महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार (Ajit Pawar) की बुधवार सुबह हुए विमान हादसे (plane crash) में मौत के बाद जांच एजेंसियों ने दुर्घटनाग्रस्त लियरजेट विमान का ब्लैक बॉक्स बरामद कर लिया है। ब्लैक बॉक्स में शामिल फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR) और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) के विश्लेषण से हादसे के कारणों की गहराई से जांच की जाएगी।
विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) की विशेष टीम ने दुर्घटनास्थल का दौरा कर फॉरेंसिक जांच शुरू कर दी है। जांच में तकनीकी पहलुओं, मौसम की स्थिति और पायलट व एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) के बीच हुए संवाद पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
दूसरी लैंडिंग के प्रयास में हुआ हादसा
दिल्ली की कंपनी वीएसआर वेंचर्स द्वारा संचालित लियरजेट-45 विमान सुबह करीब 8:45 बजे बारामती एयरपोर्ट पर दूसरी बार उतरने का प्रयास कर रहा था, तभी वह रनवे के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में 66 वर्षीय अजित पवार, उनके निजी सुरक्षा अधिकारी, एक सहयोगी तथा दो कॉकपिट क्रू सदस्य—पायलट-इन-कमांड सुमित कपूर और फर्स्ट ऑफिसर शंभवी पाठक—की मौत हो गई।
अजित पवार सुबह लगभग 8 बजे मुंबई से रवाना हुए थे और उन्हें बारामती में स्थानीय निकाय चुनावों से पहले चार जनसभाओं को संबोधित करना था।
DGCA रिपोर्ट: पायलट के अंतिम शब्द “ओह श***”
नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर में दर्ज पायलट के अंतिम शब्द “ओह श*”** बताए जा रहे हैं। इन्हें विमान के अंतिम क्षणों में उत्पन्न आपात स्थिति से जोड़ा जा रहा है। हालांकि, अधिकारी ने स्पष्ट किया कि अंतिम निष्कर्ष ब्लैक बॉक्स के विस्तृत विश्लेषण के बाद ही निकाला जाएगा।
लैंडिंग क्लीयरेंस का रीडबैक नहीं मिला
नागर विमानन मंत्रालय के बयान के मुताबिक, विमान ने सुबह 8:18 बजे बारामती एयरपोर्ट से संपर्क स्थापित किया था। पायलटों को मौसम की जानकारी दी गई और दृश्यता लगभग 3,000 मीटर बताई गई। पहली बार रनवे न दिखने पर गो-अराउंड किया गया, जो मानक प्रक्रिया है।
दूसरी अप्रोच के दौरान रनवे दिखने की पुष्टि के बाद सुबह 8:43 बजे लैंडिंग की अनुमति दी गई, लेकिन मंत्रालय के अनुसार लैंडिंग क्लीयरेंस का रीडबैक नहीं मिला, जिसे जांच में एक अहम बिंदु माना जा रहा है। इसके तुरंत बाद 8:44 बजे रनवे के पास आग की लपटें देखी गईं।
जांच जारी
जांच एजेंसियों का कहना है कि ब्लैक बॉक्स डेटा से यह स्पष्ट किया जाएगा कि हादसा तकनीकी खराबी, मानवीय चूक या परिस्थितिजन्य कारणों से हुआ। अंतिम रिपोर्ट आने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाज़ी होगी।
