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Home » Blog » राष्ट्रीय » भारत रक्षा नवाचार तथा एयरोस्पेस प्रौद्योगिकी में वैश्विक नेता बनने की ओर अग्रसर है : रक्षा मंत्री

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भारत रक्षा नवाचार तथा एयरोस्पेस प्रौद्योगिकी में वैश्विक नेता बनने की ओर अग्रसर है : रक्षा मंत्री

Jagruk Times
Last updated: February 13, 2025 3:43 pm
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10 Min Read
भारत रक्षा नवाचार तथा एयरोस्पेस प्रौद्योगिकी में वैश्विक नेता बनने की ओर अग्रसर है
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जैसलमेर /बेंगलुरु। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने 12 फरवरी, 2025 (बुधवार) को कर्नाटक के बेंगलुरु में 15 वें एयरो इंडिया के समापन समारोह को संबोधित करते हुए कहा, “भारत परिवर्तन के एक क्रांतिकारी दौर से गुजर रहा है और रक्षा नवाचार तथा एयरोस्पेस प्रौद्योगिकी में वैश्विक नेता बनने की ओर अग्रसर है। पीआईबी दिल्ली द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार ” रक्षा मंत्री ने कहा कि, शुरुआत में, समग्र राष्ट्रीय सशक्तिकरण प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए आत्मनिर्भरता के मंत्र का अंतर्निहित दर्शन था।

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उन्होंने कहा, “यह दर्शन धीरे-धीरे हमारी राष्ट्रीय भावना में बदल गया और अब यह तेजी से राष्ट्रीय संकल्प और राष्ट्रीय क्रांति बनने की ओर अग्रसर है।” राजनाथ सिंह ने एयरो इंडिया 2025 में देखी जा रही ऊर्जा और उत्साह की सराहना करते हुए कहा कि इस आयोजन में घरेलू और वैश्विक प्रदर्शकों की बढ़ती भागीदारी और भारतीय वायु सेना के शानदार हवाई करतबों ने एशिया की सबसे बड़ी एयरोस्पेस और रक्षा प्रदर्शनी के 15 वें संस्करण को एक अद्वितीय और ऐतिहासिक आयोजन बना दिया है।

उन्होंने भाग लेने वाली रक्षा और एयरोस्पेस कंपनियों के बीच गहन और सार्थक जुड़ाव के प्रति आशा व्यक्त की। देश में रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में हो रहे व्यापक बदलाव के बारे में बताते हुए रक्षा मंत्री ने इस बात की सराहना की कि एक दशक पहले जहां 65-70% रक्षा उपकरण आयात किए जाते थे, वहीं आज लगभग उतने ही हथियार प्लेटफॉर्म भारत में ही बनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, “आज हम ऐसे मोड़ पर हैं जहां लड़ाकू विमान, मिसाइल सिस्टम और नौसेना के जहाज समेत कई रक्षा उत्पाद न केवल हमारी सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं, बल्कि दुनिया का ध्यान भी अपनी ओर खींच रहे हैं। छोटे तोपों से लेकर ब्रह्मोस और आकाश मिसाइल सिस्टम जैसे बड़े प्लेटफॉर्म तक, हम कई देशों को कई तरह के उत्पाद निर्यात कर रहे हैं। हमने वैश्विक स्तर पर नई साझेदारियां बनाई हैं, जिसके परिणामस्वरूप रक्षा निर्यात में वृद्धि हुई है।”

राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत के पास एक मजबूत रक्षा औद्योगिक परिसर है, जिसमें 16 रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (डीपीएसयू), 430 लाइसेंस प्राप्त कंपनियां और लगभग 16,000 एमएसएमई शामिल हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि कुल रक्षा उत्पादन में 21% की अपनी वर्तमान हिस्सेदारी के साथ, निजी क्षेत्र आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को प्राप्त करने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

