अब भी भारत में बडे स्तर पर लोग कोरोना से बेफिक्र है !!!

जागरूक टाइम्स 759 Mar 20, 2021

अब भी भारत में बड़े स्तर पर लोग कोरोना से बेफिक्र है। देश में शनिवार को कोविड-19 के 24,882 नए मामले सामने आए। यह आंकड़ा इस वर्ष एक दिन में सामने आए मरीजों की सर्वाधिक संख्या है।इसके साथ ही देश में अबतक कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की कुल संख्या 1,13,33,728 हो गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक नए मामलों की संख्या गत 83 दिन में सबसे अधिक है। इससे पहले 20 दिसंबर को 26,624 लोगों के 24 घंटे में संक्रमित होने की पुष्टि हुई थी। मंत्रालय द्वारा शनिवार सुबह आठ बजे अद्यतन किए गए आंकड़ों के मुताबिक गत 24 घंटे में 140 कोविड-19 मरीजों की मौत हुई है जिन्हें मिलाकर अबतक देश में इस महामारी से 1,58,446 लोगों की जान जा चुकी है। आंकड़ों के मुताबिक देश में इस समय 2,02,022 मरीज उपचाराधीन हैं जो कुल संक्रमितों का 1.74 प्रतिशत है।

वहीं, नए मामलों में बढ़ोतरी की वजह से मरीजों के ठीक होने की दर में भी गिरावट आई है और यह 96.82 प्रतिशत पर पहुंच गई है। मंत्रालय के मुताबिक देश में कोविड-19 से ठीक होने वालों की संख्या बढ़कर 1,09,73,260 हो गई है। वहीं, संक्रमितों में मृत्युदर 1.40 प्रतिशत है। देश में पिछले साल सात अगस्त में संक्रमितों की संख्या 20 लाख, 23 अगस्त को 30 लाख और पांच सितंबर को 40 लाख से अधिक हो गई थी। वहीं, संक्रमण के कुल मामले 16 सितंबर को 50 लाख, 28 सितंबर को 60 लाख, 11 अक्टूबर को 70 लाख, 29 अक्टूबर को 80 लाख, 20 नवम्बर को 90 लाख और 19 दिसंबर को एक करोड़ के पार चले गए थे। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के अनुसार, देश में अभी तक 22,58,39,273 नमूनों की कोविड-19 संबंधी जांच की गई है। इनमें से 8,40,645 नमूनों की जांचशुक्रवार को की गई थी।

महाराष्ट्र में अब तक कुल 26,89,922 लोगों को कोविड-19 का टीका दिया जा चुका है। स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने शनिवार को बताया कि शुक्रवार को 2,54,956 लोगों को टीका दिया गया जो अब तक राज्य में एक दिन में दी गई सबसे ज्यादा संख्या थी। अधिकारी ने कहा, “कई टीकाकरण केंद्र शुक्रवार देर रात तक काम करते रहे इसलिए यह आंकड़ा शनिवार को दर्ज किया गया।” अधिकारी ने कहा कि राज्य में अब तक जिन लोगों को टीका दिया जा चुका है उनमें से 3,73,317 लोगों को टीके की दूसरी खुराक भी दी गई है जबकि अन्य लोगों को टीके की पहली खुराक दी गई है। शुक्रवार को 1,66,995 वरिष्ठ नागरिकों को टीका दिया गया और 45 से 60 वर्ष की उम्र के 31,043 उन लोगों को टीका दिया गया जो पहले से किसी बीमारी से पीड़ित हैं। राज्य में अब तक 8,51,952 वरिष्ठ नागरिकों और 45 से 60 वर्ष की आयु के 1,50,558 अन्य लोगों को टीका दिया जा चुका है। अधिकारी ने बताया कि अब तक 8,18,917 स्वास्थ्य कर्मियों को टीका गया है जिनमें से 3,28,477 कर्मियों को टीके की दूसरी खुराक की भी दी गई है। इसी प्रकार अग्रिम मोर्चे पर तैनात 4,95,178 कर्मियों को टीका दिया जा चुका है जिनमें से 44,840 लोगों को दूसरी खुराक दी गई है।

