जैसलमेर (Jaisalmer) विश्व प्रसिद्ध मरु महोत्सव-2026 का भव्य आगाज गड़ीसर सरोवर से निकलने वाली भव्य शोभायात्रा के साथ हुआ। लोक संस्कृति के इस महाकुंभ में जहाँ लोक कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से समां बांधा, वहीं जैसलमेर की पारंपरिक वेशभूषा और विरासत के अनूठे रंग भी देखने को मिले।शोभायात्रा के दौरान स्थानीय निवासी अचलदास डांगरा विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। वे पूरी शोभायात्रा में एकमात्र ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने सदियों पुरानी पारंपरिक ‘जैसलमेरी बंदील’ (पगड़ी) धारण कर रखी थी। सुनहरे गोटे और किनारी वाली इस राजाशाही बंदील ने न केवल स्थानीय लोगों बल्कि सात समंदर पार से आए विदेशी मेहमानों का भी ध्यान अपनी ओर खींचा।फ्रांसीसी सैलानियों ने सराहा:शोभायात्रा में शामिल फ्रांस के पर्यटकों ने जब अचलदास डांगरा को इस दुर्लभ और ऐतिहासिक बंदील में देखा, तो वे अपनी उत्सुकता रोक नहीं पाए। सैलानियों ने अचलदास को बताया कि उन्होंने सोने के गोटे और किनारी वाली ऐसी कलात्मक बंदील पहली बार देखी है। राजाशाही ठाठ-बाठ को दर्शाती इस पगड़ी को देख विदेशी मेहमान काफी अभिभूत नजर आए और उन्होंने इस पल को यादगार बनाने के लिए उनके साथ जमकर फोटो खिंचवाए।अचलदास डांगरा ने बताया कि यह बंदील उनकी अनमोल विरासत है, जो जैसलमेर की समृद्ध संस्कृति और गौरवशाली इतिहास को जीवंत करती है। मरु महोत्सव के इस रंगारंग उत्सव में यह बंदील पारंपरिक शान और स्थानीय संस्कृति के संगम का प्रतीक बनकर उभरी।
रिपोर्ट – कपिल डांगरा