उन्होंने सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों की प्रगति के लिए सरकार द्वारा लगातार लागू की जा रही नीतियों को सूचीबद्ध किया, जिसमें रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया में संशोधन और रक्षा उत्कृष्टता के लिए नवाचार (आईडीईएक्स), आईडीईएक्स के साथ अभिनव प्रौद्योगिकियों के विकास में तेजी (एडीआईटीआई) और प्रौद्योगिकी विकास कोष (टीडीएफ) जैसी पहल योजनाओं का शुभारंभ शामिल है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि निजी उद्योग भारत में रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाए।

रक्षा मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के अलावा सशस्त्र बल देश की आत्मनिर्भरता की दिशा में सबसे बड़ी भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा, “राष्ट्रीय सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है और इसमें किसी भी तरह के समझौते की कोई गुंजाइश नहीं है। जब राष्ट्रीय सुरक्षा की बात आती है तो सर्वश्रेष्ठ से कम कुछ भी बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। चाहे हमारे सैनिकों के लिए उपकरण हों या उनके और उनके परिवारों के लिए उचित सुविधाओं का प्रावधान हो, उन्हें हर चीज में सर्वश्रेष्ठ प्रदान करना हमारी राष्ट्रीय जिम्मेदारी है। मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि आज हमारे बलों को न केवल ‘सर्वश्रेष्ठ’ हथियारों प्रौद्योगिकियों से लैस किया जा रहा है, बल्कि उनके पास भारत में निर्मित प्लेटफॉर्म भी हैं।”

राजनाथ सिंह ने स्वदेशी रूप से निर्मित रक्षा उत्पादों पर पूर्ण विश्वास के लिए सशस्त्र बलों की सराहना की। उन्होंने कहा, “सेना ने देश में निर्मित हथियारों और उपकरणों को पूरे दिल से अपनाया है। केवल हमारे सशस्त्र बलों की पूर्ण संतुष्टि के साथ ही हम तेज गति से आत्मनिर्भरता हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। भारत में बनाया जा रहा विशाल रक्षा औद्योगिक परिसर हमारे सभी बलों के भरोसे और विश्वास पर आधारित है।”

रक्षा मंत्री ने आज के उभरते युद्ध के आयामों को ध्यान में रखते हुए रक्षा तैयारियों को लगातार बढ़ाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि एयरो इंडिया 2025 ने यह क्षमता दिखाई है कि भारतीय रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र का भविष्य केवल आसमान तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इससे भी आगे है। उन्होंने 15 वें एयरो इंडिया में भाग लेने के लिए सभी का आभार व्यक्त किया और उम्मीद जताई कि यह प्रतिभागियों के बीच कई सहयोगी, पारस्परिक रूप से लाभकारी और सफल उपक्रमों और गठबंधनों के बीज बोएगा।

इससे पहले, राजनाथ सिंह ने ‘सामर्थ्य’ स्वदेशीकरण कार्यक्रम में भाग लिया, जो एयरो इंडिया में अपनी तरह का पहला कार्यक्रम था। इसमें रक्षा विनिर्माण में भारत की स्वदेशी प्रतिभा को 33 प्रमुख वस्तुओं के माध्यम से प्रदर्शित किया गया, जिसमें 24 डीपीएसयू, डीआरडीओ और भारतीय नौसेना की वस्तुएं और रक्षा उत्कृष्टता के लिए नवाचार (आईडीईएक्स) की नौ सफल नवाचार परियोजनाएं शामिल थीं।

