भारत-अमेरिका : मलेरिया की दवाई को लेकर आमने-सामने

जागरूक टाइम्स 780 Apr 8, 2020

नई दिल्ली। दुनिया के बाकी देशों की तरह भारत और अमेरिका जैसे बड़े देशों में भी जानलेवा कोरोना वायरस ने कहर बरपा रखा है। दोनों ही देश अपने यहां से कोरोना वायरस को खत्म करने और सक्रमित मरीजों का जल्द से जल्द इलाज करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। इस बीच भारत और अमेरिका मलेरिया के इलाज में कारगर हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वाइन दवाई को लेकर आमने सामने आ गए हैं। डॉनल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वाइन मुहैया कराने की अपील की थी। हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन' मलेरिया की एक पुरानी और सस्ती दवाई है। ट्रम्प ने श्रीलंका और नेपाल ने भी ऐसी ही मांग की। कोरोना से लडऩे के लिए भारत से मदद मांगने के बाद ट्रंप ने अब चेतावनी दी। ट्रंप ने कहा है कि अगर भारत हाइड्रो-ऑक्सी-क्लोरोक्विन के निर्यात से प्रतिबंध नहीं हटाता है तो वो भी जवाबी कार्रवाई करेंगे।

ट्रंप को भारत का जवाब
ट्रंप की चेतावनी के बाद विदेश मंत्रालय ने इस बारे में बयान जारी किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि भारत ने उन देशों को मलेरिया वाली हाइड्रोऑक्सी क्लोरोक्वीन दवा देने का मन बनाया है जहां कोरोना की महामारी ज्यादा फैली हुई है। हाइड्रोऑक्सी क्लोरोक्वीन और पैरासीटामॉल के निर्यात संबंधी प्रतिबंध में कुछ संशोधन संभव है। हालांकि यह बदलाव इन दवाओं के भारत में मौजूदा स्टॉक और घरेलू जरूरतों के आंकलन के आधार पर निर्भर करता है। इसमें कोरोना संबंधी मानवीय आधार और प्राथमिकताएं आंकते हुए फैसला लेंगे। किसी भी जिम्मेदार सरकार की तरह हम पहले यह सुनिश्चित करेंगे कि हमारे पास अपने लोगों के लिए दवाओं का पर्याप्त स्टॉक हो।

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