धालुओं ने हवन की पूर्णाहुती की। वहीं, श्रद्धालुओं में डीजे पर भजनों की धुनों पर भेरुनाथ की प्रतिष्ठा की खुशी में देर तक भक्ति नृत्य किया।आयोजक कान्हा राजगुरु ने बताया कि इससे पूर्व गुरुवार रात को भी भजन संध्या का आयोजन किया गया। भजन संध्या की शुरुआत गायक पिंटू सेन ने मैं थाने सिंवरू गजानंद देवा, गणपति वंदना व गुरु वंदना आज तो आनंद भयो सतगुरु आया पावणा, प्रस्तुत करते हुए की। इसके बाद महावीर सांखला ने गुरु वंदना मारा सतगुरु दे ग्या ज्ञान हो जी, प्रस्तुत करते हुए भजनों की शुरुआत की। इसके बाद अगली रचना शक्ति स्वरूपा माता रानी को समर्पित करते हुए ए देवी मारी ए आडो खोल मुंडे परी बोल, खोल भ्रम रो तालो मारी मां, पेश कर भक्ति का वातावरण बना दिया। इसके बाद उन्होंने मंगरी श्याम भैरवनाथ का वंदन करते हुए मारा भेरु बाबा छम छम करता आवे, भजन पेश किया तो श्रद्धालु भेरू भक्ति में नृत्य करने लगे। इसके बाद उन्होंने तेजाजी के भजन तेजल मारो लीलन सिणगारियो, पर भी भक्तों को खूब नचाया। इसके बाद उन्होंने मैया आओ तो मनणे री बात करल्यां, भेरुनाथ का भजन भैरू लागे घणा फूटरा, बाबा रामदेव का भजन मने घोड़लियों मंगवाए मारी मां, भजनों पर भी श्रद्धालुओं को भक्ति नृत्य करवाया। इसके बाद प्रभु चारभुजा नाथ का भजन मारा चारभुजा रा नाथ भगत पर मेहर कर दे, हंसला रे उड़ जा उड़ जा हंसले वाली चाल, कार्यक्रम के समापन दौर में उन्होंने रण संग्राम भाया रे बिना सुनो, भजन सुनाया। कार्यक्रम का संचालन ओम महावर ने किया।ठाकुर जी ही हमारे सर्वस्व: देवी चित्रलेखादेवी चित्रलेखा ने कहा कि श्रीनाथजी की नगरी नाथन द्वारा को मिनी वृंदावन कहें तो गलत ना होगा। नाथद्वारा से आप दूर नहीं है आप भी बाल गोपाल की ब्रजभूमि में ही बैठे हैं। उन्होंने कहाकी प्रभु श्रीनाथजी के एक हाथ ऊपर एक हाथ नीचे, प्रभु के कई भाव हैं। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीनाथजी एक हाथ ऊपर कर कर ठीक उसी तरह दुनिया को इशारा कर रहे हैं,जिस तरह एक पिता अपने बालक को मेले में खो जाने पर बताता है कि देखो मैं यहां हूं। उन्होंने कहा कि श्रीनाथजी का एक हाथ पीछे है, जिसका मतलब है कि वह दुनिया से कह रहे हैं कि अगर कोई दुखी है तो वह उनके पीछे आकर खड़ा हो जाए वे सब संभाल लेंगे। इसमें उनका भाव अपने भक्त को बचाने का है और उसके दुश्मन को खबरदार करने का है। उन्होंने कहा कि ठाकुर जी हमारे माता-पिता ही नहीं, हमारे सर्वस्व हैं। उन्होंने कहा कि दास तो हम सब प्रभु श्री रघुनाथ के हैं, लेकिन प्रभु श्रीनाथजी के हम सभी सखा हैं। उन्होंने कहा कि हम कथा में बैठे हैं तो हमारे कान के माध्यम से कथा हमारे हृदय में जाती है, लेकिन उनके साथ ही साथ-साथ गोविंदा का भी हमारे हृदय में प्रवेश होता है। इस दौरान उन्होंने तुम हो काले में हूं गोरी तुम्हारा मेरा मेल न था प्यारे, जीवन तुम पर वार दिया है हमरी भी नैया संवारो, कृष्णा कृष्णा हरे हरे कृष्णा कृष्णा, भजन प्रस्तुत करते हुए श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया।
रिपोर्ट – नरेंद्र सिंह खंगारोत
