
जैसलमेर (Jaisalmer) श्रीमद्भागवत कथा सुनने से जीवन को प्रेरक और सर्वश्रेष्ठ आयाम प्राप्त होते है। इस पावन कथा के विभिन्न प्रसंग हमें मनुष्यता के पथ पर चलने की सीख देते है यह विचार थे आचार्य जैनेन्द्र कटारा के। आचार्य गुरुवार को लक्ष्मीनारायण एवं सरला देवी जगाणी की स्मृति में स्व. नैनसुख जगाणी परिवार की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह ज्ञानयज्ञ के दूसरे दिन भागवत के विभिन्न प्रसंगों की व्याख्या कर रहे थे। भाटिया बेरा में प्रतिदिन दोपहर 2:30 से 6:30 बजे तक आयोजित ज्ञानयज्ञ आयोजन समिति के बसंत पुरोहित ने बताया की कथा के दूसरे दिन कथावाचक आचार्य जैनेन्द्र कटारा ने मनु सतरुपा चरित्र, कर्दम चरित्र, ध्रुव चरित्र, शिव पार्वती विवाह के प्रसंग सुनाए। इस दौरान विभिन्न चरित्रों की सजीव झांकियां भी मंच पर सजाई गई। आयोजन समिति के आनंद पुरोहित ने बताया की इससे पूर्व बुधवार को मंदिर पैलेस स्थित श्री जी बैठक से श्रीमद्भागवत कथा कलश यात्रा प्रारंभ हुई। शोभायात्रा में राजस्थानी परिवेश में सजी धजी महिलाएं सिर पर मंगल कलश लेकर भजनों की सुरलहरियों के साथ शामिल हुई वहीं पुरुष सिर पर जैसलमेरी पाग पहने, गले में ओपरणा धारण कर जयकारे लगाते चले। मंदिर पैलेस से रवाना हुई शोभायात्रा का विभिन्न स्थानों पर पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया। कलशयात्रा विभिन्न मार्गो से होते हुए कथा स्थल भाटिया बेरा पहुंची जहां श्रीमद्भागवत और कथावाचक आचार्य श्री का पूजन किया गया। कलशयात्रा व कथा के दौरान जैसलमेर के अनेक गणमान्यजनों के साथ ही मुम्बई, पुणे, कोलकात्ता,दिल्ली, जोधपुर, बीकानेर सहित विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालू मौजूद रहे।
रिपोर्ट – कपिल डांगरा
