
जैसलमेर (Jaisalmer) स्वर्णनगरी जैसलमेर के हृदय स्थल जेठा पाड़ा में मंगलवार से लोक पर्व गणगौर के पूजन का विधिवत आगाज़ हो गया। क्षेत्र की बालिकाओं और युवतियों ने पारंपरिक उल्लास के साथ इस 16 दिवसीय अनुष्ठान की शुरुआत की।प्रमुख आकर्षण और परंपराएं:मंगल गीतों से गूंजा मोहल्ला: मंगलवार सुबह से ही जेठा पाड़ा की कोटड़ी में “गोर-गोर गणपती…” और “पूजन दो गणगौर…” जैसे पारंपरिक लोक गीतों की गूंज सुनाई देने लगी।दूब और फूलों का चयन: युवतियां सज-धजकर बगीचों से ताजी दूब (घास) और फूल लेने पहुंचीं, जिनका उपयोग पूजन की सामग्री के रूप में किया जा रहा है।मिट्टी के ईसर-गवर: पूजन के लिए बालिकाओं ने मिट्टी से बने ईसर और गवर की प्रतिमाओं की स्थापना की है। आगामी 16 दिनों तक प्रतिदिन सुबह स्नान के बाद माता गौरी की पूजा-अर्चना की जाएगी।मनचाहे वर और सौभाग्य की कामना: अविवाहित बालिकाओं ने अच्छे वर की प्राप्ति और विवाहित युवतियों ने अखंड सौभाग्य की कामना के साथ यह व्रत शुरू किया है।जैसलमेर की अनूठी परंपरा:जैसलमेर में गणगौर की पूजा बिना ईसर के केवल ‘गवर’ (पार्वती) के रूप में करने की सदियों पुरानी परंपरा है। जेठा पाड़ा में भी इसी विशिष्ट संस्कृति की झलक देखने को मिल रही है, जहाँ बालिकाएं भक्ति भाव से गवर माता की सेवा में जुटी हैं।
रिपोर्ट – कपिल डांगरा