वस्तुओं में एंटी-एयरक्राफ्ट मशीन गन का इलेक्ट्रो ब्लॉक, पनडुब्बी के लिए इलेक्ट्रिक मोबाइल पार्ट, एचएमवी 6×6 का टॉर्शन बार सस्पेंशन, एलसीए एमके-I/II, एलसीएच के घटकों के लिए एक्सट्रूडेड अल मिश्र धातु, भारतीय उच्च तापमान मिश्र धातु (आईएचटीए) फोर्ज्ड, सॉल्यूशन एनील्ड और मशीनड बिलेट, वीपीएक्स-135 सिंगल बोर्ड कंप्यूटर, टैंक टी-90 का थूथन बोर साइट, रुद्रएम II मिसाइल, नौसेना एंटी-शिप मिसाइल-शॉर्ट रेंज, सी4 आईएसआर सिस्टम, डीआईएफएम आर118 इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम, स्वचालित आश्रित निगरानी प्रसारण रिसीवर, अगली पीढ़ी की इलेक्ट्रिक फेरी, कम्प्यूटरीकृत पायलट चयन प्रणाली, अवैध ड्रोन के लिए काउंटर उपाय (आरएफ जैमर गन), 4जी एलटीई टीएसी-लैन आक्रमण सतह निगरानी उपकरण, एआई एमएल आधारित विश्लेषणात्मक और निर्णय समर्थन प्लेटफार्म (दीपदर्शक), स्मार्ट संपीड़ित श्वास तंत्र, आईएफडीएसएस के लिए फायर वायर, पोर्टेबल आरसीएस मापन उपकरण, 125 मिमी एफएसएपीडीएस के लिए पेनेट्रेटर असेंबली, एसयू-30एमकेआई के लिए पायलट पैराशूट पीएसयू-36, कोंकर्स-एम मिसाइल के लिए नॉक आउट इंजन (केओई) चार्ज, बीएमपी II के लिए डिफ्यूजन टेक्नोलॉजी आधारित ड्राइवर नाइट साइट और AK630M नेवल गन के लिए 30 मिमी सिक्स बैरल AO-18 गन। कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री द्वारा तीन पुस्तिकाएँ जारी की गईं – स्वदेशीकरण पर कॉफी टेबल पुस्तिका ‘सामर्थ्य’; समस्या परिभाषा विवरण (सीपीडीएस) यानी 2025 का संग्रह और मुख्यालय आईडीएस की पुस्तिका।

कॉफी टेबल पुस्तिका रक्षा उत्पादन विभाग के नेतृत्व में स्वदेशीकरण यात्रा का अवलोकन प्रदान करती है। मुख्यालय आईडीएस की पुस्तिका नई और परिवर्तनकारी प्रौद्योगिकी के उद्भव की पृष्ठभूमि में, डेटा-केंद्रित वातावरण में बहु-डोमेन संचालन करने की अंतर्दृष्टि प्रदान करती है। सीपीडीएस का उद्देश्य भारतीय सेना की परिचालन चुनौतियों और शिक्षाविदों, उद्योग जगत के स्टार्ट-अप और शोध संस्थानों द्वारा पेश किए गए अभिनव समाधानों के बीच की खाई को पाटना है। इसमें युद्ध के 11 कार्यात्मक क्षेत्रों में 82 समस्या विवरण शामिल हैं, जिनमें एआई, संचार, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, परिस्थितिजन्य जागरूकता, उत्तरजीविता, गतिशीलता, आयुध, मानव रहित प्रणाली, साइबर, रसद संबंधी चुनौतियाँ आदि शामिल हैं। इसमें विरासत उपकरणों के कुछ घटकों या संयोजनों के लिए हमारी आयात निर्भरता को कम करने के लिए स्वदेशीकरण आयात प्रतिस्थापन के लिए समस्या विवरण भी शामिल हैं।

सीपीडीएस एक संरचित दृष्टिकोण है, जहां सेना महत्वपूर्ण परिचालन चुनौतियों की पहचान करती है और उनका दस्तावेजीकरण करती है तथा भारतीय रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र को सीधे जुड़ने के लिए एक मंच प्रदान करती है, जबकि सेना की जरूरतों के अनुरूप अत्याधुनिक तकनीकों के अनुसंधान और तैनाती में तेजी लाती है। जवाब प्रस्तुत करने की प्रक्रिया और मूल्यांकन मानदंडों पर विस्तृत दिशा-निर्देश भारतीय सेना की वेबसाइट के आर्मी डिज़ाइन ब्यूरो वेबपेज पर डाउनलोड के लिए उपलब्ध संग्रह में शामिल किए गए हैं।

कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्रालय के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और सेना के कर्मचारियों तथा संबद्ध उद्योग भागीदारों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने प्रदर्शित वस्तुओं के स्वदेशीकरण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इस कार्यक्रम में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी, थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, सचिव (रक्षा उत्पादन) संजीव कुमार भी शामिल हुए।

रिपोर्ट – कपिल डांगरा

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