
जैसलमेर (Jaisalmer) कला के क्षेत्र में अभिनव सृजन हेतु जैसलमेर में जी.एस. गोस्वामी आर्ट ऐकेडमी जैसलमेर की जे.एस.वी. (जनार्दन शशि व्यास) आर्ट गेलेरी का उद्घाटन माननीय से.नि. न्यायाधिपति मनोज के. व्यास एवं न्यायाधिपति बी.एन.भट्ट के कर कमलों से सम्पन्न हुआ। जैसलमेर के रामगढ़ रोड स्थित माणक नगर में आर्ट ऐकेडमी के भवन में स्व. जनार्दन व्यास पूर्व न्यायाधीश की स्मृति में जैसलमेर की प्रथम कला विथी में स्व. जनार्दन व्यास के जीवन वृत्त से संबंधित फोटो, कला प्रदर्शनी का भव्य उद्घाटन हुआ। इस अवसर पर पुणे, मुम्बई, जोधपुर, पाली, अहमदाबाद एवं दूरदराज से अनेक आगुंतकों के साथ ही जैसलमेर के कला प्रेमियों ने भी प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इनके साथ ही शशि व्यास की पेंटिग्स और नन्ही कलाकार पूर्वा गोस्वामी एवं रुद्रिका सुथार की भी बाल कृतियों को प्रदर्शित किया गया।न्यायाधिपति मनोज. के. व्यास ने जनार्दन व्यास के जीवन से संबंधित स्मृतियों के साथ ही उनके व्यक्तित्व की विशेषताओं को अभिव्यक्त किया। उन्होंने कला को शास्वत् मूल्यों का संवाहक बताते हुए कहा कि कला कालजयी और संस्कारों की संवाहक होती है। इसके सौम्य रुप को अभिव्यक्त करना सही मायने में कला की साधना होगी।इसी कड़ी में प्रमुख वक्ता न्यायाधिपति बी. एन. भट्ट ने भारतीय वांग्मय में कला के उत्त स्वरुप की व्याख्या करते हुए जैसलमेर में कला अकादमी और कला रेजीडेंसी की स्थापना को नवोदित कलाकारों का स्थापित कलाकारों का सेतु बताया। कार्यक्रम में डॉ. मनमोहन व्यास ने इस कला संस्थान को जैसलमेर के लिए एक विशेष उपलब्धि बताया।कार्यक्रम का प्रारंभ जैन विश्व भारती लाडनूं विश्वविद्यालय के विभागाध्यक्ष, राजस्थानी साहित्य विभाग प्रोफेसर लक्ष्मीकांत व्यास के द्वारा राजस्थानी भाषा में स्वागत संप्रेषण से हुआ। डॉ. घनश्याम गोस्वामी ने कला अकादमी के उद्देश्यों और लक्ष्यों की विस्तृत विवेचना की। ऐडवोकेट एन. के. बंसल ने अत्यन्त भावपूर्ण वाक्यों में जनार्दन व्यास को भावांजली प्रदान की। नेशनल इंश्योरेंस ऐकेडमी पुणे की प्रिंसिपल डॉ. कोमल सिंह ने भी अपने विचारो को अभिव्यक्त किया।इस भव्य कला आयोजन में नामचीन व्यक्तित्व डॉ. नीतल, टेक्स कंसल्टेंट, विश्वनाथ नावन्दर, एडवोकेट प्रो. श्रेयांस व्यास, इन्दिरा यूनिवरसिटी पुणे, प्रो. कृतिका व्यास, एन.आई.एस.एम. पनवेल मुम्बई, शशि व्यास, स्नेहलता नंवंदर, मंगला नवंदर, वीणा व्यास, डॉ. उमेश व्यास के साथ ही मोहनलाल पुरोहित, नवलकिशोर गोयल, जगन्नाथ गोस्वामी, गणपतनाथ, बृजपाल खत्री, आईदानसिंह सौलंकी, पर्यटन अधिकारी कमलेश्वर सौलंकी, राजेन्द्रसिंह भाटी, प्रमोद व्यास, अचलसिंह सौलंकी, सुभाष व्यास, हेमलता जैन, आशीष शारदा के साथ सैंकडों कला प्रेमी, शामिल हुए।
रिपोर्ट – कपिल डांगरा