उसके बावजूद देश में व खासकर महाराष्ट्र में हालत ख़राब हैं।महाराष्ट्र का ये हाल इसलिए है, क्योंकि लोगों ने जमकर लापरवाही बरती. आज हालत ये है कि महाराष्ट्र के 8 शहरों में खतरे की घंटी बज रही है. देश के सबसे ज्यादा एक्टिव केस वाले 10 शहरों में से 8 महाराष्ट्र के हैं. महाराष्ट्र मे आने वाले दिनों में सख्ती बढ़ाई जा सकती है. चिंता की बात ये है कि महाराष्ट्र से दूसरे राज्यों में लोगों की आवाजाही पहले की तरह जारी है. ऐसे में देश के दूसरे हिस्सों में भी कोरोना के फिर से सिर उठाने का खतरा मंडरा रहा है।बढ़ते कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए सबसे कारगर तरीका है कि जल्द से जल्द से टीकाकरण। जो लोग सरकार टीका टिप्पणी करते थे कि सरकार सो रही है और कोरोना वेक्सिन की ओर ध्यान नहीं दे रही है वही लोग टीकाकरण के प्रति बेरुखी दिखा रहे हैं। जो स्वयं मैंने अपनी पत्नी के साथ सेंटर पर जाकर अनुभव की। सरकार 30 000 की आबादी वाले शहर वसई में सरकारी व् प्राइवेट कुल 13 जगहों पर टीका करण की व्यवस्था की है पर लोगों में उत्साह की कमी के कारण ‘ तू चल मैं अभी आया ‘ वाली हालत है।मुझे टीकाकरण में 10 मिनट लगे व कोई तकलीफ भी नहीं हुई। फिर भी लोगों की बेरुखी है। सेंटर खाली पड़े है जबकि सरकारी सेंटरों में इसे मुफ्त व प्राइवेट अस्पतालों में 250 रुपयों की मामूली कीमत में लगाया जा रहा हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा वेक्सिन लगवाने की शुरुवात के बाद राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद और केन्द्रीय मंत्रियों ने भी वैक्सीन लगवा ली है लेकिन ऐसे लोगों की संख्या भी काफी बड़ी है जो अभी भी वैक्सीन से दूरी बनाए रखना चाहते हैं। भारत ने महामारियों पर काबू पाया है। जब देशवासियों ने पोलियो और चेचक के टीकों से दूरी नहीं बनाई, उस पर यकीन किया और ये बीमारियां जड़ से खत्म हो गई तो फिर कोई कारण नहीं है कि कोरोना वैक्सीन पर भरोसा नहीं किया जाए। मध्यमवर्गीय परिवारों की महिलाएं अभी भी टीके से परहेज कर रही हैं, ग्रामीण और दूरदराज के अंचलों में वैक्सीन को लेकर लोग ज्यादा जागरूक भी नहीं हैं। महानगरों और शहरों में वैक्सीन के लिए केन्द्रों पर भीड़ देखी जा सकती है। लेकिन पिछड़े क्षेत्रों के लोग वैक्सीन के साइड इफैक्ट्स से डरते हैं। सरकार इस बात के लिए हरसम्भव प्रयास कर रही है कि टीका लोगों तक जल्द से जल्द पहुंच जाए। इसीलिए ही टीकाकरण में निजी अस्पतालों को जोड़ा गया और अब आप 24 घंटे किसी भी समय टीका लगवा सकते हैं। देश की बड़ी आबादी को देखते हुए यह समझना भी जरूरी है कि देशभर को कवर करने के लिए 7-8 माह का समय लगना स्वाभाविक है। कोरोना काल में हमने देखा कि हमारा सामान्य जीवन काफी खौफनाक हो गया था। सड़कों पर दौड़ती एम्बुलैंसें और शवों की अंत्येष्टि के दृश्य डर पैदा कर रहे थे। बाहर से इमारतें बहुत खूबसूरत लगती थीं लेकिन भीतर सन्नाटा छाया हुआ रहता था। कंटेनमैंट जोन बने मुहल्लों के करीब से गुजरने में भी डर लगता था। हम सब इस बात की उम्मीद लगाए बैठे थे कि कोई संजीवनी आए और हमारा जीवन सामान्य हो।

अब जबकि टीकाकरण का दूसरा चरण चल रहा है तो दूसरी तरफ लोग बेखौफ होकर मास्क, सैनेटाइजर, सोशल डिस्टेसिंग के तमाम नियमों की धज्जियां उड़ाते नजर आ रहे हैं। देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या में कई दिनों से बढ़ौतरी चिंता पैदा करने वाली है। आशंका इस बात की है कि हमारी लापरवाहियों के चलते हालात कहीं बिगड़ न जाएं। अब भी खबरें आ रही हैं एक छात्रावास में 40 से अधिक छात्र संक्रमित मिले या कहीं से भी लोगों के संक्रमित होने की सूचना पाकर दिल भीतर से दहल उठता है। यदि हम अपनी सुरक्षा स्वयं करना नहीं सीखेंगे तो और लोगों को सुरक्षित कैसे रख पाएंगे। वैक्सीन का काम बीमारी से बचाव करना है, यह हमारे शरीर में एंटीबाडीज बनने की कवायद करती है। शासन, प्रशासन, पंचायत स्तर पर जनप्रतिनिधियों के स्तर पर एक सशक्त जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है। इस अभियान में सामाजिक, सांस्कृतिक संगठनों का सहयोग भी लिया जा सकता है। ग्रामीण और पिछड़े इलाकों तक यह संदेश पहुंचाना बहुत जरूरी है कि टीका सुरक्षित है। अब कोई शक रहा ही नहीं तो अब लोगों की जिम्मेदारी है कि वह क्या चुनें खतरा या सुरक्षा। बेहतर यही होगा कि लोग भ्रम से बाहर निकलें आर टीका लगवाने के लिए आगे आएं। लोगों को निश्चित हो जाना चाहिए कि टीकाकरण का शरीर पर कोई निगेटिव असर नहीं पड़ता, जो असर होता है वह अन्य वैक्सीन लगवाने पर ही होता है। लोगों को टीकाकरण के डर मिटाने के लिए डॉक्टर बताते है , “कोरोना वायरस की वैक्सीन आपको कोविड-19 संक्रमण से बीमार पड़ने से बचा सकती है। दवाइयों की तरह वैक्सीन के भी साइड-इफेक्ट होते हैं।“ एक्सपर्ट्स का मानना है कि कोविड-19 वैक्सीन लगने के बाद एक व्यक्ति को कुछ साइड-इफेक्ट्स महसूस हो सकते हैं। ये साइड-इफेक्ट्स आमतौर पर हल्के होते हैं, जिसमें हल्का दर्द, सूजन या फिर इजेक्शन जहां लगा वहां की त्वचा का लाल होना, बुख़ार, ठंड लगना, थकावट आदि जैसे लक्षण शामिल हैं। जो मामूली हैं।

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