
राजसमंद (Rajsamand) जिले के ग्राम पंचायत आंजना में 125 किसानों का परंपरागत कृषि विकास योजना क्लस्टर समूह मदारिया, आंजना, कालेसरिया, लसानी ,काकरोद ग्राम पंचायत में से चयनित 25-25 किसान कुल 125 किसानों का प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण में सहायक कृषि अधिकारी राजेश कुमार माहेश्वरी ,ने बताया कि इस योजना अंतर्गत 20 हैक्टर क्षेत्रफल का प्रत्येक ग्राम पंचायत में प्राकृतिक खेती हेतु चयन किया गया परंपरागत खेती स्थानीय रूप से उपलब्ध संसाधनों पर आधारित एक रसायन मुक्त कृषि पद्धति है यह पारंपरिक स्वदेशी तरीकों को प्रोत्साहित करती है जो उत्पादकों को बाहरी आदानों पर निर्भर रहने से मुक्त करते हैं। परंपरागत खेती का महत्व बेहतर स्वास्थ्य सुनिश्चित करना तथा किसानों के आय में वृद्धि मृदा स्वास्थ्य में वृद्धि करना है। परंपरागत खेती करने से मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बढ़ती है। रासायनिक खाद पर निर्भरता कम होती है। तथा फसलों के उत्पादन में बढ़ोतरी होती है जिससे मानव स्वास्थ्य मृदा स्वास्थ्य एवं पशु स्वास्थ्य में सुधार होता है । इस योजना अंतर्गत प्रत्येक किसान को 7 फीट लंबी 3 फीट चौड़ी वह 2 फीट ऊंची पक्की वर्मी बेड बनाकर वर्मी कंपोस्ट बनाना है तथा उसको अपने खेतों में उपयोग में लेना है। बफर जोन बनाकर खेत को जैविक खेती हेतु सुरक्षित करना है। माहेश्वरी ने विभाग की योजना अंतर्गत तारबंदी ,पाइपलाइन ,फवारा सेट, फार्म पॉन्ड पर अनुदान के बारे में विस्तार से बताया की तारबंदी पर लघु सीमांत श्रेणी कृषकों को 400 मीटर परिधि पर अधिकतम 48000 तथा अन्य श्रेणी कृषकों को ₹40000 तक अनुदान दिया जाता है सामुदायिक तारबंदी करने पर 56000 तक अनुदान देय है। पाइपलाइन स्थापना पर लघु सीमांत श्रेणी कृषकों को 18000 रुपए तक तथा अन्य श्रेणी कृषक को 15000 तक अनुदान देय है, फॉर्मपॉन्ड निर्माण करने पर 73500 रुपए लघु सीमांत श्रेणी कृषकों को दिया जाता है। कृषि विभाग से सभी श्रेणी में अनुदान हेतु ऑनलाइन आवेदन करें तथा प्रशासनिक स्वीकृति जारी होने के बाद कार्य प्रारंभ करें अनुदान राशि डीबीटी योजना अंतर्गत सीधे ही कृषक के जन आधार कार्ड से जुड़े बैंक अकाउंट में जमा होती है। कृषि पर्यवेक्षक रामेश्वर चौधरी ने गर्मी की गहरी जुताई ,खरपतवार नियंत्रण, मिनी स्प्रिंकलर पर बताया। नरेंद्र कुमार गुर्जर कृषि पर्यवेक्षक ने बीज उपचार ,भूमि उपचार, बूंद बूंद सिंचाई पर बताया। कृषि पर्यवेक्षक श्रीमती अनीता ने बगीचा स्थापना, सब्जियों की खेती पर बताया कृषि पर्यवेक्षक रमेश कुमार स्वामी ने जैविक खेती ,जैविक उत्पाद पर बताया कृषि पर्यवेक्षक कृष्णा शर्मा ने वर्मीकंपोस्ट बनाने की प्रक्रिया, मृदा स्वास्थ्य कार्ड पर बताया।
रिपोर्ट – नरेंद्र सिंह खंगारोत
