
राजस्थान का बाड़मेर (Barmer) जिला शुष्क पश्चिमी मैदानी क्षेत्र में स्थित है, जहाँ की जलवायु अत्यंत कठोर मानी जाती है। गर्मियों में तापमान लगभग 50°C तक पहुँच जाता है, जबकि सर्दियों में यह 4–5°C तक गिर जाता है। जिले की औसत वार्षिक वर्षा लगभग 300 मिमी है।जल की कमी, उड़ती रेत और विकट परिस्थितियों के बावजूद यहाँ के किसान अपनी जिजीविषा और नवाचार से कृषि एवं पशुपालन, बागवानी में अनार खजूर सहजन सब्जियों, थार शोभा खेजड़ी, गोबर गैस प्लांट, नेपियर घास को नई दिशा दे रहे हैं।जानपालिया गांव तहसील सेड़वा के बाड़मेर जिले में के रहने वाले हैं 12th में असफल होने के बाद कृषि ओर पशुपालन के नवाचारों को आत्मसाथ कर किसानों को नवाचार से रूबरू करवा रहे हैं!संघर्ष से आत्मनिर्भरता तक:- कोटा में pmt की तैयारी के दौरान असफलताओं के बाद पिताजी के कार्य में हाथ बढ़ाना शुरू किया ओर केवीके गुड़ामालानी में ट्रेनिंग लेने के बाद कृषि ओर पशुपालन के नवाचारों को अपने फार्म पर अपनाया! वैज्ञानिक भेड़ पालन 500 की शुरुआतरोजगार, पलायन और बेरोजगारी जैसी समस्याओं का समाधान आत्मनिर्भर कृषि एवं पशुपालन में देखा गया। वैज्ञानिक पद्धति से भेड़ ओर बकरी पालन के लिए कृषि विज्ञान केंद्र गुडामालानी प्रशिक्षण प्राप्त किया गया।इसके पश्चात भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना राष्ट्रीय पशुधन मिशन के अंतर्गत 525 भेड़ हेतु आवेदन किया गया और चयनित होकर जिले के लाभार्थी बने।वर्तमान एग्रो टूरिज्म फार्म की प्रमुख विशेषताएँनेपियर घास अनार बगीचा खजूर बगीचा बायोगैस प्लांट केंचुए खाद इकाई प्राकृतिक खेती थार शोभा खेजड़ी यह सभी का समावेश जिसे भाखर एग्रो टूरिज्म एवं नवाचार केंद्र जानपालिया सेड़वा बाड़मेर में मॉडल के रूप में भी विकसित किया जा रहा है।सम्मान एवं उपलब्धियाँजिला स्तरीय प्रगतिशील किसान सम्मान मिलेनियम फार्मर अवार्ड पशुधन किसान सम्मान।
रिपोर्ट – ठाकराराम मेघवाल
