भारत की कूटनीति ने बनाई खास जगह, Shashi Tharoor ने मानी गलती

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भारत की कूटनीति ने बनाई खास जगह, Shashi Tharoor ने मानी गलती 3

कांग्रेस नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर (Shashi Tharoor) ने स्वीकार किया है कि रूस-यूक्रेन युद्ध पर भारत की तटस्थ नीति का विरोध करना उनके लिए एक गलत आकलन साबित हुआ। उन्होंने कहा कि जब 2022 में युद्ध शुरू हुआ, तब उन्होंने सरकार की स्थिति की आलोचना की थी, लेकिन अब वह मानते हैं कि भारत की संतुलित कूटनीति ने उसे शांति स्थापना में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का अवसर दिया है।

थरूर ने मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित रायसीना डायलॉग के दौरान ‘वेजिंग पीस: लुकिंग बैक टू लुक अहेड’ सत्र में यह बात कही। उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा, “मैं अभी भी अपने चेहरे से ‘अंडा’ साफ कर रहा हूं, क्योंकि फरवरी 2022 में मैंने संसद में भारत की तटस्थ नीति की आलोचना की थी।”

पहले की थी आलोचना, अब बदला नजरिया

जब युद्ध शुरू हुआ था, तब थरूर ने रूस की कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा था कि भारत को संयुक्त राष्ट्र चार्टर, सीमा अखंडता और यूक्रेन की संप्रभुता के उल्लंघन की कड़ी आलोचना करनी चाहिए थी। लेकिन अब, तीन साल बाद, उन्होंने माना कि भारत की तटस्थ नीति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रूस और यूक्रेन दोनों के साथ संवाद बनाए रखने में मदद की है।

उन्होंने कहा, “यह नीति इस बात को दर्शाती है कि भारत के प्रधानमंत्री दो हफ्तों के अंतराल में यूक्रेन और रूस, दोनों के राष्ट्रपतियों से मिल सकते हैं और दोनों जगहों पर स्वीकार किए जाते हैं।”

भारत बन सकता है शांति का माध्यम

थरूर ने यह भी कहा कि भारत की भौगोलिक स्थिति और ऐतिहासिक रूप से तटस्थ रहने की नीति ने उसे एक संभावित शांति मध्यस्थ के रूप में मजबूत बनाया है। उन्होंने कहा, “भारत एक ऐसे स्थान पर है जहां वह दीर्घकालिक शांति के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, जो बहुत कम देशों के लिए संभव है।”

क्या भारत भेजेगा शांति सैनिक?

विदेश राज्य मंत्री रह चुके थरूर ने यह भी सुझाव दिया कि यदि रूस और यूक्रेन के बीच शांति समझौता होता है, तो भारत संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों (पीसकीपर्स) को भेजने पर विचार कर सकता है। उन्होंने कहा कि चूंकि रूस ने स्पष्ट कर दिया है कि वह नाटो (NATO) देशों के शांति सैनिकों को स्वीकार नहीं करेगा, ऐसे में यूरोप के बाहर के देशों को इस भूमिका में देखा जा सकता है।

“अगर जरूरत हुई और एक सहमतिपूर्ण शांति समझौता हुआ, तो मुझे लगता है कि भारत इस पर विचार कर सकता है,” उन्होंने कहा। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यह उनका निजी विचार है और वह सरकार की ओर से नहीं बोल रहे हैं।

भारत की कूटनीति को मिली नई पहचान

थरूर के इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि भारत की संतुलित विदेश नीति ने उसे वैश्विक मंच पर एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित किया है। वर्तमान परिस्थितियों में भारत की भूमिका कैसे विकसित होती है, यह देखने वाली बात होगी।

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