
थार नगरी बाड़मेर (Barmer) के जिला मुख्यालय स्थित पुरानी सब्जी मंडी के शिव मंदिर में शीतला माता का पूजा आयोजन हुआ। सुबह महिलाओं ने शुभ मुहूर्त में शीतला माता की पूजा की। वहीं, मंदिरों में सुबह से महिलाएं और बच्चे दर्शन करने के लिए भीड़ में दिखाई दिए। पूजा के बाद घर-घर में एक दिन पहले बनाए गए विभिन्न व्यंजनों का सेवन किया जाएगा।
रेखा डाबी का कहना है कि यह पूजा सभी लोग मिलकर करते हैं, ताकि शीतला माता का आशीर्वाद प्राप्त हो और कोई रोग न लगे। उन्होंने कहा कि इस पूजा का उद्देश्य बच्चों की सुख-शांति और परिवार की समृद्धि के लिए है।
क्या है शीतला सप्तमी?
फाल्गुन कृष्ण सप्तमी के दिन शीतला माता की पूजा की जाती है। शीतला माता को रोगों से बचाने वाली देवी माना जाता है, खासकर चेचक, खसरा और त्वचा की बीमारियों से। शीतला सप्तमी पर व्रत रखने और माता की पूजा करने से रोगों से मुक्ति मिलती है। ऐसा माना जाता है कि माता अपने भक्तों के सारे दुख दूर करती हैं, और उनकी पूजा करने से चेचक जैसी बीमारियां भी ठीक हो जाती हैं।
हिंदू मान्यताओं के अनुसार शीतला माता को संक्रामक रोगों और बीमारियों से सुरक्षा देने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। विशेष रूप से गर्मी के मौसम में उनकी पूजा से शरीर की स्वच्छता और पर्यावरण की रक्षा की जाती है, जो आज भी हमारे स्वास्थ्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। शुक्रवार को सुबह 7 बजे से 11.10 बजे तक शुभ मुहूर्त में माता की पूजा अर्चना की गई। महिलाएं शीतला माता मंदिर पहुंचकर पूजा करती हैं।
पूजा का तरीका और परंपराएं
महिलाओं का कहना है कि शीतला सप्तमी से एक दिन पहले विभिन्न व्यंजन बनाए जाते हैं। शीतला सप्तमी के दिन घरों में चूल्हा नहीं जलाया जाता है, और इस दिन ठंडे बासी भोजन का भोग माता को अर्पित किया जाता है। शीतला माता को रोगों से बचाने वाली देवी माना जाता है, और उनकी पूजा से चेचक, खसरा और त्वचा की बीमारियों से मुक्ति मिलती है।
महिलाओं का कहना है कि इस दिन माता जी को भोग अर्पित किया जाता है, जिसमें ठंडा जल चढ़ाया जाता है, राबड़ी, पराठे, और अन्य व्यंजन तैयार किए जाते हैं। पूजा के दिन चूल्हा नहीं जलाया जाता, और दीपक भी नहीं जलाए जाते। गृहणियों का कहना है कि वे आज और कल शनिवार को भी ठंडा भोजन करेंगी, ताकि बच्चों और परिवार का स्वास्थ्य ठीक रहे।
रिपोर्ट: ठाकराराम मेघवाल