
बाड़मेर (Barmer) किसान खेती मंे नवीन तकनीक को अपनाएं। कृषि वैज्ञानिकांे की सलाह के अनुसार अधिक फसल उत्पादन लिया जा सकता है। अतिरिक्त जिला कलक्टर राजेन्द्रसिंह चांदावत ने बुधवार को जिला प्रशासन एवं उद्यान विभाग के संयुक्त तत्वावधान मंे बाड़मेर जिले मंे पंच गौरव कार्यक्रम एक जिला एक उपज के तहत आत्मा सभागार मंे आयोजित कृषि प्रदर्शनी एवं कृषक वैज्ञानिक संवाद के दौरान यह बात कही।मुख्य अतिथि के रूप मंे अतिरिक्त जिला कलक्टर राजेन्द्रसिंह चांदावत ने कहा कि खेती-किसानी मंे नवीनतम तकनीक के माध्यम से कम पानी मंे भी अधिक उत्पादन वाली फसलांे की बुवाई की जा सकती है। उन्हांेने किसानांे से मिटटी एवं पानी के नमूनांे की जांच करवाने के साथ कृषि विशेषज्ञांे से समय-समय पर राय लेने की बात कही। इस दौरान अतिरिक्त जिला कलक्टर चांदावत एवं विभागीय अधिकारियांे ने बाडमेर जिले का पंच गौरव एक जिला एक उपज ईसबगोल पुस्तिका का विमोचन किया। इस अवसर पर कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक केदार प्रसाद शर्मा ने कृषको को बताया कि पंच गौरव कार्यक्रम राजस्थान सरकार की पहल है, जिसका उद्देश्य प्रत्येक जिले की विशिष्ट पहचान, एक जिला-एक उपज, एक जिला-एक उत्पाद, एक जिला-एक वनस्पति प्रजाति, एक जिला-एक खेल, और एक जिला-एक पर्यटन स्थल के संरक्षण, संवर्धन, और विकास के माध्यम से आर्थिक, सांस्कृतिक, और पर्यावरणीय प्रगति को बढ़ावा देना है। उद्यानिकी विभाग के सहायक निदेशक मोहन लाल वर्मा ने कहा कि ईसबगोल की उन्नत किस्मों के बीजों के प्रदर्शन कृषको के खेतों मंे लगाने से उत्पादन में वृद्धि होने के कारण कृषको की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। इससे सकल घरेलु उत्पाद में वृद्धि एवं रोजगार के अवसर पैदा होंगे। उन्हांेने कहा कि कृषकों के खेतो पर ईसबगोल की खेती के प्रदर्शन से टिकाउ खेती की तरफ रूझान बढेगा। जैविक उत्पादों के प्रयोग से पर्यावरण एव मृदा स्वास्थ्य मंे सुधार होगा तथा कीटनाशको का प्रयोग कम होगा। कृषको की आमदनी बढने के साथ पर्यावरण सुधार, सकल घरेलु उत्पाद में वृद्धि एवं श्रमिको को रोजगार प्राप्त होगा। सहायक निदेशक पदम सिंह भाटी ने कृषको को कृषि विभाग की ओर से देय सुविधाओं की जानकारी प्रदान करते हुए कृषकों को तारबंदी, फार्मपोंड, पाईपलाइन, कृषि यंत्र आदि योजनाओं के अंतर्गत राज किसान साथी पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर अधिक से अधिक राज्य सरकार की ओर से देय अनुदान अधिक से अधिक लाभ उठाने का आह्वान किया। कृषि अधिकारी उत्तम चंद एवं सहायक कृषि अधिकारी बाबूराम राणावत ने कृषकों को ईसबगोल की उन्नत किस्मों खेत की तैयारी, भूमि उपचार, खाद एवं उर्वरक एवं उद्यान विभाग की ओर से देय सुविधाओं की जानकारी प्रदान की। कृषि विज्ञान केन्द्र दांता के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. विनय कुमार ने कृषकों को प्राकृतिक खेती, जैविक खेती के बारे में विस्तृत जानकारी देकर कृषको को ईसबगोल की खेती में उन्नत विधियों को अपनाने का आह्वान किया। कृषि विज्ञान केन्द्र दांता के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. बुधाराम मोरवाल एवं डॉ.श्यामदास ने कृषकों को ईसबगोल की खेती में लगने वाले कीट एवं रोग एवं उनकी रोकथाम, प्रबंधन, ईसबगोल के औषधीय गुण एवं उद्यानिकी फसलों की खेती की विस्तृत जानकारी प्रदान करते हुए इसको खेतों में अपनाने की बात कही। डॉ.रणवीर सिंह राजपुरोहित ने ईसबगोल एवं अन्य औषधीय फसलों के आर्युवेदिक महत्त्व की विस्तृत जानकारी प्रदान कर कृषकों को खेती में अपनाने का आह्वान किया। प्रगतिशील कृषक डॉ देवाराम पंवार ने समन्वित कृषि एवं पशुपालन प्रबंधन पर अपने अनुभव कृषकों से साझा कर इसको खेती में अपनाने की अपील की।
रिपोर्ट – ठाकराराम मेघवाल
