ऐक्टर: आमिर खान, वीर दास, मोना सिंह, मिथिला पालकर, शारिब हाशमी, सृष्टि तवाड़े
श्रेणी: कॉमेडी / स्पाई सटायर
डायरेक्टर: वीर दास, कवि शास्त्री
अवधि: 2 घंटे 6 मिनट
रेटिंग: ⭐⭐⭐☆☆ (3/5)
वीर दास और कवि शास्त्री की हैप्पी पटेल खतरनाक जासूस किसी धमाकेदार एक्शन सीन से नहीं, बल्कि एक दिलचस्प उलटबांसी से शुरू होती है। कहानी एक ऐसे लड़के की है, जो जासूसों के घर में पला-बढ़ा, लेकिन जिसके भीतर जासूसी का ‘खतरनाक’ जीन कभी आया ही नहीं। गोवा की एक हिंसक घटना से निकलकर फिल्म लंदन पहुंचती है, जहां ब्रिटिश एजेंट्स एक भारतीय बच्चे को गोद लेते हैं और उसका नाम रखते हैं—हैप्पी पटेल।
समय के साथ हैप्पी बड़ा होता है, लेकिन उसकी ज़िंदगी में एक बात कॉमन रहती है—नाकामी। वह लगातार सात साल तक MI-7 की परीक्षा में फेल होता है और खुद भी इस उलझन में रहता है कि आखिर उसकी असली पहचान है क्या। इसी बीच भारत से एक नया मिशन सामने आता है। गोवा में एक बेरहम लोकल डॉन ‘मामा’ (मोना सिंह) के चंगुल में फंसी एक विदेशी महिला को छुड़ाना है। पुराने ज़ख्मों और ट्रॉमा के चलते अनुभवी एजेंट्स इस मिशन से दूरी बना लेते हैं, लेकिन हैप्पी अपने भारतीय जड़ों की आवाज़ सुनता है और बिना किसी तजुर्बे के इस खतरनाक मिशन पर निकल पड़ता है। यहीं से शुरू होती है आत्म-खोज, पहचान और बेतहाशा हास्य से भरी एक अनोखी जर्नी।
फिल्म की खास बात यह है कि यह जासूसी को गंभीर चेहरा देने की कोशिश नहीं करती। यहां बंदूकों से ज़्यादा दमदार हैं संवाद और एक्शन से ज़्यादा असरदार हैं पंचलाइन। हैप्पी पटेल खतरनाक जासूस हंसाते-हंसाते यह सवाल भी उठा देती है कि क्या हीरो बनने के लिए खतरनाक होना ज़रूरी है, या फिर सादगी भी सुपरपावर हो सकती है?
परफॉर्मेंस:
अभिनय के मोर्चे पर फिल्म काफी मजबूत नज़र आती है। वीर दास पूरी फिल्म की जान हैं और उनका टूटी-फूटी, ‘स्वाद अनुसार’ हिंदी बोलता हैप्पी पटेल किरदार लगातार हंसाता भी है और भावुक भी करता है। आमिर खान सीमित स्क्रीन टाइम में गहरी छाप छोड़ते हैं और इस कदर किरदार में घुल जाते हैं कि स्टारडम पीछे छूट जाता है। मोना सिंह ‘मामा’ के रूप में चौंकाती हैं—उनका ठंडा और निर्दयी अंदाज़ हर सीन में तनाव पैदा करता है। मिथिला पालकर अपनी मासूम छवि से बाहर निकलकर सरप्राइज देती हैं, शारिब हाशमी हर एंट्री पर हंसी की गारंटी बनते हैं, वहीं सृष्टि तवाड़े कम समय में भी कहानी को मजबूती देती हैं।
वर्डिक्ट:
हैप्पी पटेल खतरनाक जासूस न तो पारंपरिक स्पाई थ्रिलर है और न ही साधारण कॉमेडी। यह एक स्मार्ट, व्यंग्यात्मक एंटरटेनर है जो ह्यूमर के ज़रिए पहचान, देश और हीरोइज़्म पर हल्की लेकिन असरदार चुटकी लेती है। संगीत थोड़ा फीका लगता है और क्लाइमैक्स और दमदार हो सकता था, लेकिन बेहतरीन लिखावट और मजबूत परफॉर्मेंस फिल्म को संभाल लेती हैं।
अगर आप भारी-भरकम एक्शन की बजाय दिमागदार हंसी और अलग सोच वाली फिल्म देखना चाहते हैं, तो हैप्पी पटेल खतरनाक जासूस को एक मौका दिया जा सकता है।
