
महाविद्यालय, बाड़मेर (Barmer) में युवा एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रायोजित विकसित भारत युवा संसद – 2026 का जिला स्तरीय सफल एवं प्रेरणादायी आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय प्राचार्य प्रो. मृणाली चैहान ने की। मुख्य अतिथि के रूप में अतिरिक्त जिला कलेक्टर श्री राजेन्द्र सिंह चांदवत उपस्थित रहे तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में यूआईटी चेयरमैन श्री श्रवण सिंह राजावत ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। श्री चांदावत ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों को अग्रिम स्तर के लिए तैयार करते है तथा उनकी राजनीतिक समझ को विकसित करते है। अतः इस प्रकार के आयोजन निरतंर होने चाहिए। विशिष्ट अतिथि श्री राजावत ने कार्यक्रम के सुंदर आयोजन के लिए महाविद्यालय परिवार को बधाई दी तथा छात्रों का मार्गदर्शन किया। स्वागत उद्बोधन के रूप में प्राचार्य चैहान ने विगत दस दिनों से चल रही निरतंर तैयारियों के विषय में अवगत कराते हुए विद्यार्थियों के लिए इसे सीखने का एक सुअवसर बताया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय सेवा योजना के समन्वयक श्री डायालाल सांखला, निर्णायक मंडल में प्रोफेसर रिछपाल सिंह, प्रोफेसर हरिसिंह राजपुरोहित, प्रो. प्रदीप पगारिया, आयुष पीएमओ डॉ. नरेन्द्र कुमार, सहकारिता निरीक्षक श्री गोपाल सिंह सोलंकी की गरिमामयी उपस्थिति रही।कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. मुकेश जैन ने किया। प्रतियोगिता के नियमों की विस्तृत जानकारी एवं रूपरेखा श्री अरविन्द कुमार द्वारा प्रस्तुत की गई, जिससे प्रतिभागियों को संसदीय प्रक्रिया की स्पष्ट समझ प्राप्त हुई। प्रतिभागियों ने अपने विचार रखते हुए कहा कि आपातकाल भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का एक ऐसा अध्याय है, जिसने नागरिक अधिकारों, संवैधानिक संस्थाओं और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के महत्व को गहराई से रेखांकित किया। आपातकाल के दौरान मौलिक अधिकारों का निलंबन, प्रेस पर सेंसरशिप और राजनीतिक विरोध का दमन लोकतंत्र के लिए गंभीर चुनौती था।आपातकाल ने यह सिखाया कि लोकतंत्र केवल चुनावों से नहीं, बल्कि संस्थाओं की स्वतंत्रता, न्यायपालिका की निष्पक्षता और नागरिक सजगता से मजबूत होता है। कई प्रतिभागियों ने कहा कि यदि नागरिक जागरूक न हों, तो संवैधानिक प्रावधानों का दुरुपयोग संभव हो सकता है।विचार-विमर्श में यह भी उभरा कि आपातकाल के बाद जनता द्वारा लोकतांत्रिक तरीके से सत्ता परिवर्तन यह दर्शाता है कि भारत की लोकतांत्रिक जड़ें गहरी हैं। युवाओं ने इसे लोकतंत्र की जीत और जन-शक्ति की प्रभावशीलता का उदाहरण बताया। निर्णायक प्रो. रिछपाल सिंह ने समस्त प्रतियोगियों को बधाई दी कि उन्होने अत्यंत कुशलता से एवं गहरे अध्ययन के आधार पर अपने विचारों को अभिव्यक्त किया। प्रो. हरिसिंह राजपुरोहित ने बल दिया कि लोकतंत्र के लिए सीख विषय पर भी प्रतियोगियों ने अपने विचार साझा किए जिसे और गहराई से समझने की आवश्यकता है। प्रो. पगारिया, डॉ. नरेन्द्र कुमार एवं श्री सोलंकी ने भी अपने विचार अभिव्यक्त किए। निर्णायक मंडल द्वारा उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर नक्षत्री, टीना, समता, शाहरूख एवं किशनाराम को प्रथम पांच विजेता घोषित किया गया। ये प्रथम पाँच विजेता मार्च माह में राज्य स्तर पर राज्य विधानसभा में अपना प्रस्तुतीकरण देंगे।अन्य सभी प्रतिभागियों को भी सहभागिता प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। अंत में धन्यवाद ज्ञापन प्रो. सोहनराज परमार एवं डॉ. वीरसिंह भाटी द्वारा प्रस्तुत किया गया। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। आयोजन में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं एवं प्राध्यापकों की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही। इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त संकाय सदस्य, कर्मचारीगण आदि की सहभागिता रही।
रिपोर्ट – ठाकराराम मेघवाल
