
थार नगरी बाड़मेर (Barmer) के तीन गांवों चकलानी, बेरीगांव और लालानियों की ढाणी में 158 बीघा भूमि पर खरीद-फरोख्त, नामांतरण और भू-परिवर्तन पर रोक लगा दी गई है। उत्तरलाई सिविल एयरपोर्ट प्रोजेक्ट के लिए सरकार भूमि अधिग्रहण कर रही है, मुआवजा स्वीकृत है और टर्मिनल निर्माण जल्द शुरू होने की संभावना है ।बाड़मेर जिले के तीन गांवों में जमीन से जुड़े सौदे फिलहाल पूरी तरह थम गए हैं, प्रदेश सरकार ने यहां कुल 158 बीघा भूमि पर खरीद-फरोख्त, नामांतरण और भू-परिवर्तन पर रोक लगा दी है, यह प्रतिबंध प्रस्तावित सिविल एयरपोर्ट प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के तहत लगाया गया है । आदेश लागू होते ही संबंधित क्षेत्रों में जमीन का कोई भी लेन-देन राज्य सरकार की अनुमति के बिना मान्य नहीं होगा ।*• क्यों लगी रोक*राजस्थान सरकार ने उत्तरलाई क्षेत्र में एयरपोर्ट टर्मिनल और अप्रोच रोड के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी है. इसी के चलते इस भूमि को किसी भी निजी सौदे से बचाने और प्रोजेक्ट को निर्बाध तरीके से आगे बढ़ाने के लिए यह रोक लगाई गई है. यह कदम संकेत देता है कि वर्षों से लंबित एयरपोर्ट योजना अब तेजी पकड़ रही है.*• कौन-कौन से गांव प्रभावित*नागरिक उड्डयन विभाग की अधिसूचना के अनुसार ये तीन क्षेत्र प्रतिबंध के दायरे में आए हैं । चकलानी, बेरीगांव और लालानियों की ढाणी. यहां की करीब 65.43 एकड़ करीबन 158 बीघा भूमि पर किसी भी तरह की रजिस्ट्री, नियमन, नामांतरण या भू-परिवर्तन फिलहाल नहीं होगा ।• भूमि अधिग्रहण का पैमाना और बजट – कुल भूमि 65.43 एकड़ (158 बीघा) है, जिसमें 62.96 एकड़ निजी भूमि शामिल है, स्वीकृत बजट ₹5.7 करोड़ है, सरकार यह राशि भूमि मालिकों को मुआवजे के रूप में प्रदान करेगी, मुआवजा जारी होते ही टर्मिनल निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना जताई जा रही है ।•* *एयरपोर्ट कहां और कैसे विकसित होगा*प्रस्तावित टर्मिनल और कॉम्प्लेक्स प्रभावित भूमि पर बनाया जाएगा, उड़ानों के संचालन के लिए उत्तरलाई एयरफोर्स स्टेशन का मौजूदा रनवे उपयोग में लिया जाएगा, इसके बाद बाड़मेर में सिविल उड़ानों का संचालन शुरू होने का मार्ग साफ हो सकता है ।• *प्रोजेक्ट का इतिहास* *- 2018-19 में केन्द्र सरकार ने उत्तरलाई में सिविल एयरपोर्ट स्थापित करने की घोषणा की थी, लेकिन राज्य-केन्द्र समन्वय की कमी के कारण प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ पाया, भजनलाल सरकार के कार्यकाल में भूमि अधिग्रहण को मंजूरी मिलने के बाद यह योजना दोबारा सक्रिय हुई है ।• *क्यों महत्वपूर्ण है यह एयरपोर्ट*बाड़मेर में प्रतिदिन 2 लाख बैरल से अधिक क्रूड ऑयल उत्पादन—देश के कुल उत्पादन का लगभग 18%. प्राकृतिक गैस और कोयले के भंडार, HPCL और राज्य सरकार की रिफाइनरी व पेट्रोकेमिकल हब परियोजना के कारण यहां से एयरपोर्ट को अनुमानित 30–40% यात्री भार मिल सकता है ।बाड़मेर पाकिस्तान के साथ 228 किमी अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करता है, जिससे एयरपोर्ट बीएसएफ, एयरफोर्स और सैन्य रसद के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है, मरुस्थलीय संस्कृति, लोककला, धरोहर और अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी की वजह से एयरपोर्ट पर्यटन विकास का बड़ा माध्यम बन सकता है ।• *फिलहाल क्या लागू रहेगा*जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक, नामांतरण और नियमन स्थगित, भू-परिवर्तन पर रोक और कोई भी प्रक्रिया राज्य सरकार की अनुमति के बिना मान्य नहीं, 158 बीघा क्षेत्र पर लगा प्रतिबंध विकास की दिशा में उठाया गया बड़ा कदम है । यह सिर्फ रोक नहीं, बल्कि बाड़मेर के एयरपोर्ट सपने को हकीकत के और करीब लाने वाली प्रक्रिया है, अगर सब कुछ तय योजना के अनुसार चला, तो आने वाले समय में बाड़मेर न सिर्फ हवाई कनेक्टिविटी से जुड़ेगा, बल्कि उद्योग, रोजगार और पर्यटन में नई उड़ान भर सकता है ।
रिपोर्ट – ठाकराराम मेघवाल
